कानपुर में बंद हो चुकी कंपनियों के बैंक खातों में 150 करोड़ रुपये के लेनदेन के मामले में जीएसटी इंटेलिजेंस के अफसर अब संबंधित बैंकों की भूमिका की जांच करेंगे। जीएसटीआई का मानना है कि बैंकों की मिलीभगत के बगैर बंद कंपनियों के खातों में लेनदेन होना संभव नहीं है। इसके अलावा यह बात भी सामने आई है कि रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज और बैंकों के बीच भी तालमेल नहीं है।
जीएसटीआई के अफसर जांच पूरी करने के बाद इसकी रिपोर्ट अप्रत्यक्ष कर बोर्ड को भी सौंपेंगे। जीएसटीआई के सूत्र बताते हैं कि बंद हुई कंपनियों के नाम व पते हासिल कर लिए हैं। उन स्थानों पर छानबीन भी कर ली गई है। सभी कंपनियां अपने दर्ज पतों पर नहीं मिलीं। माना जा रहा है कि ये कंपनियां कभी उन पतों पर रही ही नहीं। बोगस साबित होने की वजह से उन पर रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज ने कार्रवाई की थी।
इसी वजह से ऐसी कंपनियों की अधिकृत वेबसाइट पर लाल रंग से स्ट्राइक ऑफ लिखा गया है ताकि शेयरधारक या कोई भी व्यक्ति यह जान सके कि कंपनी बंद हो चुकी है। बावजूद इसके करीब आधा दर्जन बैंकों में बंद हुई कंपनियों के खातों से लेनदेन हुआ। भारी भरकम लेनदेन होने के बाद भी बैंक के अफसर अलर्ट नहीं हुए। जीएसटीआई के अफसर जल्द ही संबंधित बैंकों के अफसरों से पूछताछ करेंगे।