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20 तस्वीरों में देखिए, अटल बिहारी वाजपेयी जी का मनमोहक अंदाज, 'जो काल के कपाल पर अटल रहेगा'

Mon, 20 Aug 2018 09:48 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
कानपुर से जुड़ी यादें और तस्वीर- पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की ये तस्वीर उस समय की है जब वह फूलबाग में भाजपा की चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे। 

डालते हैं एक नजर महान शख्सियत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जी कुछ खास तस्वीरों पर...
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
कानपुर से जुड़ी यादें और तस्वीर- कानपुर में फूलबाग की उस रैली में अपार भीड़ भाजपा को वोट देने के इरादे से नहीं बल्कि अटल बिहारी वाजपेयी को सुनने के लिए जमा हुई थी।
 
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
कानपुर से जुड़ी यादें और तस्वीर- अटल बिहारी वाजपेयी को लेकर पार्टी के कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता में ऐसा नशा था कि हर कोई उनके पास जाना चाह रहा था।

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
कानपुर से जुड़ी यादें और तस्वीर- एक घंटे से अधिक समय तक अपने भाषण के दौरान उन्होंने कांच की गिलास में भरा हुआ पानी आधा पिया और आधा भरा हुआ गिलास डायस पर रख दिया। उसी के पास में अटल ने अपने गले से उतारी गई फूलों की माला भी रख दी थी। जैसे ही अटल बिहारी का भाषण खत्म हुआ और वह मंच से उतरकर सुरक्षा घेरे में चले गए। वहां मौजूद भीड़ अचानक मंच की तरफ भागने लगी। मंच पर रखे वाजपेयी की गले से उतारी गई माला पाने के लिए खींचतान शुरू हो गई।
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
चित्रकूट से जुड़ी यादें और तस्वीर- सन् 2003 में 27 व 28 मार्च को देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट का भ्रमण किया था। प्रभु श्रीराम की नगरी चित्रकूट में अटल बिहारी वाजपेयी ने दो दिन बिताए थे।


 
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
चित्रकूट से जुड़ी यादें और तस्वीर- इस दौरान उनकी प्रतिबद्धता और जीवटता की झलक दिखी थी। प्रधानमंत्री होने के बाद भी उन्होंने बेेहद सहजता से सबके साथ जमीन पर बैठकर भोजन किया और बच्चों के बीच बच्चे बन गए थे। शादी से लेकर खेलकूद, स्वास्थ्य और देश की सबसे बड़ी समस्या पर जब उन्होंने संवाद किया था तो पूरे हाल में सन्नाटा छा गया था। 
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
चित्रकूट से जुड़ी यादें और तस्वीर- अटल जी जब समाजसेवी पद्मश्री नानाजी देशमुख के साथ बातचीत कर रहे थे। तब उनसे रामदर्शन स्थल पर जाने की बात हुई। अटलजी के पैर में तकलीफ  होने के कारण एसपीजी ने रामदर्शन पर जाने से मना कर दिया था, क्योंकि सीढ़ियां चढ़ने और उतरने में अटलजी को समस्या थी।

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
चित्रकूट से जुड़ी यादें और तस्वीर- इतना सुनते ही नानाजी ने अटलजी से कहा कि मैं आपसे उम्र में ज्यादा हूं, फिर भी आसानी से आ और जा सकता हूं। इतना सुनते ही अटलजी मुस्कराए और कहा कि बिना रामदर्शन किए वे चित्रकूट से नहीं जाएंगे।
 

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
इटावा से जुड़ी यादें और तस्वीर- इटावा के बकेवर में  37 साल पहले 22 मार्च 1991 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जनता कालेज बकेवर आए थे। जहां पर डा. भीमराव राव आंबेडकर जन्मसती का शुभारंभ किया था। कार्यक्रम में सबसे प्रमुख बात यह थी कि अटल जी का भाषण सुनने के लिए विरोधी भी उमड़ पड़े थे। 

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
इटावा से जुड़ी यादें और तस्वीर- भाषण के दौरान अटल जी ने देश की नीतियों में बड़े बदलाव का जिक्र किया था। साथ ही युवा शक्ति को राजनीति में आगे आकर बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने की बात जोर दिया था।  जनता कालेज बकेवर के तत्कालीन प्रबंध सचिव आनंद स्वरूप मिश्र व प्राचार्य शिवसेवक तिवारी ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी हमेशा से यही चाहते थे कि देश की राजनीति में युवाओं की भागीदारी हो।

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
इटावा से जुड़ी यादें और तस्वीर- साथ ही परिवारवाद से दूरी बनाई जाए। उन्होंने हमेशा परिवारवाद का विरोध किया। उन्होंने साहित्यकारों को समाज में आगे आने की बात कही। उनका कहना था कि मंच से बातों को कहने के साथ धरातल पर भी काम करना जरूरी है। 

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फर्रुखाबाद से जुड़ी यादें और तस्वीर- फर्रुखाबाद में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जब भी आते थे। उन्हें सुनने के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता था। ऐसा ही नजारा तब नजर आया जब वह शहर के बजरिया फील्ड में 1992 में एक जनसभा को संबोधित करने आए थे। यहां पर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उनका मंच एक खराब ट्रक की बॉडी पर बनाया था। इससे उसकी ऊंचाई ज्यादा हो गई थी।

