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...तस्वीरों में देखें, अपनी ‘जांबाज सेना’ की ताकत

Sat, 21 Jan 2017 08:46 AM IST
संतोष सिंह, अमर उजाला, कानपुर
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भारतीय सेना - फोटो : रविन्दर सिंह भाटिया
कानपुर कैंट के कैवेलरी ग्राउंड पर भारतीय सेना को जानने, समझने (नो योर फोर्सेस) के लिए लगाई गई दो दिवसीय प्रदर्शनी का शुभारंभ शुक्रवार को हुआ। इस मौके पर टैंक, रॉकेट लांचर सहित तमाम युद्ध के साजो-सामान प्रदर्शित किए गए। केंद्रीय विद्यालय कैंट, आर्मी पब्लिक स्कूल और जयपुरिया के स्टूडेंट भारतीय सेना की ताकत को देखकर गदगद हो गए। प्रदर्शनी का हिस्सा बनने पर सबने गर्व महसूस किया। सेना के जवानों ने गीत गाए और वाहवाही बटोरी। 
जानें, कर्नल दुष्यंत सिंह ने क्या कहा...
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सेना में सब कुछ ट्रांसपैरेन्ट

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भारतीय सेना - फोटो : रविंदर सिंह भाटिया
दो दिवसीय प्रदर्शनी (20, 21 जनवरी) का उद्घाटन करने के बाद कर्नल दुष्यंत सिंह ने सेना की खूबी बताईं और स्टूडेंटों को सेना में जॉब के लिए प्रेरित किया। मेजर राहुल सिंह ने कहा कि प्रदर्शनी का उद्देश्य फौज के कामकाज को जनता तक पहुंचाना है। कहा कि सेना में सब कुछ पारदर्शी तरीके से होता है। इससे जुड़कर बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है। मेजर योगेंद्र सिंह कटियार ने बताया कि सैन्य प्रतिष्ठान, हथियार, टैंक से संबंधित तमाम स्टाल लगाए गए हैं। स्कूल, कॉलेज के स्टूडेंट के अलावा आम व्यक्ति भी प्रदर्शनी देखने आ सकते हैं। शनिवार को शाम छह बजे तक प्रदर्शनी चलेगी। 
जब पाकिस्तान पर किया हमला...
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टी-55 ने छुड़ाए थे पाकिस्तान के छक्के

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भारतीय सेना - फोटो : रविंदर सिंह भाटिया
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में ट्रवेल टैंक (टी-55) ने दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे। इस टैंक पर लैंड माइन का असर नहीं होता और वह रास्ता बनाते हुए आगे बढ़ता है। यही काम पाकिस्तान युद्ध के दौरान टैंक से किया गया था। टैंक 3-5 किलो मीटर की दूरी तक हमला कर सकता है। पांच मीटर की गहराई तक पानी में भी टैंक जा सकता है। यह टैंक सन् 1955 से भारतीय सेना का हिस्सा है। 42 टन वजन का टैंक मेड इन रसिया है। 
दुश्मनों के गढ़ में ऐसे फहराया भारतीय झंडा...

... तो दुश्मनों का कैंप तबाह

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भारतीय सेना - फोटो : रविन्दर सिंह भाटिया
दुश्मन सामने से घेराबंदी करने की फिराक में है। इस पर 14 सिखलाई चरतिकलार बटालियन के जवान गुरप्रीत, सुखजीत और हरजीत सहित अन्य ने अपनी पोजीशन संभाली। फिर आगे बढ़ते हुए 200 मीटर की दूरी तक पहुंचे और अटैक का आर्डर मिलते ही दुश्मनों पर हमला बोल दिया। कुछ ही देर में टैंक ने कैंप को तबाह कर दिया। साथ ही दुश्मनों के गढ़ में भारतीय झंडा फहरा दिया। यह नजारा शुक्रवार को कैंट के कैवेलरी ग्राउंड पर दिखा।
इस अंदाज से जीतें हैं हमारे सैनिक...
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सैनिकों की कठिन ड्यूटी को समझने का मौका मिला

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भारतीय सेना - फोटो : रविंदर सिंह भाटिया
इस रिहर्सल  के जारिए सेना ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया और लोगों को संदेश दिया कि कठिन परिस्थिति में देश सेवा की जाती है। युद्ध के दौरान टैंक और सैन्य वाहनों के मूवमेंट का भी प्रदर्शन किया गया। इसके जरिए सेना की दिनचर्या और कठिन ड्यूटी को समझने का मौका भी लोगों को मिला।इस मौके पर देश सेवा से ओतप्रोत गीत भी प्रस्तुत किए गए।  यह नजारा शनिवार को शाम 4 बजे से छह बजे के बीच फिर देखा जा सकता है।
सैनिकों का बढ़ा उत्साह...
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सेल्फी का क्रेज

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भारतीय सेना - फोटो : रविंदर सिंह भाटिया
अपनी सेना को जानने के उद्देश्य से लगी प्रदर्शनी में सेल्फी का क्रेज भी दिखा। शिक्षक, स्टूडेंट और आम लोग सेना के जवानों के साथ सेल्फी लेते नजर आए। सैन्य हथियारों के आसपास खड़े होकर ग्रुप फोटोग्राफ भी कराए गए। एयरफोर्स ने अनमैंड एयर व्हीकल का प्रदर्शन किया। पैराशूट फैक्ट्री, आर्डनेंस फैक्ट्री, एयरफोर्स स्टेशन और एयरफोर्स हास्पिटल की गतिविधि भी प्रदर्शित की गई।
 सेना में खराब खान-पान के आरोपों पर क्या बोले कर्नल...
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सेना देती है पौष्टिक आहार

