उन्नाव जिले की बांगरमऊ विधानसभा सीट से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने सियासी सफर की शुरुआत ग्राम पंचायत के चुनाव से की। कुलदीप सिंह सेंगर का गांव जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायतों में शुमार होता है। इसी से गांव को ब्लाक का दर्जा देने की मंजूरी मिल चुकी है। एक बार प्रधान रहे कुलदीप ने युवा कांग्रेस से सक्रिय राजनीति में कदम रखा।
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कुलदीप सिंह सेंगर
कुलदीप सिंह के पिता मुलायम सिंह मूल रूप से फतेहपुर जिले की बिंदकी तहसील क्षेत्र के रहने वाले थे। नाना वीरेंद्र सिंह के कोई बेटा नहीं था। केवल दो बेटियां चुन्नी देवी और सरोजनी देवी हैं। चुन्नी देवी शादी के बाद परिवार के साथ पिता के यहां रहने लगीं। चार भाइयों में कुलदीप सबसे बड़े, मनोज दूसरे नंबर के और अतुल तीसरे नंबर के हैं।
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कुलदीप सिंह सेंगर
सबसे छोटे भाई विपुल सिंह की करीब दस साल पहले बीमारी से मौत हो चुकी है। सभी का यहीं जन्म हुआ। कुलदीप सिंह एक बार ग्राम प्रधान रहे। इसके बाद दो पंचवर्षीय में माता चुन्नी देवी प्रधान बनीं। मौजूदा समय में अतुल सिंह की पत्नी अर्चना सिंह ग्राम प्रधान हैं।
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कुलदीप सिंह सेंगर
वर्ष 2002 में कुलदीप बसपा की टिकट पर सदर सीट से विधायक चुने गए। 2007 में उन्होंने सपा का दामन थामा। इस चुनाव में वह बांगरमऊ से विधायक चुने गए। 2012 में वह भगवंतनगर से विधायक निर्वाचित हुए।
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कुलदीप सिंह सेंगर
2016 में सपा में रहते हुए पार्टी से बगावत कर पत्नी संगीता सेंगर को जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ाया। संगीता सेंगर जिला पंचायत अध्यक्ष हैं। विधानसभा चुनाव से पहले कुलदीप सिंह ने भाजपा का दामन थाम लिया।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा की टिकट पर बांगरमऊ से लगातार चौथी बार जीत हासिल की। संगीता सेंगर लगातार दूसरी बार जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुईं। इससे पहले छोटे भाई मनोज सिंह 2005 से 2010 तक मियागंज ब्लाक के प्रमुख रहे।