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भाजपा नेत्री मौत मामला: दीपक की गिरफ्तारी के बाद हो रहे हैं नए-नए खुलासे, विवेचना के बाद बदल सकती हैं धाराएं

Sat, 30 Apr 2022 11:49 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांदा

सार

बांदा में जिला पंचायत सदस्य श्वेता सिंह गौर की हत्या में आरोपी पति दीपक सिंह गौर को पुलिस ने गिरफ्तार किया। मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी के बाद उसे जेल भेज दिया गया। इससे पहले दीपक ने कई बातों का खुलासा किया। वहीं, इस मामले में पुलिस विवेचना के बाद धाराओं में तब्दीली कर सकती है। 
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श्वेता सिंह गौर - फोटो : अमर उजाला
जिला पंचायत सदस्य और भाजपा नेत्री श्वेता सिंह गौर की हत्या में नामजद पति और भाजपा नेता डॉ. दीपक सिंह गौर को अंतत: शुक्रवार को पुलिस ने नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया। अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। इसी केस में नामजद रिटायर्ड डीआईजी ससुर और सास तथा अधिवक्ता जेठ को पुलिस ने फिलहाल गिरफ्तार नहीं किया गया है।

शहर के इंदिरा नगर में बुधवार, 27 अप्रैल को दोपहर जिला पंचायत सदस्य और भाजपा नेत्री श्वेता सिंह गौर का बंद कमरे में फंदे पर टंगा मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने प्रथम दृष्टया इसे आत्महत्या माना है। दूसरी तरफ मृतका के पिता, भाई आदि परिजनों ने हत्या का आरोप लगाते हुए श्वेता के ससुर रिटायर्ड डीआईजी राजबहादुर सिंह, पति भाजपा नेता दीपक सिंह गौर, सास पुष्पा देवी और जेठ धनंजय सिंह (अधिवक्ता) के विरुद्ध धारा 302 (हत्या), 498 ए (दहेज के लिए हत्या) और दहेज प्रतिषेध अधिनियम में गुरुवार को तड़के शहर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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श्वेता सिंह की बेटियों ने लगाई न्याय की गुहार - फोटो : अमर उजाला
सत्तारूढ़ दल से जुड़ा यह केस काफी हाई प्रोफाइल और चर्चित हो गया है। मृतका श्वेता की मासूम बेटियों की फरियाद और पिता तथा भाइयों के आरोप मीडिया में सुर्खियां बनने और आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस पर बढ़ते दबाव के बाद अंतत: शुक्रवार को दोपहर पुलिस ने आरोपी पति दीपक गौर को मटौंध थाना क्षेत्र के इचौली तिराहे से गिरफ्तार करने का दावा किया। मटौंध थाना प्रभारी अर्जुन सिंह के मुताबिक दीपक ने बांदा में किसी से पैसे मंगवाए थे। यह पैसा लेने के लिए वह इचौली तिराहे के पास किसी का इंतजार कर रहा था। तभी उन्होंने गिरफ्तार कर लिया। 
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पुलिस की गिरफ्त में दीपक सिंह गौर - फोटो : अमर उजाला
दीपक ने कहा श्वेता को वह फांसी लगाते देख नहीं सकता था
अदालत में पेशी के बाद जेल जाते समय दीपक सिंह गौर ने मीडिया से कुछ बातचीत की और सवालों के जवाब दिए। उसने कहा कि उस पर हत्या का मुकदमा दबाव में लिखा गया है। मेरे माता-पिता, भाई और सारे लोग निर्दोष हैं। बड़ी बिटिया का दाखिला कराने हम दोनों लखनऊ गए। 15 दिन वहीं अपने भाई के घर रहे। घटना के समय बिटिया को लेने स्कूल गया था। तभी वहां फोन पर फांसी की सूचना मिली। दीपक ने कहा कि जिस वीडियो में हत्या की बात कही है, उस वक्त नशे में था। यह 20 अप्रैल का वीडियो है। दीपक ने यह भी कहा कि श्वेता को वह फांसी लगाते देख नहीं सकता था। इसीलिए वहां से चला गया। हालांकि कुछ ही देर बाद अपनी बात से पलटते हुए कहा कि वह बेटी को लेने स्कूल गया था। तभी वहां फोन पर फांसी लगाने की सूचना मिली। 