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भारतीय सेना - फोटो : रविंदर सिंह भाटिया
सोशल मीडिया पर प्रसारित सेना के खराब खान-पान के आरोपों को प्रदर्शनी में झूठलाया गया। विशेष स्टाल लगाकर हर सैन्य अधिकारी और जवान के डायट चार्ट को भी प्रदर्शित किया गया। बताया गया कि जवान को रोजाना 180 ग्राम मीट मिलता है। साग-सब्जी, दूध, अंडा और अन्य खाद्य पदार्थों के जरिये सैन्य कर्मियों को बेहतरीन पौष्टिक आहार दिया जाता है।  प्रदर्शनी देखने वाले स्टूडेंटों से कहा गया कि सेना अपने जवानों का ख्याल रखती है। यह बेहतरीन कॅरियर के रूप में अपनाया जा सकता है।
 जानें, एमएम हाउजर डी-30 एक झटके में कैसे करता है दुष्मन का सफाया...

इनसे है सेना की ताकत

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भारतीय सेना - फोटो : रविंदर सिंह भाटिया
- 122 एमएम हाउजर डी-30 से 15300 मीटर की दूरी का लक्ष्य भेद सकता है। 3400 किलोग्राम वजन का हथियार 1983 से सेना के पास है। यह रशिया निर्मित है। 
- साइंलेंसर से एक बार में 40 राउंड गोलियां चलाई जा सकती हैं। एक राउंड में 40 गोलियां निकलती हैं। 30-100 मीटर दूर दुश्मन को ढेर किया जा सकता है। 
- 7.62 का इस्तेमाल वीवीआईपी मूवमेंट के दौरान होता है। टेलीस्कोपिक साइट के जरिये 800-1300 मीटर दूर दुश्मनों के गतिविधि पर निगाह रखी जा सकती है। सिंगल शॉट में 10 राउंड चलते हैं। 
- इनसास, एके-47 और रायफल की खासियत भी बताई गई। लाइफ मशीन गन से 1000 मीटर का लक्ष्य भेदा जा सकता है। 
- एनबीसी जैकेट, हेलमेट, बूट और हैंड गलब्ज के सहारे केमिकल वेपन से बचा जा सकता है। 
- रिमोट कंट्रोल, प्रेशर, टाइमर, कार रिमोट, वाशिंग मशीन, मोबाइल और तार बिछाकर बम विस्फोट करने का तरीका बताया गया। बम डिटेक्शन इक्विपमेंट भी दिखाए गए। 
- 9 एमए (सीएमजी) भारत में बनी है। यह 30 मीटर तक वार कर सकती है। 
- 40 एमएम मल्टी शूट ग्रेनेड लांचर 375 मीटर की दूरी का निशाना भेद सकता है। साउथ अफ्रीका में बना यह लांचर 6 किलो 50 ग्राम का है। यह जहां फटता है, उसके पासपास का पांच मीटर क्षेत्रफल तबाह हो जाता है। 
ऐसे किया जा सकता है दुश्मनों को भ्रमित...

ग्रुप टारगेट के लिए होता है इसका इस्तेमाल

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भारतीय सेना - फोटो : रविंदर सिंह भाटिया
- 30 एमएम आटोमैटिक ग्रेनेड लांचर 30 किलोग्राम वजन लेकर जा सकता है। इससे सात मीटर की दूरी का लक्ष्य आसानी से भेदा जा सकेगा। इस ग्रेनेड लांचर का इस्तेमाल ग्रुप टारगेट के लिए किया जाता है। 
- रॉकेट लांचर (4 एमएम) से टैंक तबाह किए जाते हैं। धुआं फैलाकर या फिर उजाला करके दुश्मनों को भ्रमित किया जा सकता है। मेड इन स्वीडन है। 
- कानपुर में बनी मशीनगन से 390 मीटर की दूरी भेदी जा सकती है। एक मिनट में 100 राउंड, 200 रैपिड फायर और 600-1000 फायर साइकिलिक राउंड में किया जा सकता है। यह हथियार सेना के पास 1962 से है। 
- एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल एक मिनट में तीन मिसाइल लांच करता है। इसकी रेंज 2 किलो मीटर है। यह 1962 से ही सेना का प्रमुख हथियार है। हैदराबाद में बन रही है। 
ऐसे होती है 18 किलो मीटर दूर तक की मानीटरिंग...
 
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सेना की बड़ी ताकत

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भारतीय सेना - फोटो : रविंदर सिंह भाटिया
- बैटिल फील्ड सर्विलांस रडार से 18 किलो मीटर दूर तक की मानीटरिंग की जा सकती है। यह विशेष तरह का कैमरा है। इसके जरिये रात में भी ढाई से तीन किलो मीटर दूर खड़े व्यक्ति, वाहन को निशाना बनाया जा सकता है। - टैंक (टी-72) मल्टी फ्यूल यूजर है। इसे डीजल, पेट्रोल और केरोसिन से चलाया जा सकता है। मेड इन रसिया टैंक एम-1 अजय को 1991 में भारतीय सेना को मिला। इस पर केमिकल वेपन का असर नहीं होता है। पांच मीटर गहरे पानी में भी चल सकता है। तीन तरह (हवाई, सामने और अगल-बगल) से वार किया जा सकता है। मारक क्षमता 4-5 किलो मीटर है। 
- इनफैंट्री व्हीकल मेड इन रशिया है। 1980 में भारतीय सेना को दिया गया। यह सेना की बड़ी ताकत है। मिसाइल भी लांच कर सकती है। थर्मल इमेजर माड्यूल कैमरे के जरिये रात में चार किलो मीटर दूर तक देखा जा सकता है। मारक क्षमता 4-5 किलो मीटर है। 
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