फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pulwama Terror Attack: शहीद जौनपुर के जवान ने वीडियो कॉल पर पत्नी से की थी बात, चार दिन बाद छुट्टी में आना था घर

Wed, 12 Aug 2020 07:53 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जौनपुर
विज्ञापन
1 of 6
जिलाजीत यादव। - फोटो : अमर उजाला
जम्मू-कश्मीर के पुलावामा में हुए आतंकी हमले में शहीद जवान जिलाजीत यादव ने मंगलवार की रात 10 बजे पत्नी पूनम से वीडियो कॉल पर बात की थी। वादा किया था कि चार दिनों बाद वह छुट्टी लेकर घर आएंगे। बेटे के लिए काजू-मेवा और खिलौने लाएंगे। पत्नी को तीज की साड़ी, सुहाग के अन्य सामान दिलाएंगे।

मन में सुनहरे ख्वाब लेकर पूनम ने नींद की चादर ओढ़ी, लेकिन सुबह की पहली किरण के साथ आई मनहूस खबर ने सारे सपने बिखेर दिए। मासूम बेटे को गोद में लेकर बिलख रही पत्नी को जैसे सुध-बुध नहीं थी। वह बार-बार भगवान से पूछ रही थी कि आखिर किस किए की यह सजा मिली है।

जिलाजीत का विवाह वर्ष 2016 में वाराणसी के बड़ागांव क्षेत्र के इंदलपुर रसूलपुर गांव निवासी पूनम यादव से हुआ था। इसी वर्ष फरवरी में उनके घर में किलकारी गूंजी। खुशी से लबरेज जिलाजीत महज छह दिन मासूम बेटे के साथ बिताने के बाद अपना फर्ज निभाने रवाना हो गए थे। इसके बाद वह बेटे की झलक देखने के लिए अक्सर वीडियो कॉल पर ही पत्नी से बात करते थे।
 
विज्ञापन

2 of 6
पुलावामा आतंकी हमला - फोटो : अमर उजाला
मंगलवार की रात भी 10 बजे उन्होंने पत्नी को कॉल किया था। बेटे को दुलारते हुए कहा था कि इस बार छुट्टी पर आएंगे तो उसके लिए काजू, मेवा और बाजार से खिलौने भी लाएंगे। पत्नी से वादा किया था कि घर आने के बाद वह बाजार ले जाकर तीज की खरीदारी कराएंगे। पूनम बेटे के जन्म के लिए जनवरी में ही मायके चली गई थी।

पति के छुट्टी पर आने के बाद विदाई होनी थी। रात को सोते वक्त उसके चेहरे पर अथाह खुशियां थी, लेकिन नींद खुली तो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। अखंड सुहाग की कामना के साथ जिस पति के लिए वह तीज व्रत करने की तैयारी में थी, वह मां भारती की सेवा में शहीद हो गया था। शहादत की खबर पाकर वह अपने भाई के साथ ससुराल पहुंची। रोते-बिलखते पत्नी का बुरा हाल था।
 
विज्ञापन

3 of 6
पुलावामा आतंकी हमला - फोटो : अमर उजाला
उसकी हालत देख लोग ढांढ़स बंधाने का साहस भी नहीं जुटा पा रहे थे। पूनम के भाई विशाल ने बताया कि जीजा ने उसे अपनी बाइक बनवाने को कहा था, जिससे छुट्टी पर आने के बाद वह स्थानीय काम निपटा सके। घर की मरम्मत का काम पूरा कराना था। इसके अलावा एक वर्ष पूर्व गांव के बाहर ली गई जमीन पर नया मकान निर्माण शुरू कराने की भी योजना थी।

मां-बहन की आंखों से नहीं थम रहे आंसू

इजरी गांव निवासी स्व. कांता यादव की तीन संतानों में जिलाजीत एकलौते पुत्र थे। डेढ़ वर्ष पूर्व पिता के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी जिलाजीत के ही कंधों पर थी। उनकी मौत से पूरा परिवार बिखर गया है। मां उर्मिला देवी और बहन रेनू व संजू की आंखों के आंसू नहीं थम रहे।

