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बच्चों के बीच फिर शिक्षिका बन गईं राज्यपाल आनंदीबेन, बोलीं-स्कूल जाते थे तब बच्चे दिखाई देते थे

Wed, 11 Dec 2019 10:54 AM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
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समारोह को संबोधित करतीं राज्यपाल आनंदी बेन पटेल - फोटो : अमर उजाला
महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक समारोह के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में जब बच्चों से भरे दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में राज्यपाल आनंदीबेन पहुंची तो वह शिक्षिका के रूप में नजर आईं। अतीत को याद करते हुए कहा कि 30 साल तक उन्होंने शिक्षिका बनकर पढ़ाने का कार्य किया है। सुबह जब स्कूल जाती थीं तो बच्चे ही बच्चे दिखाई देते थे। वह नजारा आज अरसे बाद देखने को मिला है। उन्हें खुशी इस बात की है कि इन बच्चों को आचार्य तैयार कर रहे हैं, जो शिक्षा दी जा रही है यह बच्चों के जीवन के लिए उपयोगी होगी। जो पुरस्कार दिया जा रहा है उससे प्रेरणा मिलेगी।
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संस्थापक समारोह के समापन अवसर पर विद्यार्थियों को सम्मानित करतीं राज्यपाल आनंदीबेन। - फोटो : अमर उजाला
प्राथमिक शिक्षा का जिक्र करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन ने कहा कि कक्षा एक से आठ तक शिक्षा अनुशासन के लिए होती है। बच्चों से कहा कि उन्हें यह जानना होगा कि वह क्या बन सकते हैं। अभिभावक विषय चयन के लिए दबाव न बनाएं। उन्होंने शिक्षा के साथ स्वास्थ्य पर भी जोर दिया, कहा कि स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क विकसित होता है।
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संस्थापक समारोह के समापन अवसर पर विद्यार्थियों को सम्मानित करतीं राज्यपाल आनंदीबेन। - फोटो : अमर उजाला
राज्यपाल ने प्राचार्यों से कहा कि समय - समय पर छात्राओं का हीमोग्लोबीन चेक कराया जाना चाहिए। यदि वे एनमिक पाईं जाए तो उसका इलाज कराएं। बच्चों से कहा कि पूरे विश्व में स्पर्धा है। इसके लिए छात्रों को तैयार होना होगा। प्रतिस्पर्धा सकारात्मक होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्रा की शिक्षा में असमानता नही होनी चाहिए।
 

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संस्थापक समारोह के समापन अवसर पर विद्यार्थियों को सम्मानित करतीं राज्यपाल आनंदीबेन। - फोटो : अमर उजाला
राज्यपाल ने लड़कों की तरफ इशारा करते हुए कहा कि वह विश्वविद्यालयों के कार्यक्रम में जा रही हैं। वहां देख रही हैं कि 100 में से 60 मेडल लड़कियों को मिल रहे हैं। शिक्षा सबको समान मिलती है। लड़की घर का भी कार्य करती है। लड़कियां जरूरत पड़ने पर रोटी बना देती है। यह करने के बाद भी लड़कियां आगे हैं। आप स्पर्धा करिए पर वह सकारात्मक होनी चाहिए। बच्चे महापुरषों का अनुशरण करें। उनसे प्रेरणा लें। बच्चे सलेबस के अलावा भी कुछ ज्ञानवर्धक किताबें पढ़ने की आदत डालें।
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संस्थापक समारोह के समापन अवसर पर विद्यार्थियों को सम्मानित करतीं राज्यपाल आनंदीबेन। - फोटो : अमर उजाला
राज्यपाल आनंदीबेन ने जल संरक्षण का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि जल का जीवन में बहुत ही महत्व है। उसका दुरुपयोग नहीं करने का संकल्प सभी लें। ये भी कहा कि देश में लाखों लोग एक वक्त भोजन के बगैर सो जाते हैं, जब कि उससे अधिक अन्न रोज बर्बाद होता है। हम उतना ही अपने थाली में लें जितना खा सकते हैं। उन्होंने पर्यावरण के प्लास्टिक को हानिकारक बताते हुए उसके प्रयोग से बचने की सलाह दी।
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महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक सप्ताह समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला
बच्चे कॅरियर चुनें, अभिभावक मदद करें
राज्यपाल ने कहा कि अभिभावक अपने बच्चों पर कॅरियर को लेकर दबाव न बनाएं। बच्चे खुद कॅरियर चुनें और अभिभावक उनकी मदद करें। उन्होंने अपने समय के स्कूल-कॉलेजों के अनुभवों को साझा किया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि टेस्टबुक के अलावा भी साहित्य व प्रेरक पुस्तकें पढ़ते रहें। टीवी, व्हाट्सएप के चक्कर में पढ़ना तो बच्चे भूलते जा रहा है। बच्चों का सर्वांगीढ़ विकास नहीं हो पा रहा है।
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महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के संस्थापक समारोह के समापन अवसर पर पहुंची राज्यपाल आनंदीबेन। - फोटो : अमर उजाला
झूठ बोलने की आदत घर से मिलती है
राज्यपाल ने कहा कि बच्चों में झूठ बोलने की आदत घर से मिलती है। बच्चा जब फोन उठा लेता है तो अक्सर वह सही बोलता है कि पापा से बात करा रहे हैं, लेकिन पास बैठे कहते हैं कि बोल दो पापा घर पर नहीं है। मोबाइल छूट गया है। यह छोटा सा उदाहरण बस है। अभिभावकों से कहा, अच्छे संस्कार देंगे तभी बच्चे अच्छा इंसान बनेंगे। यह सुनते ही पूरे सभागार में तालियां गूंजने लगी।

 
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