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एंबुलेंस की हड़ताल से हलकान हुए मरीज, तड़पकर निकली एक की जान, कोई गोद में तो कोई रिक्शे पर लेकर भागा

Mon, 23 Sep 2019 11:07 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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एंबुलेंस ने मिलने पर गोद में ले जाता पिता - फोटो : अमर उजाला
एंबुलेंस की प्रदेश व्यापी बेमियादी हड़ताल ने सोमवार को एक मरीज की जान ले ली। परिजन उसे ई-रिक्शा से हैलट लेकर पहुंचे, तबतक देर हो चुकी थी। सैकड़ों अन्य मरीजों को तीमारदार निजी एंबुलेंस, रिक्शा, ई-रिक्शा सहित अन्य वाहनों से अस्पताल ले जाने के लिए मजबूर रहे। निजी एंबुलेंस चालकों ने मनमाना भाड़ा वसूला। स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस मरीजों को लाने-ले जाने में नाकाफी साबित हुईं।

 
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एंबुलेंस की हड़ताल से मरीजों की जान पर बन आई - फोटो : अमर उजाला
शोषण बंद करते हुए समान कार्य के समान वेतन सहित चार सूत्री मांगें और यूनियन अध्यक्ष को हिरासत में लिए जाने के विरोध में नगर की 108 एंबुलेंस, 102 एंबुलेंस और एएलएस एंबुलेंस के चालकों ने सुबह 80 गाड़ियां कांशीराम अस्पताल परिसर में खड़ी की दी। वहां दिनभर नारेबाजी, प्रदर्शन करते हुए तुरंत मांगें पूरी करने की मांग करते रहे। इसका खामियाजा नगर के सैकड़ों मरीजों को भुगतना पड़ा।

 
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एंबुलेंस नहीं मिली तो ऐसे ले जाना पड़ा मरीज - फोटो : अमर उजाला
रूरा (कानपुर देहात) निवासी धनीराम (70) को बीमारी की वजह से परिजन रविवार को हैलट लाए, पर ओपीडी बंद होने की वजह से डॉक्टरों ने उन्हें सोमवार को आने के लिए कहा। गांव दूर होने की वजह से परिजन उन्हें प्रेम नगर में रिश्तेदार के घर ले गए। वहां से उन्हें पुन: हैलट लाने के लिए सुबह से 108 एंबुलेंस के लिए फोन करते रहे, पर वहां से कुछ घंटों में हड़ताल समाप्त होने का हवाला देकर एंबुलेंस भेजने का आश्वासन दिया जाता रहा।

 

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कोई रिक्शे से तो कोई गोद में लेकर भागा - फोटो : अमर उजाला
दोपहर तक एंबुलेंस नहीं मिली। इस बीच धनीराम की हालत बिगड़ने लगी तो परिजन उन्हें ई-रिक्शे से हैलट इमरजेंसी ले गए, वहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। अन्य तीमारदार अपने मरीजों को निजी वाहनों से अस्पताल ले गए। हैलट, उर्सला, डफरिन, केपीएम, कांशीराम सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में रोज की तुलना में कम मरीज भर्ती हुए।

 
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एंबुलेंस की हड़ताल से हलकान हुए मरीज - फोटो : अमर उजाला
सरकारी एंबुलेंस भी काम न आईं
सीएमओ डॉ. अशोक शुक्ला ने जिला अस्पताल उर्सला, डफरिन, कांशीराम और कल्याणपुर सीएचसी व सरसौल सीएचसी की एक-एक एंबुलेंस को सक्रिय करने का दावा किया था, पर डफरिन से जानकारी करने पर पता चला कि वहां कोई सरकारी एंबुलेंस नहीं है। उर्सला ने मरीजों को एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई। अन्य सरकारी एंबुलेंस भी मरीजों के काम नहीं आईं।

 
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एंबुलेंस की हड़ताल के बाद मरीजों का हुआ बुरा हाल - फोटो : अमर उजाला
जच्चा-बच्चा एंबुलेंस का करती रहीं घंटों इंतजार
अपर इंडिया जच्चा-बच्चा अस्पताल और जिला महिला चिकित्सालय डफरिन में प्रसूताओं को ले जाने और डिलीवरी के बाद अस्पताल से छुट्टी होने पर 102 एंबुलेंस से घर पहुंचाया जाता है। सोमवार को यह सुविधा बंद होने के  कारण इन अस्पतालों के अलावा उर्सला सहित अन्य अस्पतालों में ये नि:शुल्क एंबुलेंस सेवाएं मरीजों को उपलब्ध कराने के लिए काउंटर भी नहीं लगे। डफरिन अस्पताल में रोज 80-90 महिलाएं भर्ती होती थीं, पर सोमवार को मात्र 48 महिलाएं भर्ती हुईं। पहले से भर्ती 38 मरीजों की छुट्टी भी हुई। सभी घंटों इंतजार के बाद निजी वाहनों से घर पहुंचीं। कमोबेश यही दिक्कत अपर इंडिया जच्चा-बच्चा अस्पताल में रही।
 
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