टैंक, तोप जैसे बड़े हथियारों की खासियतें जानने का बच्चों में अजीब सा जुनून था। जैसे ही बोफोर्स पर ये बच्चे सवार हुए इनका जोश किसी जांबाज सैनिक से कम नहीं नजर आ रहा था। मौका था कानपुर कैंट में आयोजित सेना प्रदर्शनी का।
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कानपुर कैंट में सेना की प्रदर्शनी
कैंट में शुक्रवार को कैवेलरी मैदान में लगी सेना की प्रदर्शनी ने बच्चों में जोश भर दिया। प्रदर्शनी में तैनात जवानों ने जवाब दे उनकी उत्सुकता शांत की। बच्चों ने चीन से चल रहे तनाव के बारे में पूछा तो जवानों ने कहा कि जब तक सेना का एक भी जवान सरहद पर है चीन हमारा कुछ नहीं कर सकता है।
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कानपुर कैंट में सेना की प्रदर्शनी
किसी को भी डरने की जरूरत नहीं है। दो दिवसीय प्रदर्शनी का शुभारंभ बिग्रेडियर विनय मोहन शर्मा ने किया। पहले दिन शहर और उन्नाव जिले के स्कूली बच्चे आए। इस मौके पर सेना के बैंड ने राष्ट्रगान और देशभक्ति की धुनें बजाकर बच्चों में जोश भरा। इसके बाद बच्चों ने प्रदर्शनी में रखे हथियारों की खूबियां जानीं। इस दौरान बच्चों ने जवानों के साथ सेल्फी भी ली।
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कानपुर कैंट में सेना की प्रदर्शनी
प्रदर्शनी में सेना के दो टैंक शामिल
1. सीएमटी -कैरियर मोटर ट्रैक्ड (सीएमटी) में 7.62 एमएम(मिलीमीटर) की मशीन गन भी लगी है। टैंक की मारक क्षमता साढ़े पांच किलोमीटर है। इससे छह से आठ राउंड प्रति मिनट गोला दागा जा सकता है। 40 से 85 डिग्री तक टैंक की नाल घूम सकती है। टैंक में छह जवान बैठ सकते हैं। सीएमटी 48 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है। इस टैंक में छोटे हथियार का असर नहीं होता है। इस कारण युद्ध में इसे आगे ही रखा जाता है। टैंक की तकनीक रूस से ली गई है।
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2. बीएमपी 11/11 के एंटी टैंक- भारतीय सेना के बेडे़ में शामिल बीएमपी 11/11 एंटी टैंक भी खूबियों से भरा है। इस टैंक की मारक क्षमता चार किलोमीटर है। इसमें एक साथ दस जवान बैठ सकते हैं। बीएमपी टैंक कंकोर मिसाइल (एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल) से लैस है। टैंक से गोला और मिसाइल एक साथ दागी जा सकती है। टैंक का बाहरी कवच बेहद मजबूत है। इसमें छोटे हथियार (स्माल वेपन) का असर नहीं होता है। यह टैंक पानी और बर्फ में चल सकता है। नाइट विजन कैमरों से लैस इस टैंक का ज्यादा उपयोग रात में किया जाता है। टैंक की टेक्नोलॉजी 1979 में रूस से ली गई थी। अब यह भारत में ही बनते हैं।
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कानपुर कैंट में सेना की प्रदर्शनी
3. एआरवी आर्म्ड रिकवरी व्हीकल- यह कोई युद्धक हथियार नहीं है। युद्ध के दौरान जब कोई टैंक खराब हो जाता है तो आर्म्ड रिकवरी व्हीकल उसे खींचकर युद्ध के मैदान से हटाता है। दुनिया का पहला एआरवी द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस्तेमाल किया गया था।
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कानपुर कैंट में सेना की प्रदर्शनी
360 डिग्री तक घूम सकती है होविटजर तोप
122 एमएम होविटजर डी 30ए एल्फा तोप देखने के लिए बच्चों की भीड़ ज्यादा रही। हवलदार संजय सिंह ने बताया कि यह तोप तेजी से 360 डिग्री तक बिना पोजीशन बदले घूम सकती है। इसकी फायरिंग रेज 1.5 किलोमीटर है। यह तोप छह से आठ राउंड प्रति मिनट फायर कर सकती है। तोप का वजन 3400 किलो है। इसे खोलकर अलग किया जा सकता है। फिर ट्रक से कहीं पर भी ले जाया जा सकता है। यह तोप 1985 में रूस से लाई गई थी। इस तोप में 22 किलोग्राम का गोला लगता था। तोप से निकला गोला जब फटता है तो 40 मीटर तक इसका असर होता है।
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कानपुर कैंट में सेना की प्रदर्शनी
बम बरसाने वाले पैराशूट
प्रदर्शनी में ओईएफ फैक्ट्री में बने इल्युमिनेटिंग पैराशूट भी रखे गए हैं। 51 एमएम और 105 एमएम के पैराशूट सेना के लिए बड़े उपयोगी हैं। इन छोटे पैराशूटों में टार्च और बम बांधकर फेंका जाता है। टार्च की मदद से सेना दुश्मनों की लोकेशन अंधेरे में जान सकती है। 105 एमएम (मिली मीटर) वाले पैराशूट से भारी बम दुश्मनों पर गिराए जाते हैं।
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कानपुर कैंट में सेना की प्रदर्शनी
जवानों के जूते भी अनोखे
प्रदर्शनी में जवानों के कई तरह के जूते दिखाए गए। इसमें एक विशेष प्रकार का जूता था। जिसे जवान जमीन में दबाए गए माइंस को निष्क्रिय करते समय पहनते थे।जूते की खासियत थी कि अगर भूल से किसी जवान का पैर माइंस में पड़ जाए तो वह फटेगा नहीं।
हम भी फौज में शामिल होंगे
वैभव ने कहा कि सेना के जवानों को देखकर मैं बहुत उत्साहित हूं। अब मैं भी देश की सेवा करने के लिए फौजी बनूंगा। मुझे सेना पर गर्व है। रिषेंद्र सिंह ने कहा कि मैंने पहली बार टैंक को देखा है। मैंने सेल्फी भी ली है। अब मैं भी फौजी बनकर देश की सेवा करूंगा। शाश्वत दीक्षित ने कहा कि देश के जवानों को हम लोगों का सलाम। हमारे फौजी ही असली हीरो हैं। उनसे बात करके बहुत अच्छा लगा। आयुष पटेल ने कहा कि इतने करीब से सेना के जवानों और हथियारों को देखा। अब मुझे यकीन हो गया है कि हमारे देश को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता है। हम तरह से सक्षम है।