फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बहू ने कराया ससुर पर फर्जी मुकदमा, यह घिनाैनी वजह अाई सामने

Sun, 22 Apr 2018 11:15 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
1 of 5
डेमाे पिक
कानपुर में एक पिता ने अपने बेटाें के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया था। यह मुकदमा माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण एवं कल्याण अधिनियम के तहत दर्ज कराया गया था। कहा गया था कि वह भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम लिमिटेड से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं।
 
 
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 5
डेमाे पिक
कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए बेटे और बहू को पिता के मकान से बेदखल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने बेटे से यह भी कहा है कि पिता को भरण-पोषण के लिए के लिए हर माह छह हजार रुपये दिया जाए। पनकी गंगागंज प्लाट नंबर 1248 महावीर नगर निवासी श्रीकिशन कुमार (65) ने अपने बेटे सुशील कुमार और बहू संगीता के खिलाफ एसडीएम सदर संजय कुमार की कोर्ट में मुकदमा दाखिल किया था।
विज्ञापन

3 of 5
डेमाे पिक
यह मुकदमा माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण एवं कल्याण अधिनियम के तहत दर्ज कराया गया था। कहा गया था कि वह भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम लिमिटेड से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। उन्हें पेंशन नहीं मिलती है। उनके दो बेटे सुशील और सुरेंद्र कुमार हैं। दाेनाे का विवाह हो चुका है। तीन पुत्रियों में दो विवाहित हैं। पुत्री दीपमाला का विवाह करना है।

4 of 5
डेमाे पिक
दीपमाला प्राइवेट नौकरी कर अपना और उनका भरण-पोषण करती है। वह बेटी के विवाह के लिए अपना मकान बेचना चाहते है। बेटा सुशील घर से बाहर नहीं निकल रहा है। उसकी पत्नी संगीता फर्जी मुकदमे में फंसाकर अपने ससुर का मकान बेचने की फिराक में थी। इस मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बच्चों का फर्ज है कि वह अक्षम वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण करें, जिससे वह सामान्य जीवन व्यतीत कर सकें। अधिनियम की धारा 22 में एसडीएम को कई अधिकार दिए गए हैं।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
डेमाे पिक
वह पुलिस को सीनियर सिटीजन की सुरक्षा के विशेष बंदोबस्त करने को कह सकता है। अगर मां या पिता की आय का कोई साधन नहीं है तो बेटे की भरण-पोषण की जिम्मेदारी होती है। किसी वरिष्ठ नागरिक को बेटा, बहू या अन्य परिजन परेशान कर रहे हैं तो वह टोल फ्री नंबर 18001800060 मिलाएं। गाइड समाज कल्याण संस्था प्रशासन और पुलिस की मदद से उनकी मदद करेगी। यह संस्था लखनऊ, कानपुर और बरेली में वृद्धजनों की मदद कर रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें