यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के राजनीतिक करियर में गजब का संयोग है। इसका इशारा आज मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने गोरखपुर में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के साप्ताहिक संस्थापक समारोह के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए दिया। उन्होंने ये भी कहा कि हिमाचल से गोरक्षपीठ का सीधा रिश्ता है। आइए जानते हैं कैसे?
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हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को स्मृति चिन्ह भेंट करते यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ
- फोटो : amarujala
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि 1998 में योगी आदित्यनाथ पहली बार लोकसभा पहुंचे। लगातार 5 बार सांसद रहे। उसी साल मै भी चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंचा। लगातार पांच बार विधायक रहा। आज हम दोनों सीएम हैं, लेकिन जैसी छवि योगी की है वह किसी मुख्यमंत्री की नहीं।
जब से गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की कमान संभाली है, यहां की तस्वीर और पहचान बदल गई। योगी के राज में यूपी गुंडाराज और भ्रष्टाचार से मुक्त हो चुका है। चौतरफा विकास इसका प्रमाण है। यह प्रदेश अब देश का ग्रोथ इंजन बनने की ओर अग्रसर है। इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हो रहा है और शिक्षण संस्थानों की स्थापना हो रही है। योगी के सुशासन से पूरी दुनिया में यूपी गौरान्वित कर रहा है।
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सीएम योगी आदित्यनाथ और हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर में गजब का संयोग
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हिमाचल से गोरक्षपीठ का सीधा रिश्ता
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल से गोरक्षपीठ का सीधा रिश्ता है। गुरु गोरक्षनाथ हिमाचल प्रदेश के ज्वाला देवी से ही आए। आज यह पीठ पूरी दुनिया में सिद्ध पीठ के रूप में प्रतिष्ठित है। उन्होंने कहा कि महाराज जी (सीएम योगी) ने फोन कर इस समारोह में आने का विनम्र आग्रह किया तो मैने कहा कि देश के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री का देश के छोटे से राज्य के मुख्यमंत्री को निमंत्रण देना आग्रह नहीं आदेश है। यह मेरा सौभाग्य है। उन्होंने सीएम योगी को हिमाचल आने का निमंत्रण दिया कि वे देवभूमि पर आकर आशीर्वाद प्रदान करें।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को करवाए गुरु गोरक्षनाथ जी के दर्शन।
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महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के साप्ताहिक संस्थापक समारोह के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि आधुनिकता के दौड़ में संस्कार को बचाए रखना जरूरी है। हम अपनी संस्कृति से कटते जा रहे हैं। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद संस्कारयुक्त शिक्षा देने की दिशा में बेहतर काम कर रहा है। इस संस्था से जुड़े शैक्षणिक शिक्षण संस्थाओं का मकसद शिक्षा का व्यवसायीकरण नहीं, बल्कि शिक्षा के जरिए संस्कार और संस्कृति का निर्माण करना है। यही किसी राष्ट्र की बुनियाद है। ऐसी बुनियाद जिस पर श्रेष्ठ और सशक्त भारत का निर्माण होना है। यही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना भी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आगे बढ़ने की होड़ में हम अपनी संस्कृति एवं संस्कार को छोड़ते जा रहे हैं। यह आगे जाने नहीं बल्कि अपने संस्कार और संस्कृति से दूर जाना है। तकनीक के इस दौर में हमें अपने संस्कारों एवं संस्कृति के साथ बढ़ना होगा। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद सरीखी संस्थाओं से सीखा जा सकता है।