कानपुर हैलट इमरजेंसी तक में गुरुवार को ऑक्सीजन सिलिंडरों की किल्लत हो गई। इमरजेंसी में मरीज भर्ती तो किए जा रहे हैं, पर तीमारदारों से कहा जा रहा है कि इलाज कराना है तो ऑक्सीजन सिलिंडर बाहर से खरीदकर लाओ, जबकि इमरजेंसी के सेंट्रल आक्सीजन प्लांट में 85 बड़े सिलिंडर आए हैं।
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कोरोना से मचा कोहराम
- फोटो : amar ujala
इमरजेंसी के ही दूसरे प्लांट में लिक्विड ऑक्सीजन भरी गई पर ढुलमुल व्यवस्था के चलते मरीजों को लो प्रेशर ऑक्सीजन दी गई, जिससे उनकी जान पर बन आई। 24 घंटे में 35 से अधिक मरीजों की मौत हो गई। हर्ष नगर निवासी अजीत तिवारी की पत्नी लक्ष्मी तिवारी को निमोनिया हो गया। नर्सिंगहोम में भर्ती न करने पर परिजन दोपहर 12 बजे उन्हें हैलट इमरजेंसी लाए। इमरजेंसी में काफी देर बाद स्ट्रेचर मिला तो परिजन उन्हें अंदर ले गए।
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वहां जूनियर डॉक्टर ने मरीज देखने से पहले ही लक्ष्मी के देवर रविशंकर दीक्षित से कह दिया कि इलाज कराना है तो आक्सीजन सिलिंडर बाहर से खरीदकर लाओ, वरना कहीं और ले जाओ। सिलिंडर की व्यवस्था करने का आश्वासन देने पर भर्ती कर लिया, पर जल्द से जल्द ऑक्सीजन सिलिंडर का बंदोबस्त करने के लिए कहा।
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परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद के बेटे मसवानपुर निवासी अली हसन (55) को बुधवार रात में सांस लेने में तकलीफ होेने पर हैलट इमरजेंसी में भर्ती कराया गया। गुरुवार को डॉक्टर ने अली हसन के बेटे शहनवाज आलम से पिता के लिए बाजार से ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदकर लाने के लिए कहा।
इमरजेंसी में लगे सेंट्रल ऑक्सीजन सिस्टम से बेड में लगी नली से ऑक्सीजन देने की गुहार लगाई। उससे नली भी लगाई गई, पर प्रेशर कम होेने के कारण उन्हें समुचित ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही। ऑक्सीजन तेज गति से मिले इसके लिए हैलट में ही दलाल से 12000 प्रति दिन किराये पर बाईपेप मशीन ली, जो खराब निकली। पैसे भी न लौटाने पर ईएमओ और पीआरओ से शिकायत की, पर दोनों ने टरका दिया।