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दीपक और श्वेता - फोटो : अमर उजाला
मैं निर्दोष हूं, मेरी जीवन संगिनी चली गई
गिरफ्तार किए जाने के बाद डॉ.दीपक सिंह गौर जो अधिवक्ता भी हैं ने अनौपचारिक बात में मीडिया से कहा कि मैं निर्दोष हूं। मेरी जीवन संगिनी चली गई। मैं बहुत दुखी हूं। घटना वाले दिन पत्नी से कोई विवाद नहीं हुआ। यह पूछे जाने पर कि घटना के बाद दो दिन कहां रहे? इस पर कहा कि वह बाहर था। लेकिन स्थान का नाम नहीं बताया। हालांकि चर्चा है कि वह तिंदवारी क्षेत्र के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के यहां रहा। एक बसपा नेता उसके माध्यम रहे।
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बड़ी राजनैतिक हस्तियों के साथ श्वेता सिंह गौर - फोटो : अमर उजाला
श्वेता मिलनसार थी, दीपक की हरकतों से परेशान थे लोग
श्वेता गौर बहुत सरल स्वभाव की थी। दीपक भी हंसमुख है। दोनों एक-दूसरे को बहुत मानते थे। कभी झगड़े की बात सामने नहीं आई। बस दीपक में एक कमी थी कि वह हर दिन अपने दोस्तों को घर पर बुलाकर शराब पीता-पिलाता था। उनकी खूबसूरत जिंदगी में इतनी बड़ी अनहोनी हो जाएगी, यह कभी किसी ने नहीं सोचा था। यह कहना है दीपक सिंह गौर के आसपास रहने वालों का। पड़ोसियों के मुताबिक वैसे दीपक मोहल्ले में ज्यादा मतलब नहीं रखता था। दोस्तों को छोड़कर न ही उसका मोहल्ले में आना-जाना था। लेकिन श्वेता गौर बहुत मिलनसार थी। दीपक के घर में दोस्तों का जमावड़ा बहुत रहता था। देर रात तक लोग रहते और शराब पीते थे। बस उसकी यह हरकत पड़ोसियों को नापसंद थी। 
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श्वेता सिंह गौर - फोटो : अमर उजाला
श्वेता-दीपक के कलह की भनक नहीं रही भाजपाइयों को
भाजपा नेत्री श्वेता सिंह गौर और भाजपा नेता अधिवक्ता डॉ. दीपक सिंह गौर के बीच चल रही कलह की भनक भाजपाइयों को भी नहीं रही। जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों का कहना है कि तिंदवारी-जसपुरा क्षेत्र में होने वाले संगठन के कार्यक्रमों में दोनों पति-पत्नी बढ़ चढ़कर सहभागिता करते रहे। लेकिन कभी भी मनमुटाव को जाहिर नहीं होने दिया। बांदा सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी का कहना है कि घरेलू मामलों में दखल ठीक बात नहीं। कलह की जानकारी सामने आती, तो निपटारा की कोशिश भी की जाती। जिलाध्यक्ष संजय सिंह ने बताया कि उन्हें श्वेता और दीपक के बीच चल रहे विवाद की जानकारी नहीं हुई। न ही दोनों ने पार्टी नेताओं को कोई बात बताई।
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श्वेता सिंह गौर - फोटो : अमर उजाला
विवेचना में हो सकती है धाराओं में तब्दीली
जिला अधिवक्ता संघ के सचिव और फौजदारी के वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश कुमार सिंह की राय में श्वेता गौर मामले में दर्ज रिपोर्ट में लगाई गई हत्या की धारा विवेचना और अदालत में टिक नहीं पाएगी। शायद पुलिस ही अपनी विवेचना में इसे धारा 306 आईपीसी (आत्महत्या के लिए प्रेरित करना) में तब्दील कर दे। क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी हैंगिंग पुलिस बता रही है। और भी कई स्थलीय परिस्थितियां साक्ष्य बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि यदि धारा 306 लगाई गई तो इसमें सात वर्ष की कैद का प्रावधान है। श्वेता की बेटियों द्वारा पिता व अन्य परिजनों पर लगाए गए आरोपों के बारे में अधिवक्ता ने कहा कि इसे दबाव में कहा जाना भी माना जा सकता है। विवेचना के दौरान पुलिस 161 सीआरपीसी के तहत बेटियों के बयान अदालत में कराएगी। वही मान्य होंगे।
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