कानपुर स्थित काकादेव कोचिंग मंडी में रहकर पढ़ाई करने वाले छात्रों को घर भेजने के लिए बसों का इंतजाम किया गया। घर जाने की खुशी में छात्र छात्राओं की आंखों में आंसू छलक आए। बाेले हॉस्टल में एक टाइम खाने को मिल रहा था। ये बुरा दौर कैसे गुजारा है, सिर्फ हम जानते हैं। लॉकडाउन खुलने के बाद अब कोचिंग पढ़ने नहीं आएंगे, जुलाई में परीक्षा है, सीधे परीक्षा देने आएंगे।
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कोचिंग मंडी जाती छात्रा
- फोटो : amar ujala
गैर जनपदों के 1200 छात्र सोमवार को 40 रोडवेज बसों से अपने घर की ओर रवाना हुए। ये सभी काकादेव में मेडिकल और इंजीनियरिंग की कोचिंग कर रहे थे। जिला प्रशासन ने काकादेव कोचिंग मंडी से तैयार किए गए आंकड़ों, जनसुनवाई पोर्टल और सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी कर छात्र-छात्राओं की लिस्ट तैयार की थी।
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बस में बैठने की लगी होड़
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सोमवार को सभी को सेंट्रल पार्क, शास्त्री नगर बुलाया गया था। मेडिकल टीम ने सभी की थर्मल स्कैनिंग की। फिर उन्हें मास्क और सैनिटाइजर दिया गया। एसीएम छह अभिषेक सिंह ने बताया कि यहां जनपद वार आठ काउंटर बनाए गए। इन्हीं काउंटरों पर छात्रों को उनके जिले जाने वाली बस का नंबर मिल गया था। सभी को लंच पैकेट और पानी की बोतलें भी दी गईं।
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सभी की थर्मल स्कैनिंग की गई
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सोशल डिस्टेंसिंग धड़ाम
सेंट्रल पार्क में चार थानों की फोर्स और सिविल डिफेंस के वालंटियर मौजूद थे पर बस में चढ़ने के दौरान और काउंटर लाइन पर सोशल डिस्टेंसिंग धड़ाम रही। बस में बैठाने के दौरान भी सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल नहीं रखा गया। सभी सीटें फुल रहीं।
घर ले जाने के लिए तैयार खड़ी बसें
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बसों को नहीं किया गया सैनिटाइज
बसों के चालकों और परिचालकों ने बताया कि बसों को सैनिटाइज नहीं किया गया है। चालक और परिचालक स्वयं ही बस को धोकर ले आए। मास्क और सैनिटाइजर भी सभी को नहीं मिले।