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शूटर आशु का एनकाउंटर: बचपन में ही सिर से उठ गया मां का साया, बुआ ने पाला; अपराध की दुनिया में एंट्री की कहानी

Fri, 03 Apr 2026 10:41 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, हापुड़

सार

शार्प शूटर आशु उर्फ मोंटी अपराध की दुनिया में कदम रखने के बाद उधम सिंह की करीबी ने कुख्यात बना दिया। बचपन में ही आशु के सिर से मां का साया उठ गया था। बुआ के यहां शुरुआती परवरिश हुई। अपराध के चक्कर में 28 बीघा जमीन बिक गई।
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UP Encounter - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
मुरादाबाद में एनकाउंटर में मारा गया हाफिजपुर थाना क्षेत्र के गांव मीरपुर कलां निवासी आशु चड्ढा उर्फ मोंटी वर्ष 2010 में हत्या के मामले में नामजद होने के बाद जेल गया था। जहां उसकी मुलाकात उधम सिंह के गुर्गों से हुई और वह अपराध के दलदल में फंसता चला गया।

इसके बाद उसने लूट, डकैती और रंगदारी जैसे कई संगीन अपराध किए और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कुख्यात बन गया। गुरुवार शाम को उसका शव गांव पहुंचा। जहां गांव के ही श्मशान में उसका अंतिम संस्कार किया गया।

 
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आशु उर्फ मोंटी चड्ढा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आशु उर्फ मोंटी तीन भाइयों में सबसे छोटा था। जब वह साढ़े तीन साल का था तभी उसकी मां का बीमारी के चलते देहांत हो गया। इसके बाद मोंटी को ततारपुर निवासी उसकी बुआ ने पाला। 

 
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मुठभेड़ में ढेर बदमाश आशु के बारे में जानकारी लेने जिला अस्पताल पहुंचे एसएसपी अंतिल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
परिवार के लोगों की मानें तो 2010 में गांव में हुई पप्पू की हत्या के मामले में उसे गिरफ्तार किया गया था, लेकिन इस मामले में रंजिशन फंसाया गया था और इसी मुकदमे के बाद उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा। पप्पू की पत्नी उर्मिला ने आशु के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 

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मुठभेड़ में ढेर बदमाश आशु के बारे में जानकारी लेने जिला अस्पताल पहुंचे पुलिस अफसर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
करीब एक साल बाद पुलिस उसे गिरफ्तार कर पाई थी लेकिन एक साल बाद ही 2012 में वह पेरोल पर जेल से बाहर आ गया था। जेल में रहने के दौरान उसकी मुलाकात उधम सिंह गैंग के बदमाशों से हुई। जेल से छूटने के बाद उसने ताबड़तोड़ वारदात को अंजाम देना शुरू कर दिया और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कुख्यात बदमाश बन गया।
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मुठभेड़ में ढेर बदमाश आशु, जिला अस्पताल में पुलिस अधिकारी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
2014 में मेरठ के थाना सरधना और थाना सरूरपुर क्षेत्र में गैंगवार के दौरान हुई दो हत्याओं के मामले पुलिस ने आशु को गिरफ्तार किया था। 2016 में गाजियाबाद के थाना कविनगर क्षेत्र में लूट और इंद्रापुरम से चोरी के मामले में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था।
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मुठभेड़ में ढेर बदमाश आशु - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
2017 में हत्या के प्रयास के मामले में मेरठ सरूरपुर व गाजियाबाद के कविनगर से चोरी का वाहन बरामद किए गए थे। हाफिजपुर थाने के अलावा आशु पर जिले में करीब 18 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें हत्या, हत्या का प्रयास, लूट और चोरी आदि के शामिल हैं।
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मुठभेड़ में ढेर बदमाश आशु, जिला अस्पताल में तैनात पुलिस बल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एक के बाद एक दिए गए अपराधों को अंजाम देने के बाद वह उधम सिंह गैंग का शार्प शूटर बन गया। अब उसका गैंग के साथ कारोबारियों से रंगदारी वसूलने का मुख्य धंधा बन गया था। 

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मुठभेड़ में ढेर बदमाश आशु के बारे में जानकारी लेने जिला अस्पताल पहुंचे एसएसपी अंतिल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ऐसे मामलों में आशु का नाम प्रकाश में आने के बाद एसटीएफ उसके पीछे लगी थी और उसकी तलाश में जुटी थी। हालांकि इससे पहले वर्ष 2025 में हाफिजपुर पुलिस ने उसे चोरी की बाइक और एक तमंचे के साथ गिरफ्तार किया था, लेकिन इस मामले में उसे जल्दी ही जमानत मिल गई थी।

 

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मुठभेड़ में ढेर बदमाश आशु, जिला अस्पताल में तैनात पुलिस बल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वर्ष 2014 में की थी सरुरपुर के चेतन की हत्या
पुलिस के अनुसार, उधम सिंह गैंग में आने के बाद वर्ष 2014 में आशु ने सुमित जाट के साथ मिलकर मेरठ के हसनपुर रजापुर थाना सरूरपुर में चेतन की हत्या की थी। इसके अलावा उसने सुपारी लेकर मोदीपुरम स्थित कृषि विवि के डीन राजवीर सिंह पर भी गोलियां बरसाई थीं, हालांकि उनकी जान बच गई थी।

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जिला अस्पताल में पुलिस - फोटो : अमर उजाला
मुकदमों के कारण बिक गई 28 बीघा जमीन, आठ महीने पहले ही हुई थी शादी
आशु तीन भाइयों में अनुज और नीशू के बाद सबसे छोटा था। पिता भरत सिंह के नाम गांव में 28 बीघा जमीन आई थी लेकिन वर्ष 2010 के बाद अपराध की दुनिया से जुड़ने के बाद पिता की यह जमीन बिक गई और परिवार जैसे-तैसे ही गुजर बसर कर रहा है। 
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जिला अस्पताल में पुलिस - फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा आशु की शादी करीब आठ महीने पहले ही रायबरेली निवासी ऋचा के साथ हुई थी। वह फिलहाल गांव में नहीं रहती थी और आशु का भी गांव में बेहद कम ही आना जाना था। बताया जा रहा है कि वह अपनी पत्नी के साथ गाजियाबाद में कहीं रहता था। बृहस्पतिवार शाम गांव के श्मशान में अंतिम संस्कार के साथ आशु के आपराधिक सफर का भी अंत हो गया।
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