साइबेरियन पक्षियों से बर्ड फ्लू का सबसे ज्यादा खतरा है। हर साल कानपुर प्राणि उद्यान में देश-विदेश के अप्रवासी पक्षी अपना समय बिताने यहां आते हैं। इन पक्षियों से बर्ड फ्लू का संक्रमण दूसरे प्रवासी पक्षियों को हो सकता है।
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डेमो पिक
कानपुर के मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ. एसएन सिंह का इस बारे में कहना है कि बर्ड फ्लू को लेकर विभाग पूरी तरह से सतर्कता है। संक्रमित अप्रवासी पक्षियों के बीट और लार से अन्य पक्षी बीमार न हों इसके लिए सावधानी बरती जाएगी। मुर्गी फार्म चलाने वालों को जागरूक किया जाएगा ताकि यह बीमारी शहर में न फैले।
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बर्ड फ्लू
बर्ड फ्लू (एवियन इनफ्लूएंजा) एक संक्रमित पक्षी से दूसरे में फैलता है। इसका वायरस बेहद खतरनाक है, जिसकी चपेट में इंसान भी आ सकता है। इस वायरस से निपटने के लिए अब तक कोई टीका नहीं विकसित हुआ है।
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प्रवासी पक्षियों का आगमन सर्दियों में प्रवासी पक्षियों का आगमन शुरू हो जाता है। कई पक्षी विदेश से आते हैं। उनमें बर्ड फ्लू के संक्रमण की आशंका रहती है। ये ऊंचे पेड़ों पर नदियों या तालाब किनारे शरण लेते हैं। बर्ड फ्लू से संक्रमित होने पर इनके संपर्क में आने पर अन्य पक्षी भी संक्रमित हो जाते हैं। चूंकि कौआ सभी जगह आसानी से पहुंच जाता है, इसलिए उससे सबसे अधिक खतरा रहता है।
वहीं पशु चिकित्सा अधिकारी का यह भी कहना है कि बर्ड फ्लू को लेकर हर 15 दिन बाद सैंपलिंग होती रहेगी। जब तक नेगिटिव रिपोर्ट नहीं आती सैंपलिंग जारी रहेगी। झील के पानी की भी सैंपलिंग होगी। लगातार झील में लाल दवाई का छिड़काव जारी है। इसके अलावा टीम की निगरानी में है कि कहीं कोई ऐसा पक्षी तो नहीं जो बर्ड फ्लू की चपेट में आया हो।