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पापा उठो न... बलिदानी सुभाष की बेटी को नहीं पता वो सो चुके हैं चिरनिद्रा में, हर आंख में थे बस आंसू

Fri, 26 Jul 2024 05:03 PM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
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बलिदानी सुभाष की डेढ़ वर्षीय बेटी रितिका पिता के लिए रोती हुई - फोटो : संवाद
बलिदानी सुभाष की डेढ़ वर्षीय बेटी रितिका अपने परिजनों रोता हुआ देखकर बिलख रही थी। रितिका को उसकी बुआ ने पकड़ रखा था। बुआ रितिका को बार-बार चुप करा रही थीं, लेकिन रितिका रोते हुए चेहरों को देखकर रो रही थी। बुआ का कहना था कि इस मासूम को क्या पता कि उसके सिर से अब पिता का साया उठ चुका है। रितिका तो बस इन रोते हुए लोगों को देखकर रो रही है। 
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बलिदानी का पार्थिव देह गांव आने पर रो रो कर भंजे भांजियों का बुरा हाल - फोटो : संवाद
22 जुलाई को घुसपैठियों से मुठभेड़ में बलिदान हुए सुभाषचंद्र का पार्थिव शरीर 25 जुलाई की दोपहर करीब तीन बजे गांव में पहुंचा। इससे पहले उनके अंतिम दर्शन के लिए सुबह से ही नगला मनी के अलावा आसपास के गांवों से लोग पहुंचने लगे थे। कोई अपने निजी वाहनों से तो कोई पैदल ही यहां तक पहुंचा। भीषण गर्मी के बावजूद ग्रामीण शाम तक बैठे रहे। दोपहर को सुभाष का पार्थिव शरीर लेकर आई गाड़ी जैसे ही गांव की सीमा में दाखिल हुई, वैसे ही देशभक्ति के नारे गूंजने लगे। गांव के युवा अपने साथी के बलिदान फख्र महसूस कर रहे थे।
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पार्थिव देह पहुंचने पर विलाप करतीं मां पुष्पा देवी - फोटो : संवाद
बलिदानी सुभाष की मां पुष्पा देवी बार-बार अपने लाल को देखने की जिद में ताबूत के पास जा रही थीं तो साथ में आए सेना के जवानों ने उनको संभाला। जवानों ने उन्हें गले लगाकर कहा कि मैया, हम भी तेरे लाल हैं, खुद को संभालो। हम हमेशा तेरे साथ हैं। बलिदानी सुभाष कुमार की पार्थिव देह पहुंचते ही गांव नगला मनी में हर आंख नम थी। सुभाष की मां बेटे के पार्थिव शरीर को देखने के लिए बार-बार ताबूत के पास जा रही थीं। मां कह रही थीं कि बस मुझे मेरे बेटे से दूर मत करो, यह सुनकर पार्थिव शरीर को लेकर आए जवानों ने सुभाष की मां को गले लगा लिया। उन्होंने सुभाष की मां से खुद को संभालो, तुम्हारा बेटा बहुत बहादुर था। हम हमेशा तेरे साथ हैं। कभी भी कोई जरूरत हो तो हमें याद कर लेना। हम सब तेरे लाल हैं। खुद को अकेला मत समझना। जवानों की आंखें भी इस मंजर को देखकर नम थीं।

भारत मां का बेटा था सुभाष... मैंने तो देश को दे दिया था बेटा
मां पुष्पा का रो-रोकर बुरा हाल था। मां की जुबां पर तो बस यही था कि भारत मां का बेटा था सुभाष। मैंने अपने बेटे को देश को दे दिया था। पूरे देश का बेटा था। उसके मरने का दुख तो है, लेकिन उसके बलिदान पर गर्व भी है कि उसका खून देश के काम आया।

