कानपुर का बेहमई कांड एक बार फिर चर्चा में है। 18 जनवरी को फैसला आने की उम्मीद है। देशभर में चर्चित रहे बेहमई कांड में पुलिस और अभियोजन की लापरवाही के कारण लंबी सुनवाई चली। हालात यह रहे कि 20 लोगों की हत्या और छह लोगों को गोली मारने के मामले में 31 साल बाद पहली गवाही हुई थी।
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बेहमई कांड फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
और तो और पंचनामा भरने वाले डॉक्टर की गवाही का नंबर 32 साल बाद आ सका था। अभियोजन भले ही फैसला आने में देरी के कई कारण गिनाते रहे, लेकिन हर कोई एक ही बात कहता है कि न्याय में इतनी देरी ठीक नहीं।
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फूलन देवी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
14 फरवरी 1981 को बेहमई में शाम पांच बजे डकैतों ने एक लाइन में लोगों को खड़ा कर गोलियां बरसाई थी। इसमें 20 ग्रामीणों की मौत और छह लोग घायल हुए थे। इस मुकदमे में अभी तक फैसला नहीं आ सका है। इससे भी चौंकाने वाली बड़ी बात कि 38 साल 10 महीने बाद भी चार आरोपियों को पुलिस नहीं पकड़ सकी है।
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फूलन देवी
- फोटो : अमर उजाला
इससे अधिवक्ता और लोग पुलिस और अभियोजन पर कई तरह के सवाल खड़े करते हैं। इस मुकदमे की सुनवाई की हालत यह रही कि 31 साल बाद 24 दिसंबर 2012 को वादी राजाराम सिंह की पहली गवाही हुई। मुकदमे में कुल 40 गवाह बनाए गए। कुछ गवाहों के मरने और कुछ के दिए गए पते पर न मिलने के कारण 15 लोगों की गवाही के बाद सुनवाई पूरी की गई।
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फूलन देवी
- फोटो : अमर उजाला
बचाव पक्ष के अधिवक्ता गिरीश नारायन दुबे ने बताया कि मृतकों का पोस्टमार्ट करने वाले डॉ. आनंद सिंह की गवाही का नंबर 32 साल बाद दो जनवरी 2013 को आया। दूसरे डॉ. एसपी पांडेय की गवाही 27 फरवरी 2013 और तीसरे डॉ. सीके सिंह की गवाही 12 अप्रैल 2013 को हो सकी।
जिला शासकीय अधिवक्ता राजू पोरवाल का कहना है कि सभी अभियुक्तों के इकट्ठा न होने के कारण सुनवाई लंबी चली। बाद में फरार चल रहे अभियुक्तों की फाइल अलग कर ट्रायल शुरू कराया गया। इस कारण अब मुकदमे का फैसला करीब है।