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सपा-बसपा गठबंधन पर बीजेपी-कांग्रेस का हमला, कुछ इस तरह से कसे तंज और बताए फायदे

Sun, 13 Jan 2019 09:09 AM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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आगामी लोकसभा चुनाव के लिए सपा-बसपा में गठबंधन पर भाजपा और कांग्रेस के नेता अभी खुलकर कुछ नहीं बोल रहे हैं, लेकिन दोनों ही दलों ने इस चुनावी चुनौती से निपटने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। भाजपा और कांग्रेस के नेता इस गठबंधन को एक-दूसरे के लिए नुकसानदेह और अपने लिए फायदेमंद बता रहे हैं।
 
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1993 का विधानसभा चुनाव इन दोनों दलों ने मिलकर लड़ा था। इसमें गठबंधन ने उन्नाव जिले की सात विधानसभा सीटों में से चार पर कब्जा किया था। अयोध्या मुद्दे की लहर के बाद भी भाजपा के खाते में केवल तीन सीटें आई थीं और कांग्रेस का खाता भी नहीं खुला था। मौजूदा हालात पर भाजपा और कांग्रेस के नेता 1993 के विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में जमीन-आसमान का अंतर बता रहे हैं। इस गठबंधन का लोकसभा चुनाव पर कोई फर्क न पड़ने की बात कह रहे हैं।
 
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भाजपा जिलाध्यक्ष श्रीकांत कटियार ने बताया कि सपा-बसा गठबंधन का लोकसभा चुनाव पर असर नहीं पड़ेगा। उनके मुताबिक अगर विधानसभा चुनाव होता तो शायद इसका कुछ असर भले ही पड़ता। लोकसभा चुनाव राष्ट्रीय नेतृत्व पर लड़ा जाता है।

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भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी का चेहरा ही काफी होगा। उन्होंने दृढ़ निश्चय और देश हित में कड़े फैसले लेने वाले प्रधानमंत्री ने रूप में पूरी दुनिया में देश की क्षवि सुधारने का भी काम किया है। यही भाजपा की जीत का आधार बनेगा। जबकि विपक्षी दलों के पास प्रधानमंत्री पद के लिए कोई चेहरा नहीं है।
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कांग्रेस के जिलाध्यक्ष डा. एसएन यादव ने बताया कि सपा-बसा में गठबंधन होने से भाजपा को फर्क पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की लड़ाई तानाशाही के खिलाफ है। हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी तानाशाही को हटाने के लिए कटिबद्ध हैं और संघर्ष कर रहे हैं। हम तो चाहेंगे कि तानाशाही को समाप्त करने लिए सभी दल मिलकर संघर्ष करें। देशवासी भी राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट हों।
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