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बलिदानी सुभाष का पार्थिव शरीर आने पर बिलखतीं पत्नी कांति - फोटो : संवाद
सुभाष की पत्नी के बेटा हुआ तो उसे भी भेजूंगा सेना में
लांस नायक सुभाष कुमार के माता-पिता को इस बात का गर्व है कि उनके बेटे देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है। पिता मथुरा प्रसाद को कहना है कि उसके बड़े पुत्र बलदेव की तो नौकरी की उम्र निकल गई है। यदि उनके और कोई पुत्र होता तो उसे भी सेना में देश की सेवा के लिए भेज देते। आज मेरे सुभाष ने मेरा सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। देश के दुश्मनों को मुंह तोड़ जवाब देकर अपनी जान देश के लिए न्यौछावर की है। उन्होंने कहा कि सुभाष की पत्नी गर्भवती है, अगर उसके पुत्र हुआ तो उसे भी वह सेना में ही भेजेंगे।
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बलिदानी की पार्थिव देह की अंत्येष्टि के दौरान मांथे से तिरंगा लगाते पिता - फोटो : संवाद
पिता को तिरंगा, पत्नी को सौंपे 1.40 लाख रुपये नकद
सेना के अधिकारियों ने बलिदानी लांस नायक सुभाष के पिता मथुरा प्रसाद को तिरंगा सौंपा। इसके बाद उन्होंने घर जाकर पत्नी को तिरंगा और 1.40 लाख रुपये नकद सौंपे। बलिदानी के पार्थिव शरीर के साथ आए उनकी रेजीमेंट के एक जेसीओ ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि बलिदानी की पत्नी को अभी कुछ दिन उतनी ही तनख्वाह मिलेगी, जो उनके पति का मिलती थी। चिकित्सा और कैंटीन सुविधा आदि भी उसी तरह से मिलेगी। इसके लिए अभी अभिलेखों को पूरा करना पड़ेगा। इसके लिए कुछ जवान यहां रोक दिए गए हैं। वह उनसे अभी के लिए जो जरूरी अभिलेख होंगे, वह पूरा कराएंगे। इसके बाद समय-समय पर यूनिट के जवान अन्य अभिलेखों को पूरा कराने आएंगे।
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बलिदानी की पार्थिव देह आने पर बिलखती बहन अंजना - फोटो : संवाद
लाडले की झलक पाने के लिए टकटकी लगाए रहीं महिलाएं
सहपऊ क्षेत्र के कई गांवों की महिलाएं सुबह से ही सुभाष के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए गांव नगला मनी पहुंच गईं। महिलाएं अपने लाडले की एक झलक पाने के लिए टकटकी लगाकर बैठी रहीं। पार्थिव शरीर के आते ही महिलाएं दर्शन के लिए दौड़ पड़ीं।
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रो-रो कर बलिदानी के भांजे का बुरा हाल - फोटो : संवाद
ग्रामीण बोले..हमारे तो गांव कौ नाम रोशन कर गयौ लाला
हमारे तो गांव कौ नाम रोशन कर गयौ लाला… यह कहना है गांव नगला मनी के ग्रामीणों का। उनका कहना था कि आज इस लाल की वजह से आज हमारे गांव को पूरे देश में जाना जा रहा है। इस लाल ने तो ऐसा काम कर दिया कि आने वाली कई पीढ़िया उसे याद करेंगी। ग्रामीणों का कहना था कि सुभाष के भीतर बचपन से ही देश भक्ति का जज्बा भरा था। बहुत ही कम उम्र में वह देश की सेवा से जुड़ गया। ग्रामीणों का कहना था कि हमारे गांव के कई लोग सेना में हैं। सुभाष की शहादत गांव के युवाओं के लिए मिसाल होगी। 

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बलिदानी सुभाष की पार्थिव देह पहुंचने पर रो-रोकर गुमसुम हुईं पत्नी कांति - फोटो : संवाद
सेना में जाना चाहती है बलिदानी की पत्नी
पत्नी कांति का कहना है कि वह भी सेना में नौकरी चाहती है। वह उसी प्रकार देश की सेवा करना चाहती है जिस प्रकार उसके पति ने की। नौकरी मिलने पर वह अपने परिवार का पालन पोषण सही तरीके से करेगी और देश की सेवा भी करेगीं।

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नगला मनी में नही जले चूल्हे - फोटो : संवाद
भाई ने तीन दहशतगर्दों को मार गिराया था
बड़े भाई बलदेव का कहना कि उसका भाई शेर था, उसने पहले भी तीन दहशतगर्दों को मार गिराया था। और अब मरने से पहले तीन दहशतगर्दों देश में घुसने का प्रयास विफल कर दिया। सुभाष हमेशा से देश प्रेम की बातें ही किया करता था। देश के प्रति मरने मिटने का जज्बा उसमें कूटकूटकर भरा था। उसके बलिदान पर उन्हें गर्व है।

