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नोट बंदी पर भाजपा छोड़ सभी की जुबां पर शिकवा-शिकायतें

Sun, 27 Nov 2016 05:37 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
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डेमो
नोट बंदी ने नेताओं की भी नींद उड़ा दी है। करेंसी का करंट इन्हें भी लगा है। आमतौर पर आम लोगों को लाइन में लगवाने वाले नेताओं को खुद लाइन में लगकर घर और जेब खर्च का जुगाड़ करना पड़ रहा है। चार प्रमुख दल भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस की कमान संभाले जिलाध्यक्षोें पर क्या बीत रही है? खुद उन्होंने बयां की है। कोई पिता के पैर का इलाज नहीं करा पा रहा तो कोई बेटी की शादी के लिए परेशान है। 
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बेटी की शादी में नोटों का रोड़ा

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सपा नेता शमीम बांदवी - फोटो : अमर उजाला
सपा जिलाध्यक्ष शमीम बांदवी बताते हैं नोटों की बंदी से नाक में दम हो गया है। अगले माह बेटी की शादी है। खरीदारी में बेहद दिक्कतें आ रही हैं। बेटे को बैंक की लाइन में लगाकर बमुश्किल 4000 रुपये निकाले तो उसमें भी 50 का एक नोट कम निकला। लोगों से उधारी करनी पड़ रही है। पार्टी कार्यालय के चपरासी को उसका मानदेय नहीं दे पा रहे। बैंक प्रबंधक को फोन किया तो उसने करेंसी की कमी का रोना रो दिया। पिछले एक पखवारे से घर के रोजमर्रा खर्च में बड़ी कटौती करनी पड़ी है। 


 
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पार्टी का दौरा चल रहा है, बच्चे की फीस रुकी

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बसपा नेता प्रदीप वर्मा - फोटो : अमर उजाला
बसपा जिलाध्यक्ष प्रदीप वर्मा का कहना है कि बेटे की चार माह की 4000 हजार रुपये फीस देनी है। मगर नहीं दे पा रहे। पेट्रोल पंपों पर बड़े नोट लिए जाने से फिलहाल पार्टी कार्यों के भ्रमण तो चल रहे हैं, लेकिन जेब खर्च रुका है। घरेलू खर्च को सोच समझकर किया जा रहा है। नोट बंदी की घोषणा के पहले एटीएम से 5000 रुपये निकाले थे। इसमें 100 के मात्र 10 नोट थे। उनमें मात्र एक नोट बचा है। रोजमर्रा का घरेलू खर्च 25-50 रुपये में सिमट कर रह गया है। इन परेशानियों के बाद भी कोई राहत नहीं दिख रही है। 

पिता के पैर के इलाज के लिए लिया कर्ज

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कांग्रेस नेता अखिलेश कुमार शुक्ल - फोटो : अमर उजाला
कांग्रेस जिलाध्यक्ष अखिलेश कुमार शुक्ल नोट बंदी पर आप बीती बताते हैं कि पिता के पैर में इसी माह फ्रैक्चर हो गया है। इलाज के लिए उन्हें कानपुर ले जाना था। इसके लिए खुद बैंक के बाहर लाइन में खड़े होकर कुछ रुपये एक्सचेंज किए। कुछ पैसा लोगों से कर्ज भी लिया है। इसके साथ ही कई खर्चों पर कटौती या पूरी तरह लगाम लगानी पड़ी है। इसके साथ ही पार्टी के कार्यक्रमों में भी कमी करनी पड़ी है। पहले में घर और जेब खर्च लगभग 500 रुपये का होता था। अब 50 रुपये खर्च करना भी मुश्किल हो रहा है। 
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भाजपा अध्यक्ष का कोई खास खर्च नहीं

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भाजपा नेता इंद्रपाल सिंह पटेल - फोटो : अमर उजाला
भाजपा जिलाध्यक्ष इंद्रपाल सिंह पटेल भी नोट बंदी से पैदा हुई परेशानियों से अछूते नहीं हैं। लेकिन उनकी जुबां पर कोई शिकवा-शिकायत नहीं है। वह बताते हैं कि वह आम आदमी की तरह ही हैं। उनका कोई खास खर्च नहीं है। पेट्रोल पंप पर बड़े नोट चलने से फिलहाल गाड़ी में तेल की व्यवस्था हो जा रही है। बैंक से 4000 रुपये एक्सचेंज में ले लिए थे उससे घर का खर्च चल रहा है। जेब में 25-50 रुपये पड़े रहते हैं। उनके लिए यह काफी हैं। प्रधानमंत्री ने देश के लिए ही इतना बड़ा फैसला लिया है। 
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