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पाक जेल से रिहा हुए 15 मछुआरों ने बताई हर बात, पुलवामा हमले का जिक्र और गुजरात सरकार के बारे में भी

Thu, 18 Apr 2019 12:56 PM IST
प्रशांत कुमार बलराम सिंह सेंगर, अमर उजाला, बांदा
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मां के पैर छूते मछुआरे - फोटो : अमर उजाला
तेज हवा के साथ बहाव में नाव पाक सरहद पर पहुंच जाने की सजा बांदा जिले के 15 मछुआरों को साढ़े 17 महीने पाकिस्तान की जेल में काटनी पड़ी। अनजाने और गैर इरादतन हुए इस गुनाह का खामियाजा भुगतने के बाद ये मछुआरे बुधवार को अपने पैतृक गांव जसईपुर लौटे तो समूचे गांव में जश्न-सा माहौल हो गया। इनके माता-पिता और परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। इनकी रिहाई की मनौती पूरी होने पर गांव के मंदिर में पूजा-अर्चना हुई।
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मां के पैर छूते मछुआरे - फोटो : अमर उजाला
यूपी के बांदा जिले में तिंदवारी थाना क्षेत्र के जसईपुर और आसपास के गांवों के मछुआरे हर साल ठेके पर मछली का शिकार करने गुजरात जाते हैं। नौ नवंबर वर्ष 2017 को गुजरात के पोरबंदर बंदरगाह के पास समुद्र में यहां के मछुआरों की नाव मछली का शिकार करते समय तेज हवा के झोंके में बेकाबू होकर पाकिस्तान की समुद्री सीमा में दाखिल हो गई। इस पर पाक सेना ने इन्हें घेराबंदी कर दबोच लिया और अपनी नाव में डालकर ले गए। मछुआरों के मुताबिक उनकी पिटाई भी की गई। बाद में सभी को कराची के लांडी जेल में रखा गया।
 
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मां के पैर छूते मछुआरे - फोटो : अमर उजाला
पाक जेल से रिहा होकर आए मछुआरों ने बताया कि समुद्र से कराची जेल ले जाते समय पाक सैनिकों ने रास्ते में उनकी पिटाई की, लेकिन जेल में पहुंचने के बाद उनके साथ कोई जुल्म नहीं हुआ। पाक सैनिकों ने उनसे यह सवाल जरूर किया था कि वे जासूसी करने तो नहीं आए? किसने भेजा है? कितने पैसे मिले हैं? आदि। पर उन लोगों ने जब सच्चाई बताई तो पाक सैनिक चले गए।

 

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मंदिर में पूजन करते मछुआरे - फोटो : अमर उजाला
मछुआरों ने बताया कि पाक में भारत के उच्चायुक्त ने भी उनसे आकर मुलाकात की थी और हमदर्दी जताई थी। मछुआरों ने बताया कि जेल में उन्हें एक बड़े हॉल में रखा गया था। जिसकी क्षमता 140 कैदियों की थी। बाद में धीरे-धीरे उन्हें काफी सहूलियतें दी गईं। बकौल मछुवारे वह सभी लोग मिलकर खुद दाल-सब्जी बना लेते थे। रोटियां जेल की मेस से ले लेते थे। कभी-कभी मेस में ही जाकर खाना खाते थे। एक महीने बाद उन्हें जेल में कहीं भी घूमने की छूट मिल गई थी। 

 
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मंदिर में पूजन करते मछुआरे - फोटो : अमर उजाला
मछुआरों ने बताया कि पुलवामा आतंकी हमले से पहले जेल में पूरी आजादी थी। उन्होंने बताया कि आतंकी हमले की जानकारी जेल में लगे टीवी से मिली। इस घटना के बाद जेल में कई तरह की पाबंदियां लगा दी गई थीं। उन्होंने कहा कि गुजरात सरकार पकड़े गए मछुआरों को हर महीने पांच हजार रुपये देती है। यह पैसा तबतक मिलता है जब मछुआरे जेल में रहते हैं।

 
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मछुआरों के परिजन - फोटो : अमर उजाला
भारत-पाक के बीच सरहद और सियासत को लेकर भले ही विवाद हो, पर कराची के लांडी जेल में ऐसा कुछ नहीं दिखा। रिहा हुए मछुआरों ने बताया कि लांडी जेल में काली माता और शिव जी का मंदिर था। वह लोग वहां रोजाना सुबह-शाम पूजा करते थे। जेल में होली और दीपावली का त्योहार भी धूमधाम से और मिल-जुलकर मनाया जाता है। होली में डेढ़ से दो हजार बंदी एक साथ होली मनाते थे। जेल अधीक्षक औरंगजेब से इसकी अनुमति मिलती थी। बाहर से लकड़ी मंगाकर होलिका दहन किया जाता था। इसमें भारतीय और पाकिस्तानी हिंदू-मुस्लिम बंदी बराबरी से शामिल होते थे। अगले दिन रंग-गुलाल होता था। मेस में पकवान बनता था। खूब मौज-मस्ती होती थी।

 
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