अभी हाल ही में रक्षाबंधन पर दोनों बहनों ने भाई की कलाई के लिए सीमा पर राखियां भेजी थीं। भाई ने वादा किया था कि घर लौटने के बाद बहनों को रक्षाबंधन का तोहफा देंगे। बहनों को भी बेसब्री से भाई से मिलने वाले तोहफे का इंतजार था। मां उर्मिला देवी ने कहा कि बेटे की शहादत पर फख्र है।

4 of 6
पुलावामा आतंकी हमला - फोटो : अमर उजाला

आनन-फानन में बनने लगा रास्ता

गांव के मुख्य मार्ग से शहीद के घर तक जाने का रास्ता काफी संकरा और कच्चा है। बुधवार की दोपहर में गांव पहुंचे एसडीएम नितिश कुमार सिंह ने ग्राम प्रधान को तत्काल घर तक सड़क बनवाने का निर्देश दिया। इसके कुछ ही देर बाद आनन-फानन में सड़क का निर्माण भी शुरू हो गया है। एसडीएम ने हिदायत दी सुबह तक हर हाल में सड़क बन जानी चाहिए, जिससे घर तक पहुंचने में किसी को दिक्कत न हो।

बोलेे ग्रामीण: शहादत पर फख्र, गौरवान्वित हुई माटी

आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद जिलाजीत यादव के गांव में एक तरफ लोगों अपने लाड़ले के बिछड़ने का गम था तो उनकी शहादत पर फख्र भी। ग्रामीणों का कहना था कि मातृभूमि की सेवा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देकर जिलाजीत ने पूरी माटी को धन्य कर दिया है। पड़ोसी व बहादुरपुर के प्रधान शिवसंत यादव ने कहा कि गांव के लाल के जाने का गम तो उससे ज्यादा यह गर्व भी है कि उसने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण दिए। वह सदा के लिए अमर हो गए।
 
विज्ञापन

5 of 6
पुलावामा आतंकी हमला - फोटो : अमर उजाला
जिलाजीत के दोस्त व सहपाठी रवि यादव ने कहा कि जिलाजीत की शुरू से ही फौज में जाने की अभिलाषा थी। इसके लिए वह पढ़ाई के दौरान ही तैयारी में जुटे थे। यही कारण था कि इंटर की पढ़ाई पूरी होते ही उनका फौज में चयन हो गया। देश के प्रति मर मिटने का जज्बा भरा हुआ था। सचिन यादव ने कहा कि पढ़ाई के दौरान ही सेना में नौकरी करने के लिए बोलते थे।

बेहद सरल, सहज स्वभाव का होने के कारण सभी दोस्तों के चहेते थे। अपने दोस्त से न मिलले का मलाल रहेगा, मगर यह गर्व भी है कि वह देश की खातिर शहीद हुए। हिमांशु यादव ने कहा कि उनकी शहादत को देश हमेशा याद रखेगा। पूरा आसपास के गांवों के लोग शहीद के परिवार के साथ है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
पुलावामा आतंकी हमला - फोटो : अमर उजाला
जिलाजीत बहुत नेकदिल  इंसान थे। सेना में ही तैनात जिलाजीत के चचेरे भाई आलोक यादव इन दिनों छुट्टी पर घर आए हुए हैं। उन्होंने बताया कि बचपन हम दोनों ने साथ बिताया था। नौकरी में आने के बाद अलग-अलग ड्यूटी पर होने के कारण अक्सर भेंट नहीं हो पाती थी। इस बार उनके छुट्टी पर आने पर मुलाकात की उम्मीद थी, लेकिन यह हसरत भी अधूरी रह गई।

पति के जाने का मलाल है, लेकिन यह गर्व भी है कि उन्होंने देश के लिए अपना बलिदान दिया है। सरकार से बस यही इच्छा है कि हमारे बच्चे के भविष्य का कोई बेहतर इंतजाम करे। 
पूनम देवी, शहीद जिलाजीत यादव की पत्नी

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें