कन्नौज बस हादसे की जांच कर रहे विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ के डिप्टी डायरेक्टर जी खान ने इमरजेंसी दरवाजा और खिड़की न होना भी ज्यादा लोगों की मौत कारण माना। कहा, बाहर निकलने के लिए इमरजेंसी दरवाजा न होने की वजह से अधिकांश लोग आग लगने के दौरान बस के अंदर ही फंसकर रह गए और बाहर नहीं आ सके।
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कन्नौज बस-ट्रक हादसा
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बस को मानकविहीन बताया। उधर, बस हादसे की मजिस्ट्रियल जांच डीएम रविंद्र कुमार ने एडीएम गजेंद्र कुमार सिंह को सौंपी है। वहीं विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ में हड्डियों का डीएनए टेस्ट भी शुरू हो गया है।
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कन्नौज बस हादसा
- फोटो : self
विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ के डिप्टी डायरेक्टर और मेडिकोलीगल एक्सपर्ट जी खान ने जोनल फील्ड यूनिट कानपुर जोन प्रभारी सुधीर द्विवेदी और जिला फील्ड यूनिट टीम प्रभारी रामेंद्र शंकर श्रीवास्तव के साथ शनिवार की रात आग से जलकर राख हुई बस के अंदर से कई नमूने एकत्र किए।
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कन्नौज हादसा
- फोटो : अमर उजाला
टीम ने बस में इमरजेंसी गेट और खिड़की नहीं पाई। साथ ही बस के पीछे कांच और ग्रिल की खिड़की की जगह टिन जड़ी हुई मिली। इसको देखते हुए बस को मानकविहीन होना बताया गया। खान का कहना है कि इन्हीं वजहों से आग लगने के दौरान अधिकांश लोग अंदर फंस गए और बाहर नहीं निकल सके।
उधर, बस में मिली हड्डियों और अवशेषों को लेकर डिप्टी डायरेक्टर खान लखनऊ चले गए। बताया कि डीएनए टेस्ट शुरू हो गया है, इसके बाद ही मृतकों की संख्या का पता चल सकेगा।