फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Beggars Gang: आवाज सुनकर दहशत में आया और पहचान लिया, सुरेश बोला- यही सब हैं साहब, जिन्होंने मेरा ये हाल किया

Wed, 09 Nov 2022 06:23 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
1 of 5
Human trafficking case - फोटो : अमर उजाला
कानपुर में भिखारी गैंग की यातनाओं के शिकार सुरेश मांझी का आरोपियों से पुलिस ने आमना-सामना कराया। राज और आशा ने जैसे ही अपनी जुबान खोली, आवाज सुनते ही सुरेश चौंक गया। दहशत में आ गया। तुरंत उनको पहचान लिया। पुलिस साक्ष्य के तौर पर यही देखना चाहती थी। सुरेश ने पुलिस को बताया भी कि यही लोग हैं, जिन्होंने उसकी जिंदगी नर्क बना दी। फरार आरोपी विजय की मां को भी उसके सामने ले गए। उसको भी सुरेश आवाज से पहचान गया।

सुरेश इस समय हैलट में भर्ती है। एक आंख की रोशनी पूरी तरह नहीं आई है। दूसरी आंख का इलाज जारी है। उम्मीद है कि शायद रोशनी लौट आए। वर्तमान में उसको नहीं दिखाई दे रहा है। जब पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा तो उनकी शिनाख्त करानी जरूरी थी। चूंकि सुरेश को दिखाई नहीं देता है, इसलिए आवाज से पहचान कराई गई। डीसीपी साउथ ने बताया कि सुरेश ने राज नागर, उसकी मां आशा व विजय की मां की आवाज आसानी से पहचान ली।
विज्ञापन

2 of 5
Human trafficking - फोटो : अमर उजाला
बोला...यही सब हैं साहब, जिन्होंने मेरा ये हाल किया
सुरेश को जब पता चला कि आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं, तो उसको सुकून मिला। उसने पुलिसकर्मियों से कहा कि साहब यही सब लोग हैं, जिन्होंने मेरा ये हाल किया। इतना तड़पाया, प्रताड़ित किया कि जिंदा रहने की उम्मीद नहीं थी। पता नहीं कैसे मेरी सांसें चलती रहीं। ये बातें सुनकर आरोपी खामोश रहे, क्योंकि उनकी करतूतें उजागर हो रही थीं।
विज्ञापन

3 of 5
Human Trafficking Case - फोटो : अमर उजाला
आरोपियों ने बताया कि विजय ने अपने घर पर काफी दिनों तक सुरेश को रखा था। तब उसकी बहन तारा जड़ीबूटी लाती थी। उसमें से कोई तरल पदार्थ सुरेश की आंखों में डालती थी। धीरे-धीरे सुरेश की आंखों की रोशनी चली गई। पुलिस अब तारा की भूमिका की जांच कर रही है।

4 of 5
Human trafficking - फोटो : अमर उजाला
30 अक्तूबर को शहर में छोड़ा था
राज ने बताया कि दिल्ली के नागलोई में सुरेश को रखा था। फुटपाथ पर सुलाते थे। सुबह होते ही भीख मंगवाने के लिए सड़क पर, तो कभी चौराहे पर छोड़ देता था। शाम को वापस ले आता था। जो पैसे मिलते थे वह उसे खुद रख लेता था। जब तबीयत खराब हुई, तो इलाज शुरू कराया। पैसे अधिक लगने पर 30 अक्तूबर को कानपुर लाकर छोड़ दिया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
Human trafficking - फोटो : अमर उजाला
विजय अभी भी फरार, तलाश जारी
नौकरी झांसा देकर बंधक बना 30 साल के सुरेश मांझी को अंधा व अपाहिज कर भीख मंगवाने वाले राज नागर व उसकी मां को पुलिस ने मंगलवार देर शाम किदवई नगर से गिरफ्तार कर लिया। दोनों से पुलिस पूछताछ कर रही है। गिरोह बड़ा है, जिसमें सरगना आदि शामिल हैं। उन तक पुलिस अभी नहीं पहुंच सकी है। वहीं सुरेश को बेचने वाला विजय अभी भी फरार है। पुलिस की तीन टीमें उसकी तलाश में लगाई गई हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें