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बिकरू कांड: आठ पुलिस वालों की हत्या करने से पहले गलत नाम और पते से लिए गए थे 15 मोबइल सिम, जांच के आदेश

Thu, 12 Nov 2020 08:48 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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विकास दुबे कांड - फोटो : अमर उजाला
एसआईटी की जांच में बिकरू गांव व बिकरू कांड के मुख्य सरगना विकास दुबे से जुड़े ऐसे 15 लोगों के असलहा लाइसेंस और मोबाइल सिम लेने के मामले में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जिला प्रशासन के पांच पहुंची जांच रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है।

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विकास दुबे कांड - फोटो : amar ujala
जिला प्रशासन ने इस मामले में सीबीसीआईडी जांच के आदेश जारी किया है। साथ ही इस मामले में एक पूर्व असलहा बाबू की भूमिका का संदिग्ध मानते हुए उसके खिलाफ भी कार्रवाई के आदेश हुए हैं। इनमें कुछ ऐसे भी हैं, जिनका बिकरू से कोई लेना देना नहीं है। 


 

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विकास दुबे कांड - फोटो : amar ujala
एसआईटी बताया गया है कि विकास दुबे, उसकी पत्नी, उसका भाई, उसके सहयोगी जय वाजपेयी सहित अन्य लोगों ने सिम लेने,असलहा लाइसेंस लेने और पासपोर्ट बनवाने में तथ्य छुपाकर काम कराया गया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर अपर जिलाधिकारी अतुल कुमार की तरफ से बुधवार को एसआईटी की रिपोर्ट पर एक-एक करके चर्चा की गई।

 

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विकास दुबे का करीबी जय - फोटो : अमर उजाला
तय किया कि इस पूरे मामले के सभी आरोपियों के खिलाफ सीबीसीआईडी जांच की जाएगी। साथ ही असलहा विभाग में वर्ष 2005 में तैनात एक असलहा बाबू की की जांच के भी आदेश दिए गए हैं। यह असलहा बाबू कौन था और कहां पर इस समय तैनात है, इसकी पड़ताल भी की जा रही है।

 
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विकास दुबे कांड - फोटो : amar ujala
यह लोग है शामिल, इस तरह किया फजीवाड़ा
विकास दुबे, रामकुमार दुबे अंजलि दुबे, दीपक, जय वाजपेयी, विष्णुपाल उर्फ जिलेदार, अमित उर्फ छोटे बऊआ, दिनेश कुमार, रवींद्र, अखिलेश, आशुतोष, अरविंद त्रिवेदी, कंचन त्रिवेदी (अरविंद की पत्नी) के नाम से जारी हुए असलहा लाइसेंस में ज्यादातर लोगों ने अपना आपराधिक इतिहास छुपाया तो कुछ ने पता और दूसरी जानकारियां गलत दी हैं। इसके बावजूद लाइसेंस जारी कर दिया गया।
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