बसपा नेता निर्मल तिवारी ने बुधवार को भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय ने लखनऊ में उन्हें पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराई। निर्मल तिवारी बसपा के टिकट पर तीन बार विधानसभा और एक बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि हर बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। 2014 में कन्नौज लोकसभा सीट से बसपा के ही टिकट पर सपा प्रत्याशी डिंपल यादव के खिलाफ चुनाव लड़े थे।
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बसपा नेता निर्मल तिवारी भाजपा में शामिल
कानपुर शहर के आवास विकास, कल्याणपुर निवासी निर्मल तिवारी बसपा के ब्राह्मण चेहरा के तौर पर जाने जाते थे। 2007 में उन्हें मात्र 672 मतों से भाजपा प्रत्याशी से हार का सामना करना पड़ा। 2012 में भी अच्छा चुनाव लड़े, लेकिन इस बार भी मात्र 7621 मतों से सपा प्रत्याशी से हार हुई। बसपा की सोशल इंजीनियरिंग के दौर में निर्मल तिवारी ने बड़ी संख्या में सवर्ण वोटों को अपने पक्ष में किया। इनके भाजपा में शामिल होने से बसपा को बड़ा झटका लगा है।
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बसपा नेता निर्मल तिवारी भाजपा में शामिल
भाजपा ने निर्मल तिवारी को कन्नौज और अकबरपुर लोकसभा क्षेत्र में प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी है। भाजपा का कन्नौज पर ज्यादा फोकस रहेगा। सपा ने कन्नौज से एक बार फिर डिंपल यादव को मैदान में उतारा है, तो भाजपा से सुब्रत पाठक भी दोबारा मैदान में हैं। पिछले चुनाव में सुब्रत पाठक डिंपल यादव से 19907 मतों के नजदीकी अंतर से हार गए थे। बसपा से निर्मल तिवारी तीसरे स्थान पर रहे थे।
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डिंपल यादव, निर्मल तिवारी
भाजपा ने निर्मल तिवारी को अपने पाले में करके उन्हें कन्नौज में प्रत्याशी सुब्रत पाठक के चुनाव प्रचार की कमान सौंपी है। पिछले चुनाव में ही डिंपल यादव को जीतने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी थी। निर्मल तिवारी के अभी तक बसपा में रहने से सपा-बसपा गठबंधन निर्मल तिवारी के पक्ष में पड़े सवर्ण वोटों का ध्रुवीकरण अपने पक्ष में मानकर चल रहा था। अचानक बसपा से निर्मल तिवारी का विकेट गिरने से सपा-बसपा गठबंधन में खलबली मच गई है।
निर्मल तिवारी बसपा के टिकट से तीन बार विधानसभा चुनाव और एक लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन हर बार हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2007 में कल्याणपुर से चुनाव लड़े। भाजपा प्रत्याशी से मात्र 672 मतों से हारे। 2012 में कल्याणपुर विधानसभा से ही सपा प्रत्याशी 7621 मतों से हारे। 2014 में कन्नौज लोकसभा सीट से बसपा के ही टिकट पर सपा प्रत्याशी डिंपल यादव के खिलाफ चुनाव लड़े। 1,29,000 मतों से हारे। 2017 में बसपा से ही टिकट पर गोविंद नगर विधानसभा से चुनाव लड़े। इस चुनाव में भी उनको हार का सामना करना पड़ा था।