कानपुर के बिठूर महोत्सव में कव्वाली का भव्य आयोजन किया गया। इसमें कव्वाल मुस्तफा नाज और रूबी ताज ने शायरी और कव्वालियों का ऐसा समागम किया कि हर कोई मंत्रमुग्ध होकर नाचता- झूमता दिखाई दिया। इसी बीच अचानक कव्वाली रुक गई। साउंड सिस्टम में तकनीकि खराबी आ गई थी।
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कव्वाल मुस्तफा नाज
मुस्तफा नाज ने ‘मयखाने में यही रोज हुआ करता है, पीने वाला तो समुंदर की दुआ करता है’... इस शायरी सुनाकर समां बांधा। इसके बाद ‘चढ़ता सूरज धीरे- धीरे ढल जाएगा’.. और‘ झूम बराबर झूम शराबी’... आज अंगूर की बेटी से मोहब्बत कर ली, यह बगावत मैंने कर ली... सुनाकर माहौल बना दिया। रूबी ताज ने ‘ उसकी हर अदा पर मेरा दिल निसार है’... सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।
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कव्वाल मुस्तफा नाज
साउंड ने कव्वालों और दर्शकों को किया परेशान
साउंड खराब होने की वजह से कव्वाली लगभग पंद्रह मिनट बाद शुरू हो पाई। इसके बाद मुश्तफा नाज और रूबी ताज ने कव्वाली शुरू की तो तकनीकी खराबी होने पर सीटी की तरह तेज आवाज बजने लगी। ऐसा कई बार हुआ। इसकी वजह से उन्हें बीच में रुकना पड़ा।
नेताओं की होड़, अधिकारी खड़े रहे
बिठूर महोत्सव में नेताओं की होड़ रही। विधायकों के साथ उनके सहयोगियों की ऐसी भीड़ रही कि अधिकारियों को बैठने की जगह नहीं मिली। कई बार ऐसा हुआ कि आलाधिकारी इधर-उधर टहलते नजर आए। वीआईपी लोगों के लिए मंच के आगे की दो लाइनें रिजर्व की गई थी। इसमें लगभग दो सौ लोगों के बैठने का इंतजाम था लेकिन शुक्रवार को इतनी भीड़ हुई कि यह जगह नाकाफी साबित हुई।