जौनपुर शहर का सिपाह स्थित होटल रिवर व्यू शुक्रवार की शाम काव्य कैफे का भव्य गवाह बना। वसंत की सुगंध बिखेरती निशा में कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को कभी गुदगुदाया तो कभी अहसासों को जगाया। देश के जाने माने कवियों ने आधी रात तक काव्य की सरिता बहायी। कभी देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत किया तो कभी हास्य की कविताओं पर लोगों से ठहाका लगवाया। राजनीति पर व्यंग व्यंग छोड़े तो होली से जुड़ी कविताओं पर स्रोता काव्य सरिता में गोते लगाते रहे।
अमर उजाला की ओर से आयोजित काव्य कैफे कुछ कविता कुछ कॉफी का शुभारंभ जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा, विशिष्ट अतिथि पुलिस अधीक्षक डॉ. अजय पाल शर्मा, टाइटल स्पांसर विमल छंगललाल ज्वेलर्स के अधिष्ठाता विमल सेठ ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके किया। अमर उजाला परिवार ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को बुके एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इसके बाद कार्यक्रम के प्रायोजकों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। कवयित्री पद्मिनी शर्मा, कवि प्रियांशु गजेंद्र, अशोक चारण, शशिकांत यादव और डॉ. अनिल चौबे को भी बुके देकर सम्मानित किया गया।
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कवि प्रियांशु गजेंद्र
- फोटो : अमर उजाला
कवि प्रियांशु गजेंद्र ने रपट जाए मोदी तो हो जाए होली, किनारों को छूती लहर वाली होली। कजरारे नैनों से न निहारोगी तो फिर मैं नहीं आऊंगा पर दर्शकों ने खूब समर्थन किया। भ्रमरों के नयन में सुमन का नशा है, मेरे डगमगाते कदम तुम न देखों, गुरुकुल की हे महारानी मेरी मां है राधा रानी प्रस्तुत किया। रात-रातभर तुमको गाया सुबह छपे अखबार में प्रस्तुत करके जमकर समर्थन व तालियां बटोरी।
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कवियित्री पद्यिनि शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
श्रृंगार व प्रेम की कवियित्री पद्यिनि शर्मा ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम की शुरुआत किया। उन्होंने तुम्हारी कोई मजबूरियां अच्छी नहीं लगतीं...,गीत से कविता पाठ की शुरुआत किया। बीते दिनों की याद में शर्माए हैं दादा, जब से जलोटा के साथ देखी है हसीना ... पर खूब ठहाके लगे। इसके अलावा तेरे लिए मां-बाप का घर छोड़ के आई हूं, हिंदी के बेटे हिंद का परिवेश न भूलें...।
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कवि डॉ.अनिल चौबे
- फोटो : अमर उजाला
हास्य व्यंग्य के कवि डॉ.अनिल चौबे ने कविता की शुरुआत में कहा कि लोग उनके मुंह पर न जाए, आधार कार्ड के हिसाब से मुंह रखना पड़ता है ...,इस पर खूब तालियां बजी। मंच व सभागार में मौजूद लोगों के चेहरे खिल उठे। अपने कविता के माध्यम से चीन पर वार करते हुए कहा कि चाइनीज मुंह विच बटन सी आंख तेरी... सुनाकर स्रोताओं को लोटपोट कर दिया। मां गंगा में नालों के गंदे पानी व कचरों को मिलाने व गंगा स्वच्छता अभियान पर मां गंगा की पीड़ा बताते हुए मैं तारणी हूं वापस जा नहीं सकती पर संदेश देकर अपनी लाइनों को विराम दिया।
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कवि अशोक चारण
- फोटो : अमर उजाला
वीर रस के कवि अशोक चारण ने कविता की शुरुआत जोड़ने की बात कहकर देश जोड़ा जाएगा तोड़ने की बात कहकर नहीं से तालियां बटोरी। जिंदगी को सही ढंग से जीने के लिए कविताओं की जरूरत है, देश को बनाने के लिए व देश को बचाने के लिए कविताओं की जरूरत है प्रस्तुत किया। वो भगत सिंह अपने भारत की तरूणाई में जीवित हैं। आजादी की दुल्हन का दूल्हा बड़ा दीवाना था। उस तिरछी टोपी वाले ने गोरों को सीधा कर डाला था। ये रोने वाली भगत सिंह की मां कैसे हो सकती है...पर भी तालियां बटोरकर अपने कविता का समापन किया। उन्होंने जनपद में एक हजार पुरुषों के सापेक्ष 1024 महिलाओं के होने पर भी प्रणाम कर प्रशंसा की।
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शशिकांत यादव
- फोटो : अमर उजाला
मंच का संचालन करने वाले शशिकांत यादव ने अंतिम में कविता प्रस्तुत करके हुए दर्शकों को बांधे रखा। उन्होंने कविता की शुरुआत जब देश लंगूरों के हाथ लूटने लगा तो कवि बनना पड़ा से की। इसके अलावा उन्होंने लालचौक से मिली चुनौती तो घर-घर तिरंगा फहरा दिया। महिला सशक्तिकरण की मिसाल पेश करते हुए द्रौपदी ने राष्ट्रपति बनकर दिखाया है प्रस्तुत किया। शिक्षा पर संदेश वाली कविता भारत में भारत की शिक्षा का अधिकार हो हमारा, विश्वगुरु भारत का ध्वज आगे ले जाएंगे प्रस्तुत किया।
होटल रिवर व्यू को काव्य कैफे के लिए दुल्हन की तरह सजाया गया था। शानदार आयोजन के लिए दोपहर बाद से ही यहां तैयारी होने लगी थी। झालर, बत्तियों की सजावट लोगों को आकर्षित कर रही थी। कार्यक्रम में साहित्य के साथ ही शिक्षा, सामाजिक कार्य, राजनीति, संभ्रांत नागरिकों के साथ उपस्थित महिलाओं ने हास्य-व्यंग पर जमकर ठहाके लगाए। बसंत की बयार के बीच यहां लोग भाव रस में भी गोते लगाते रहे। हर्ष उल्लस के इस मौसम में जब दुल्हन की तरह सजे रिवर व्यू में काव्य पाठ शुरू हुआ तो स्रोता उठने का नाम नहीं ले रहे थे। करीब चार घंटे तक चले आयोजन में लोग जैसे जैसे तालियां बजाते थे वैसे-वैसे कवियों की कविता तेज होती गई।