इस बार अक्षय तृतीया आयुषमान योग व उच्च के चंद्रमा में 18 अप्रैल को पड़ रही है। शहर में जगह-जगह आयोजन होंगे। अक्षय तृतीया सर्वसिद्ध मुहूर्त होता है यानी इस दिन बिना आचार्य और पुरोहित से पूछे हुए कोई भी मांगलिक कार्यक्रम किया जा सकता है।
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इस दिन सोने और चांदी की खरीद शुभ मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन खरीदी गई वस्तु कभी घटती नहीं, अर्थात दिनों दिन उसकी बढ़ोत्तरी होती रहती है। महामहोपाध्याय डा. आदित्य पांडेय ने बताया कि बैसाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आखा तीज अथवा अक्षय तृतीय कहते हैं।
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ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। शिव पुराण के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने कुबेर को धन संपदा का स्वामी नियुक्त किया था। देवी भगवत पुराण के अनुसार इस दिन मां पार्वती ने देवी अन्नपूर्णा के रूप में अवतार लिया था तथा भगवान शिव ने उनसे दीक्षा रूप में उनसे दान प्राप्त किया था।
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महाभारत काल से ऐसी मान्यता है कि इसी दिन श्रीकृष्ण ने पांडवों को अक्षय पात्र भेंट किया था जिससे आवश्यकता अनुसार भोजन उत्पन्न हो जाता था। ऐसी मान्यता है कि इस दिन पृथ्वी पर मां गंगा का अवतरण भी हुआ था तथा ऋषि वेद व्यास ने गणेशजी के साथ महाभारत का लेखन किया था।
इस दिन सामान्यत: सोने अथवा मूल्यवान वस्तु के क्रय-विक्रय से लाभ होता है। पीतल के कलश में पीली सरसों, तीन पीले पुष्प, तीन पीली कौड़ी, हल्दी की तीन गांठ, पीले वस्त्र से ढक कर पूजा के स्थान पर रखने से अथवा घर के उत्तर दिशा में रखने से मनवांछित फल की प्राप्ति होती है।