गोरखपुर मंडल स्तर ही नहीं प्रदेश स्तर का भी सूचना तंत्र पूरी तरह से फेल साबित हुआ है। प्रदेश के आला अफसरों ने देवरिया जिले में बवाल की आशंका जताई थी और वहां पर कमिश्नर जयंत नार्लिकर, एडीजी रेंज जय नारायण सिंह को कैंप करने का आदेश भी हुआ था।
दोनों अफसर वहां पर मौजूद भी थे और आसानी से सबकुछ निपट भी गया मगर इसी बीच गोरखपुर में हिंसा भड़क गई। वह भी ऐसी कि पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए।
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बड़ी मस्जिद के बाहर बड़ी संख्या में जुटी भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
जानकारी के मुताबिक शुक्रवार जुमे की नमाज के बाद भीड़ जुटने की पूरी आशंका थी। बड़े आराम से काली पट्टी भी बांधे जा रहे थे। पुलिस को आशंका भी थी, फिर भी फोर्स इतनी पर्याप्त क्यों नहीं लगाई गई, यह किसी को समझ में नहीं आया। एडीएम सिटी, एसपी सिटी, सीओ कोतवाली के अलावा वहां पर बमुश्किल 50 की संख्या ही थी जबकि तिवारीपुर इलाके में भारी फोर्स थी। वहां एक समुदाय की आबादी ज्यादा है, इस लिहाज से तैयारी की थी लेकिन इस बात को पुलिस, प्रशासनिक अफसर भूल गए कि जुमे की नमाज बड़ी मस्जिद में ही अदा की जाती है।
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बड़ी मस्जिद के बाहर बड़ी संख्या में जुटी भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
ज्यादा भीड़ भी बड़ी मस्जिद में जुटती है। पुलिस का दावा था कि ड्रोन कैमरे की मदद ली जाएगी। घोड़ा पुलिस भी गश्त करेगी लेकिन सारी तैयारी फेल हो गई। मस्जिद में इतनी बड़ी संख्या में लोग जुटे और शाहमारूफ की सारी दुकानें बंद कर दी गईं। दुकानें बंद होने का मतलब भी पुलिस एहतियात समझ बैठी जबकि यह चंद लोगों के शरारत की तैयारी थी। इन सब के बीच गोरखपुर में हिंसा भड़क गई और पुलिस ताकती रह गई। जब पुलिस, प्रशासन ने मोर्चा संभाला, तब प्रदर्शनकारी सड़क पर आ गए थे।
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गोरखपुर में हिंसा होती देख सहम गए थे लोग
- फोटो : अमर उजाला
घरों में घुसकर पकड़े उपद्रवी, सहम गए लोग
सड़क से प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के बाद पुलिस ने आसपास के मोहल्ले में सर्च ऑपरेशन चलाया। एक-एक घर में गई। घटना के बाद लोग घरों में कैद हो गए थे लेकिन पुलिस ने दरवाजा खटखटाया। जिनका दरवाजा खुला ठीक नहीं तो जबरन दाखिल हुई। इस दौरान कई लोगों की पिटाई की गई, फिर छोड़ा गया। कई लोगों को पकड़कर पुलिस अपने साथ लाई। पुलिस का दावा है कि पकड़े गए सभी लोग बवाल में शामिल थे। प्रशासन, पुलिस की इस कार्रवाई से मोहल्ले के लोग सहम गए थे। हालांकि जिन घरों में महिलाएं या बच्चे थे, उन घरों में पुलिस दाखिल नहीं हुई।
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गोरखपुर में गश्त करती पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
घरों में कैद हो गए थे लोग, उपद्रवियों को भी कोसा
आसपास के मोहल्लों में पुलिस की कार्रवाई से डरे लोग उन लोगों को कोस रहे थे जो सड़क पर उपद्रव करके भाग गए। अनिकेत, सेराजुद्दीन, फैयाज ने बताया कि बवाल करने वाले तो अपने घर भाग जाते है लेकिन जिन लोगों का इस घटना से कोई लेना देना नहीं होता है वहीं फंसते हैं। पुलिस जिस तरह से घरों में जबरन घुसकर तोड़फोड़ कर रही है, वह गलत है।
सड़क किनारे रोने लगी महिला तो पुलिस ने घर भेजवाया
पुलिस घरों में सर्च कर रही थी इसी दौरान भारी पुलिस फोर्स देख एक महिला वहीं पर रोने लगी। सड़क किनारे महिला को रोता देख पुलिस तुरंत ही एक रिक्शा बुलाई और फिर उसे घर तक छोड़कर आने को कहा। पुलिस का यह चेहरा देखकर पास में जिस दुकान को छोड़कर लोग ऊपर भाग गए थे वह भी नीचे उतरे और फिर अपने दुकान में ताला बंद किए।