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बलिदानी की देह के अंतिम दर्शन को छत पर लगी भीड़ - फोटो : संवाद
जगह-जगह पार्थिव शरीर पर किए पुष्प अर्पित, हजारों लोगों ने हाथों में तिरंगा लेकर किया सुभाष को नमन
लांसनायक सुभाष कुमार के सम्मान में सादाबाद से नगला मनी से पार्थिव देह के साथ तिरंगा यात्रा निकाली गई। सेना की गाड़ी के आगे बाइकों पर युवकों का एक दल हाथों में तिरंगा लेकर चल रहे थे। जगह-जगह पार्थिव शरीर पर श्रद्धा पुष्प अर्पित किए गए। लांसनायक का पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार की दोपहर करीब डेढ़ बजे सादाबाद सीमा में प्रवेश किया। सीमा में प्रवेश के दौरान युवाओं की टोली ने पहले से ही तिरंगा यात्रा की तैयारी कर रखी थी। सेना की गाड़ियों के साथ-साथ युवाओं की बाइक की एक टोली हाथों में तिरंगा लेकर सादाबाद से नगला मनी तक आईं। हाथों में तिरंगा लिए युवा भारत माता की जय, सुभाष कुमार अमर रहे के नारे लगाते हुए चल रहे थे। जिन मार्गों से होकर नगला मनी तक सुभाष की पार्थिव देह पहुंची, उन रास्तों को भी तिरंगे से सजाया गया था।

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बलिदानी की पार्थिव देह आने पर बिलखती परिवार की महिला - फोटो : संवाद
युवाओं में गुस्सा, लगे पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे
सुभाष के बलिदान से युवाओं में पाकिस्तान के खिलाफ जबर्दस्त गुस्सा दिखाई दिया। अपने साथी के बिछड़ने के गम में उनकी आंखों से आंसू रुक नहीं रहे थे। पार्थिव शरीर के गांव पहुंचते ही युवाओं ने पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए।

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बलिदानी सुभाष की नानी को संभालतीं पुलिस अधिकारी - फोटो : संवाद
अंत्येष्टि के लिए आखिरी वक्त में हुआ भूमि का चयन
बलिदानी के शव के अंतिम संस्कार के लिए भूमि के चयन के लिए बृहस्पतिवार की सुबह तक प्रक्रिया चलती रहती। प्रशासन की ओर से गांव के अंदर एक स्थल का चयन किया गया था, लेकिन परिजन गांव के बीच में ही सरकारी भूमि पर अंतिम संस्कार करने की बात पर अड़े थे। बृहस्पतिवार की सुबह गांव के परिषदीय विद्यालय के निकट अंतिम संस्कार के लिए स्थल निर्धारित किया गया।

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सलामी देते सेना के जवान - फोटो : संवाद
बलिदानी सुभाष को सैन्य सम्मान के साथ दी अंतिम विदाई
जम्मू-कश्मीर के पुंछ में बलिदान हुए सुभाष चंद्र की पार्थिव देह का बृहस्पतिवार को सैन्य सम्मान के साथ उनके गांव नगला मनी स्थित परिषदीय विद्यालय के समीप खाली भूमि पर अंतिम विदाई दी गई। सेना की तीन यूनिटों से आई टुकड़ियों ने शोक सलामी दी। इस दौरान भारत माता की जय और बलिदानी सुभाष अमर रहे के नारे गांव में गूंजते रहे।

गत 22 जुलाई को पुंछ जिले के कृष्णा घाटी सेक्टर में सीमा पर घुसपैठ की साजिश को सेना ने नाकाम कर दिया था। इस दौरान गांव नगला मनी निवासी लांस नायक सुभाष चंद्र बलिदान हो गए थे। बृहस्पतिवार की दोपहर करीब तीन बजे उनकी पार्थिव देह गांव नगला मनी पहुंची। उनके अंतिम दर्शन के लिए सुबह से ही नगला मनी के अलावा आसपास के गांवों से लोग पहुंचने लगे थे। सादाबाद से गांव नगला मनी तक जिन रास्तों से बलिदानी की पार्थिव देह लेकर आ रही सेना की गाड़ी गुजरी, उन रास्तों को तिरंगों से सजाया गया था, लोगों ने रास्ते में जगह-जगह बलिदानी की पार्थिव देह पर पुष्पवर्षा की। इस दौरान बलिदानी सुभाष अमर रहे, जब तक सूरज चांद रहेगा, सुभाष तेरा नाम रहेगा के नारे गूंजते रहे।

