ठंड के सीजन में साइबेरिया से आने वाले विदेशी पक्षियों को जहरीला अनाज खिलाकर मौत के घाट उतारा जा रहा है। यह सिलसिला पिछले कई सालों से चल रहा है। यही वजह है कि कानपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों में विदेशी पक्षियों के आने की तादाद कम होती जा रही है।
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यह चौंकाने वाला खुलासा वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के पोस्ट मानसून सर्वे में हुआ है। सर्वे में यह भी कहा गया है कि यदि इस दिशा में ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में विदेशी पक्षियों का आना बंद हो जाएगा।
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वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के विशेषज्ञों के अनुसार कानपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों में विदेश से ज्यादातर दो प्रजातियों के पक्षी आते हैं। एक है बार हेडिड गूज और दूसरा है रेडी शेल्डक। रेडी शेल्डक को भारत में चकवा-चकवी के नाम से जाना जाता है। इसका एक और नाम है, सुरखाब पक्षी। यह देखने में काफी खूबसूरत होता है। सर्वे में बताया गया है कि गंगा में मछलियों का शिकार तेजी से हो रहा है।
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मछलियों को मारने के लिए शिकारी गेहूं या दूसरे अनाज को किसी जहरीले लिक्विड (द्रव) में भिगोते हैं। फिर इस दाने को गंगा में डालकर मछलियों का शिकार करते हैं। इस सीजन में आने वाले विदेशी पक्षियों को भी ये शिकारी इसी तरह मारते हैं।
जहरीले दाने को गंगा में फेंक देते हैं। इसके बाद विदेशी या अन्य पक्षी यह दाना खा लेते हैं। सर्वे में कहा गया है कि इस जहरीले दाने को खाने से पक्षी बेहोश हो जाते हैं और शिकारी उन्हें पकड़ लेते हैं। जानकारी के अनुसार विदेशी पक्षियों के मांस के शौकीनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इसकी वजह से इन पक्षियों का शिकार पहले से ज्यादा हो रहा है।
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दो मौसम में होता है सर्वे, पोस्ट मानसून सर्वे जारी
वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया पोस्ट मानसून और प्री मानसून में गंगा नदी और इसके आसपास के क्षेत्रों में पाए जाने वाले जीव जंतुओं का अध्ययन करती है। प्री मानसून यानी गर्मियों में जलीय जंतुओं का सर्वे किया जाता है।
पोस्ट मानसून में पक्षियों का अध्ययन होता है। इस समय इंस्टीट्यूट की टीम गंगा के रास्ते पोस्ट मानसून सर्वे के लिए निकली है। टीम के सदस्य दो दिसंबर को हरिद्वार से और बिजनौर से चार दिसंबर से निकले। कानपुर में 21 दिसंबर को पहुंचे और सर्वे किया। टीम सोमवार को फतेहपुर से आगे निकल गई थी। टीम में शामिल विशेषज्ञों में आफताब उस्मानी सौरव, रहीम प्रमुख हैं।
साइबेरिया या इसके आसपास के देशों से आने वाले पक्षियों के लिए ठंड में यहां का मौसम मुफीद लगता है। इन दिनों वहां का तापमान माइनस में चला जाता है। इस कारण ये पक्षी अपने वंश को बढ़ाने के लिए खासकर उत्तर भारत का रुख करते हैं।