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
फर्रुखाबाद से जुड़ी यादें और तस्वीर- मंच पर चढ़ते ही पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं मंच से बोल रहा हूं या मचान से। उनके यह कहते ही खचाखच मैदान में ठहाके गूंजने लगे थे। बाद में लोगों ने स्थानीय भाजपा नेताओं की खूब खिंचाई की थी। इसके अलावा वह ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या के बाद वह उनके परिवार के कई कार्यक्रमों में शामिल होने शहर आए थे।

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फर्रुखाबाद से जुड़ी यादें और तस्वीर- अटल बिहारी वाजपेयी को जितना उनकी राजनीति के लिए जाना जाता है उतना ही कविताओं के लिए। पूर्व ऊर्जा मंत्री ब्रह्मदत्त द्विवेदी के बेटे और सदर विधायक मेजर सुनील दत्त द्विवेदी ने बताया कि पिता के कवि होने से दोनों में अच्छी जमती थी। पिताजी की मृत्यु के बाद उनके काव्य संकलन ‘जब हम न होंगे’ का संपादन व विमोचन अटल बिहारी वाजपेयी ने ही किया था।

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
फर्रुखाबाद से जुड़ी यादें और तस्वीर- पूर्व ऊर्जा मंत्री ब्रह्मदत्त द्विवेदी की मौत के बाद अटल बिहारी वाजपेयी शहर आए थे। तब उनके साथ कई नेताओं का हुजूम था। इसके बाद वह उनकी तेरहवीं संस्कार में उनके गांव अमृतपुर भी गए थे। वहां उन्होंने कहा था कि आज मेरा उत्तराधिकारी चला गया।

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
हरदोई से जुड़ी यादें और तस्वीर- देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का हरदोई जिले से गहरा नाता रहा है। वो वर्ष 1945 में संडीला में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक बनकर आए और कई वर्षों तक यहां सक्रिय रहे। कुछ समय बाद विभाग प्रचारक बनाए जाने पर हरदोई के साथ ही सीतापुर और लखीमपुर में भी सक्रिय रहे। आखिरी बार वो वर्ष 1996 में यहां आए थे।

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
हरदोई से जुड़ी यादें और तस्वीर- अटल बिहारी वाजपेयी वर्ष 1945 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक बनकर  संडीला आए थे। इस दौरान वो संडीला के दुर्गागंज इलाके में कन्हैयालाल गुप्ता (गुड़ वालों) के घर पर रुकते थे। यहां उनके घनिष्ठ सहयोगी के रूप में कन्हैयालाल गुप्ता, मुकुल बिहारी रस्तोगी, प्रताप नारायण पांडेय और प्रख्यात साहित्यकार वचनेश त्रिपाठी कार्य करते थे। संडीला के दुर्गागंज में जिस घर में अटल बिहारी वाजपेई रहते थे, वह आज भी जीर्ण शीर्ण हालत में सुरक्षित है।  

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
हरदोई से जुड़ी यादें और तस्वीर- पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जब संडीला में आरएसएस के प्रचारक के तौर पर कछौना में तीन शाखाएं शुरू की थीं। पहली शाखा जनता इंटर कालेज परिसर, दूसरी शाखा रतन सिंह बाजार के पीछे के मैदान में और तीसरी शाखा तुलसी बाग में लगती थी। 

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
हरदोई से जुड़ी यादें और तस्वीर- तब अटल जी कछौना के मुख्य चौराहे पर स्थित मंदिर परिसर में रुकते थे। यहीं संघ के विस्तार की योजना बनती थी। उनके साथ राधेश्याम प्रवासी, रतन सिंह, महादेव पासी, अशर्फीलाल भगत, रामकुमार वैद्य, काशीनाथ पांडेय, रामभरोसे सहयोगी के रूप में कार्य करते थे।  
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी
हरदोई से जुड़ी यादें और तस्वीर- प्रधानमंत्री बनने के बाद भी अटल बिहारी वाजपेयी का हरदोई के प्रति लगाव कम नहीं हुआ था। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने जनपद के दो पुराने मित्रों से मिलने की इच्छा जताई। प्रधानमंत्री कार्यालय से पत्र भेजकर उनके दोस्तों को बुलाया गया। इनमें शहर कोतवाली क्षेत्र के चौहान थोक निवासी शिवशंकर लाल गुप्ता भी शामिल थे। वह 11 सितंबर 2003 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिले थे। शिवशंकर लाल गुप्ता प्रतिष्ठित सनातन धर्म इंटर कालेज से प्रवक्ता के पद से सेवानिवृत्त हो चुके थे। वह अटल बिहारी वाजपेयी के संपर्क में 1954 में लखनऊ में हुए उपचुनाव के दौरान आए थे। तब अटल जनसंघ के मंत्री थे और लखनऊ से प्रत्याशी भी। उन दिनों शिवशंकर लाल गुप्ता लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र होने के साथ-साथ वहां लगने वाली संघ की शाखा के सक्रिय स्वयंसेवक थे। संडीला से कन्हैयालाल गुप्ता को भी प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने दिल्ली बुलाया था। कन्हैयालाल गुप्ता से उन्होंने संडीला के पुराने सहयोगियों के बारे में पूछा था।  
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