कोरोना वायरस से बचने के लिए देशहित में किए गए लॉकडाउन से बेबसी और मजबूरी की ऐसी कहानी निकली कि उम्मीदों पर शुरू हुए सफर पर मौत ने कफन ओढ़ा दिया। गाजियाबाद में सागर मध्य प्रदेश और झांसी के रहने वाले 22 प्रवासी मजदूरों ने लॉकडाउन में सब कामधंधा बंद हो जाने के बाद शुक्रवार को वापस घर लौटने का फैसला लिया।
Trending Videos
विज्ञापन
2 of 5
ट्राला हटाने और शव निकालने के लिए लगी जेसीबी मशीन और क्रेन
- फोटो : amar ujala
इसके लिए उन्होंने गाजियाबाद से 30 हजार रुपये में एक डीसीएम बुक किया और निकल पड़े अपने घर की ओर, पर नियति को कुछ और ही मंजूर था। शनिवार तड़के राजस्थान से चूना लादकर पश्चिम बंगाल जा रहे ट्राला में ढाबे में चाय-पानी के लिए रुकने के दौरान टक्कर मार दी और यह हादसा हो गया। ट्रॉला में झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और यूपी के तकरीबन 70 लोग सवार थे।
विज्ञापन
3 of 5
अधिकारियों को आंखों देखी बताता प्रवासी श्रमिक
- फोटो : amar ujala
यह सभी हादसे में चूने की बोरियों के नीचे दब गए नतीजन 24 को जान से हाथ धोना पड़ गया। शनिवार को भोर चिरूहुली के पास मिहोली शिवजी ढाबे पर हुए हादसे का बंया करते हुए प्रवासियों की रुह कांप गई। अचानक से धमाका हुआ और चीख-पुकार का मंजर आम हो गया। डीसीएम सवार गोविंदा ने बताया कि डीसीएम में कुल 22 लोग सवार थे। जिसमें चार लोगों को झांसी तक जाना था।
4 of 5
दबे हुए शवों को निकालते पुलिस कर्मी
- फोटो : amar ujala
जबकि उसके साथ मौजूद 18 लोगों ने 30 हजार रुपये में गाजियाबाद से सागर मध्य प्रदेश के लिए डीसीएम बुक कराया था। उम्मीद थी कि सफर आसानी से कट जाएगा और घर सुरक्षित पहुंच जाएंगे। वह सभी जींस में कलर करने का काम करते थे। लॉकडाउन में फैक्ट्री बंद हो गई तो लौटना मजबूरी बन गया। इधर ट्राला में सवार घायल अंकुर ने बताया कि ट्राला राजस्थान से पश्चिम बंगाल जा रहा था।
पुलिस कर्मी और इलाकाई लोगोंं ने निकाले थे शव
- फोटो : amar ujala
ट्राला में पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, यूपी कुशीनगर जाने के लिए लोग सवार थे। रास्ते में कई स्थानों से उस पर सवार हुए थे। बताया कि ट्राला में सवार लोगों से उनके सफर के हिसाब से चालक व हेल्पर रुपये ले रहा था। किसी से 500 तो कोई 800 रुपये लिए थे। लॉकडाउन में सभी की रोजी रोटी छिन गई तो पेट भरने की चाह में निकले थे पर रास्ते में ये अंजाम होगा किसी ने सोचा तक नहीं था।