फिल्म ‘सोनचिड़िया’ में बागी इंदूमती का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ग्रामीण महिलाओं की मुरीद हो गई हैं। बोलीं, जितना काम ग्रामीण महिलाएं करती हैं उतना शायद ही कोई कर सके। ‘अमर उजाला’ से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि इंदूमती के किरदार में उन्होंने वह सबकुछ अनुभव किया जो ग्रामीण महिलाएं रोज करती हैं।
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यहां के कॉलेज काफी अच्छे हैं- भूमि
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उन्होंने महिलाओं की स्थिति पर चिंता जताई। कहा कि 50 साल पहले महिलाओं की जो स्थिति थी उसमें आज कोई खास बदलाव नहीं हुआ है। भूमि ने बताया कि सोनचिड़िया में इंदूमती ऐसी महिला है जिसने कई उत्पीड़न सहे।
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एक समय ऐसा आया जब पानी सिर के ऊपर से निकलने लगा तो उसने उठा ली बंदूक और बन गई बागी। भूमि का कहना है कि इंदूमती की तरह ही आज महिलाएं उत्पीड़न पर आवाज उठाने लगी हैं। महिलाओं को अपनी शक्ति का एहसास हो गया है।
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भूमि ने कहा कि कानपुर में अपनी फिल्म प्रमोशन के दौरान लोगों का जोश और उत्साह देख अच्छा लगा। लोगों ने हमें और सुशांत को काफी प्यार दिया। एकसाथ इतनी भीड़ हैरान कर देने वाली थी। मुंबई में कॉलेज इतने बड़े नहीं होते हैं, यहां के कॉलेज काफी अच्छे हैं।
घर संभालना, चूल्हे पर खाना बनाना, बच्चों को संभालना, खेत में काम करना। यह सबकुछ उन्होंने इस फिल्म की शूटिंग के दौरान किया। फिल्म ने उन्हें काफी नया अनुभव दिया है। इंदूमती का किरदार निभाने के बाद वह खुद को अच्छा इंसान मानने लगी हैं।