गांव पहुंचने के बाद परिजनों ने सुभाष चंद्र की पार्थिव देह के अंतिम दर्शन किए। उसके बाद मेरठ से आई 12 जाट रेजीमेंट, वन कोर सिगनल रेजीमेंट और अलवर से आई 19 जाट रेजीमेंट की टुकड़ी ने बलिदानी सुभाष के पार्थिव शरीर काे शोक सलामी दी। बलिदानी के बड़े भाई बलदेव ने मुखाग्नि दी। इस दौरान यहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गईं।

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बेहोश हुए बलिदान के पिता को गोदी में उठाकर ले जाते लोग - फोटो : संवाद
पार्थिव शरीर देखते ही माता-पिता हुए बेहोश
बलिदानी सुभाष कुमार का पार्थिव शरीर गांव में पहुंचने के बाद उनके अंतिम दर्शनों के लिए जैसे ही ताबूत को खोला गया, वहां माता-पिता और परिजन सुधबुध खो बैठे और अचेत हो गए। ग्रामीण परिजनों को ढाढ़स बंधाते नजर आए। ताबूत खुलते ही सबसे पहले पिता मथुरा प्रसाद ने अपने बेटे सुभाष की पार्थिव देह को देखा, वह सुधबुध खो बैठे और अचेत हो गए। ग्रामीण उन्हें उठाकर भीड़ से दूर ले गए। उन्हें खुली जगह में लिटाकर पानी पिलाया। कुछ देर बाद पिता को होश आया। सुभाष की मां पुष्पा देवी, बहन अंजना और पत्नी कांति की भी तबीयत बिगड़ गई। चिकित्सकों ने उन्हें उपचार दिया। इस दौरान माहौल काफी गमगीन हो गया। परिजन बलिदानी की बातों को याद कर बिलख रहे थे। 
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बलिदानी के पार्थिव देह को मुखाग्नि देता भाई - फोटो : संवाद
मृतक के भाई बलदेव ने दी मुखाग्नि, मुखाग्नि के दौरान हर आंख हुई नम
गांव नगला मनी का बलिदानी लांस नायक सुभाष कुमार को तीन यूनिटों से आए अफसर, जेसीओ एवं उनकी टुकड़ी ने शोक सलामी दी । मेरठ से आई 12 जाट रेजीमेंट की कमान मेजर अंकुश गुलेरिया , वन कोर सिगनल रेजीमेंट की कमान मेजर राकेश पाणी ने की थी । इधर, अलवर से आई 19 जाट रेजीमेंट ने भी बलिदानी के पार्थिव शरीर काे शोक सलामी दी । इसके बाद तीनों रेजीमेंट के सलामी गारद ने हवा में गोलियां दाग उसको सैनिक सम्मान दिया। उससे पहले बलिदानी का पार्थिव शरीर आने पर सादाबाद से लेकर उसके गांव तक रास्ते में पड़ने वाले गांवों के ग्रामीणों उसकी गाड़ी पुष्प वर्षा का बलिदानी सुभाष अमर रहे ,जब तक सूरज चांद रहेगा सुभाष तेरा नाम रहेगा के नारों से पूरा रास्ता गुंजायमान कर दिया। गांव आने के बाद पुलिस को भीड़ को नियंत्रण करने में पसीने छूट रहे थे । बलिदानी के चाचा के घर के सामने खेत में गाड़ी से उसका पार्थिव शरीर उतारा गया और उसके साथ आई सैनिक टुकड़ी उसे धीमी चाल से लेकर उस खेत पर बिछे तख्त पर रख दिया , वहां महिला एवं पुरूषों ने बलिदानी के पार्थिव शरीर के दर्शन किए । इसके बाद उसके पार्थिव शरीर को वह स्थान पर ले जाया गया जहां पर उसकी अंत्येष्टि होनी थी ,वहां पार्थिव शरीर लिपटे तिरंगे को उतारा गया। तिरंगे को लांस नायक सुभाष की पत्नी को उसके घर पर जाकर दिया गया। तीनों यूनिटों की टुकड़ियों ने बलिदानों को शोक सलामी दी । उसके बड़े भाई बलदेव ने उसे मुखाग्नि दी। जब बड़ा भाई बलदेव बलिदानों को मुखाग्नि दे रहा था तो वहां पर मौजूद हजारों की संख्या में लोगों के आंखें भी नम हो गई। उसकी यूनिट 7 जाट से नायब सूबेदार वीरी सिंह , हवलदार पवन , लांस नायक पवन पार्थिव शरीर के साथ आए थे।
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