इत्रनगरी कन्नौज में शुक्रवार को भक्तों पर भोले की आस्था सिर चढ़कर बोली। हर तरफ बम-बम भोले, हर-हर महादेव के जयकारों की गूंज रही। शुक्रवार को पड़ोसी जनपद हरदोई स्थित बाबा मंशानाथ मंदिर से करीब 50 हजार कांवड़िया इत्रनगरी पहुंचे। गंगा के महादेवी घाट पर स्नान किया।
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केसरिया रंग में रंगा हुआ नजर आया कन्नौज
- फोटो : अमर उजाला
गंगा जल लेकर कांवड़ियों ने सिद्धपीठ बाबा गौरीशंकर मंदिर जाकर भोलेनाथ का जलाभिषेक किया। शहर का बोर्डिंग मैदान शुक्रवार को केसरिया रंग में रंगा दिखा। भोलेनाथ के जयकारों की गूंज से इत्रनगरी का वातावरण शिवमय हो गया।
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कांवड़ियों के लिए पूरे दिन चले भंडारे
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हजारों की संख्या में दूर दराज के जनपदों से आए कांवड़ियों के स्वागत और जलपान के लिए नगर के समाजसेवियों और धार्मिक संगठनों ने प्रमुख मार्ग पर मिष्ठान और जलपान वितरित करने के लिए स्टाल लगाए थे।
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पुलिस भी कांवड़ यात्रा के दौरान रही मौजूद
- फोटो : अमर उजाला
शहर में प्रवेश करते ही हरदोई से हजारों की संख्या में आए कांवड़ियों का कन्नौज की बाबा गौरीशंकर कांवड़िया सेवा समिति के पदाधिकारियों ने बोर्डिंग मैदान में स्वागत किया। मंच पर खड़े समिति के पदाधिकारी जयकारे लगा रहे थे। मंच के सामने हजारों की तादाद में खड़े कांवड़ियों ने भी भागीदारी की।
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50 हजार से भी अधिक श्रद्धालु पहुंचे कन्नौज
- फोटो : अमर उजाला
कई कांवड़िया राष्ट्रध्वज लहरा रहे थे। तिरंगे के रंग में रंगी इंडिया गेट की झांकी ने आकर्षित किया। वहीं मेहंदीघाट से लेकर बाबा गौरीशंकर मार्ग तक पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। एसपी, एएसपी व सदर सीओ और सदर एसडीएम से लेकर अन्य अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते रहे। गंगाघाट से मंदिर मार्ग तक कई जगह पुलिस तैनात रही।
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कांवड़ियों ने गंगा घाट पर लहराया तिरंगा
- फोटो : अमर उजाला
पड़ोसी जनपद हरदोई के अलावा भी कई जनपदों से कांवड़िया इत्रनगरी पहुंचे। महादेवी घाट पर स्नान, पूजन किया। इसके बाद बाबा गौरीशंकर के दर्शन करने पहुंचे। कांवड़ियों ने जलाभिषेक कर बाबा से मनोकामना पूर्ति की मांग की। दूध, गंगाजल, शहद, दही के साथ ही भांग और गांजे की पत्तियां भी अर्पित कीं।
कांवड़ यात्रा के दौरान तिरंगे की झांकी
- फोटो : अमर उजाला
गंगाघाट पर जलपात्र (कट्टिया) की खूब बिक्री हुई। घाट पर जलपात्रों की करीब एक दर्जन से अधिक दुकानें लगी थीं। दुकानदारों ने बताया कि सबसे अधिक 10 और 20 रुपये वाले जलपात्रों की बिक्री हुई। कांवरियों ने जलपात्र खरीद कर गंगा जल भरा। घाट पर दुकानदारों ने भगवा वस्त्रों की भी दुकानें सजा ली थीं।