कन्नौज के छिबरामऊ में हुए स्लीपर बस हादसे में 20 से अधिक लोगों के जिंदा जलने की आशंका है। बस की आग इतनी भयानक थी कि जब आग शांत हुई तो अंदर से सिर्फ कंकाल और राख ही बाहर आई। किसी ने बेटा खोया तो किसी ने अपनी मां को खो दिया। किसी का पूरा परिवार ही आग में जलकर राख हो गया।
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आग बुझने के बाद कुछ ऐसा था बस का नजारा
- फोटो : अमर उजाला
बस में बैठ गंभीर रूप से झुलसे हुए छम्मीलाल ने बताया कि बस जब ट्रक से टकराई तब आधे से ज्यादा लोग गहरी नींद में थे। टक्कर लगने के बाद हुए तेज धमाकों से लपटें उठने लगीं। देखते ही देखते बस में चीख पुकार मच गई। छम्मीलाल की आंखों में यह कहते हुए आंसू आ गए। बोले मंजर इतना भयावह था कि आंखें बंद कराें तो फिर से वहीं सब नजर आता हैं। कानों में मासूमों की बचाओ बचाओ की आवाजें गूंज रही हैं।
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कन्नौज हादसा
- फोटो : अमर उजाला
जब बस भीषण तरीके से जल रही थी उस समय भी कुछ लोगों की आवाजें आ रही थी पर कोई बचाने वाला नही था। कन्नौज के छिबरामऊ में आग की लपटों में स्वाहा हुई अभागी बस में उगरापुर गांव के छम्मीलाल राजपूत भी अपने पुत्र सौरभ के साथ रजीपुर से जयपुर जाने के लिए सवार हुए थे।
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कन्नौज हादसा
- फोटो : अमर उजाला
बस के आग की लपटों में घिरने पर नीचे सीट पर बैठे छम्मीलाल ने अपनी व बेटे की जान बचाने के लिए खिड़की के शीशे को तोड़ने के लिए पहले हाथ और फिर पैर से शीशे पर प्रहार किया। लेकिन शीशा नहीं टूटा फिर वह अपना सिर शीशे में मारने लगे। शीशा टूटा तो पहले उन्होंने अपने पुत्र सौरभ को खिड़की से बस के बाहर नीचे खड़े लोगों को पकड़ा दिया। फिर वह उतरे शीशा तोड़ने में हाथ और पैर के साथ ही सिर पर भी कई जगह काफी चोट लग गई।
वह छिबरामऊ के अस्पताल में भर्ती हैं। जबकि सौरभ गांव आ गया है। छम्मीलाल जयपुर के सांगानेर में कपड़े के कारखाने में सिलाई का काम करते हैं। वह अपनी पत्नी शिवदेवी व सौरभ के साथ वहां रहते हैं। सौरभ वहां के आदर्श पब्लिक स्कूल में कक्षा एक का छात्र है। छम्मीलाल के भाई समरपाल के पुत्र गौरव की 3 दिसंबर को मौत हो गई थी। इसी पर पूरा परिवार गांव आया था। पत्नी को गांव छोड़ कर छम्मीलाल अपने पुत्र के साथ जा रहे थे।