पुलावामा आतंकी हमला
- फोटो : अमर उजाला
उसकी हालत देख लोग ढांढ़स बंधाने का साहस भी नहीं जुटा पा रहे थे। पूनम के भाई विशाल ने बताया कि जीजा ने उसे अपनी बाइक बनवाने को कहा था, जिससे छुट्टी पर आने के बाद वह स्थानीय काम निपटा सके। घर की मरम्मत का काम पूरा कराना था। इसके अलावा एक वर्ष पूर्व गांव के बाहर ली गई जमीन पर नया मकान निर्माण शुरू कराने की भी योजना थी।
मां-बहन की आंखों से नहीं थम रहे आंसू
इजरी गांव निवासी स्व. कांता यादव की तीन संतानों में जिलाजीत एकलौते पुत्र थे। डेढ़ वर्ष पूर्व पिता के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी जिलाजीत के ही कंधों पर थी। उनकी मौत से पूरा परिवार बिखर गया है। मां उर्मिला देवी और बहन रेनू व संजू की आंखों के आंसू नहीं थम रहे।
अभी हाल ही में रक्षाबंधन पर दोनों बहनों ने भाई की कलाई के लिए सीमा पर राखियां भेजी थीं। भाई ने वादा किया था कि घर लौटने के बाद बहनों को रक्षाबंधन का तोहफा देंगे। बहनों को भी बेसब्री से भाई से मिलने वाले तोहफे का इंतजार था। मां उर्मिला देवी ने कहा कि बेटे की शहादत पर फख्र है।