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दलित आंदोलनः BSP की राजनीति फिर से निकल पड़ी, BJP में जाने वाले बसपाइयों का कुछ यूं बदला रुख

Wed, 04 Apr 2018 01:34 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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भाजपा की लाइन में थे, बसपा की बैठक में पहुंचे
एससी/एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में दलितों के एकजुट प्रदर्शन का राजनीतिक असर भी देखने को मिला है। कानपुर में एक दिन पहले तक जो बसपाई भाजपा में शामिल होने की जुगत में लगे थे, वे मंगलवार को बसपा की बैठकों में शामिल हुए। कुछ ने तो आगामी लोकसभा चुनाव में अपना निर्वाचन क्षेत्र भी बसपा के टिकट के जरिये ही तलाशना शुरू कर दिया। कहा जा रहा है कि इस विरोध से बसपा की राजनीति फिर से निकल पड़ी है।
 
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दलितों के विरोध प्रदर्शन के बाद भाजपा में जाने का मन बना रहे नेताओं का बदला रुख
पिछले करीब दो साल में पूरे मंडल से 100 से अधिक बसपा नेता और इससे कहीं ज्यादा समर्थकों ने बसपा से किनारा कर लिया था। इसमें कुछ तो दूसरी पार्टियों में चले गए तो कुछ दूसरी पार्टियों की तलाश में थे। अब अचानक से उनका हृदय परिवर्तन होता दिख रहा है।
 
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कहा जा रहा है कि इस विरोध से बसपा की राजनीति फिर से निकल पड़ी है
बसपा के एक नेता जो सपा नेत्री डिंपल यादव के गढ़ वाले क्षेत्र से एक बार लोकसभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं, वे पिछले छह महीने से भाजपा में शामिल होने की जुगत में लगे थे। बताया जा रहा है कि उनका नाम ऊपर तक चल भी रहा था।
 
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100 से अधिक बसपा नेता और इससे कहीं ज्यादा समर्थकों ने बसपा से किनारा कर लिया था
मंगलवार को कानपुर में अचानक वे बसपा की बैठक में दिखे तो बसपाई भी चौंक गए। हालांकि किसी ने कोई टिप्पणी नहीं की। अंदर ही अंदर उन्हें देखकर दूसरे नेता मुस्कुराते जरूर रहे। पता चला है कि ऐसे नेता जो कुछ समय पहले बसपा से हट गए थे, वे जल्द ही लखनऊ पहुंचकर पार्टी हाईकमान से मिलेंगे।
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