आतिशबाजी करते समय खुद का और आसपास रहने वाले पशु पक्षियों का जरूर ध्यान दें। तेज आवाज वाले पटाखों से पक्षियों की मौत भी हो सकती है। तेज आवाज वाले पटाखों से जानवरों को सदमा लगता है। गर्भवती पशुओं का गर्भपात भी हो सकता है।
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कानपुर चिड़ियाघर के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. आरके सिंह ने बताया कि इंसान को मालूम होता है कि पटाखा दगने वाला है, इससे या तो वह कान बंद कर लेता है या उनकी मानसिक रूप से तैयार हो जाता है। जबकि पशु पक्षियों को इसका अंदाजा नहीं होता है और अचानक होने वाली तेज आवाज से उन्हें सदमा लगता है। इससे उनकी मौत भी हो सकती है। यही कारण है कि पालतू जानवर पटाखों की आवाज से दुबके रहते हैं। बेचैनी की वजह से खाना-पीना भी छोड़ देते हैं।
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पार्कों और पेड़ों के पास न जलाएं पटाखे
गौरैया बचाओ अभियान के संयोजक गौरव बाजपेई ने कहा कि दिवाली बड़ा त्योहार है, इसमें खुशियां जरूर मनाएं। बस तेज आवाज वाले पटाखों से दूरी बनाकर रखें। पार्कों और पेड़ों के आसपास तो पटाखे कतई न जलाएं, क्योंकि यहां पक्षियों के होने की ज्यादा संभावना होती है। सिर्फ रोशनी वाले और कम आवाज वाले पटाखे जलाएं।
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दिवाली ऐसी मनाएं कि किसी को तकलीफ न हो
गो-गौरैया संरक्षण समिति के अध्यक्ष मनीष पांडेय ने बताया कि दिवाली पर पटाखे जलाना खुशियों का प्रतीक है। हालांकि अब मौजूदा समय में वायु प्रदूषण बढ़ा है। इससे लोगों को परेशानियां हो रही हैं। इसलिए खुशियों के त्योहार को इस तरह से मनाएं कि सभी खुश हों। किसी को तकलीफ न हो। कम आवाज वाले और कम प्रदूषण वाले पटाखे जलाएं। गाय और गौरैया ही नहीं बल्कि हर जानवर और इंसान को तेज आवाज के पटाखों से परेशानियां होती हैं।
पटाखे जानवरों के सबसे बड़े दुश्मन
पीपुल फॉर एनिमल की अध्यक्ष अर्चना त्रिपाठी कहती हैं पटाखे जानवरों के सबसे बड़े दुश्मन हैं। पटाखों के शोर से जानवर इधर-उधर भागते हैं। इसमें खुद भी घायल होते हैं और दूसरों को भी घायल कर देते हैं। चिड़ियों का दिल बहुत कमजोर होता है। धुएं से भी जानवर परेशान होते हैं। इसके अलावा कई बार तो कूड़े में पड़े पटाखों को जानवर खा जाते हैं। इनके फटने से घायल भी हो जाते हैं। इसलिए दिवाली ऐसी मनाएं कि किसी को तकलीफ न हो।