फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

निर्भया कांड: अक्षय की याचिका खारिज, गांववाले बोले-जब तक दोषी जिंदा है, पूरा देश शर्मिंदा है

Thu, 19 Dec 2019 10:33 AM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, बस्ती।
विज्ञापन
1 of 5
पवन जल्लाद - फोटो : अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट में निर्भया के दोषी अक्षय कुमार सिंह की पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद चारों दोषियों की फांसी की सजा को हरी झंडी मिल गई है। इन दोषियों में एक गोरखपुर जोन के बस्ती जिले का पवन गुप्ता उर्फ कालू भी शामिल है। उसकी हरकत पर आज भी गांव के लोगों को यकीन नहीं होता। इसका जिक्र होते ही उनका सिर शर्म से झुक जाता है। पवन के चाचा भी दिल्ली में रहकर काम करते हैं। निर्भया कांड के बाद पवन की मां की मौत पर पिता एक बार अपने गांव जगन्नाथपुर आए थे, लेकिन वह क्रिया-कर्म के बाद लौट गए।
विज्ञापन

2 of 5
निर्भया का दोषी पवन गुप्ता - फोटो : सोशल मीडिया
निर्भया कांड का अभियुक्त पवन गुप्ता बस्ती जिले के जगन्नाथपुर का निवासी है। उसके परिवार के लोग तो दिल्ली के आरकेपुरम रविदास कैंप में रहते हैं, लेकिन यहां के लोग इन दिनों फांसी की चर्चा सुनकर सहम से गए हैं। उनका कहना है कि दोषी को जरूर फांसी होनी चाहिए। पवन गुप्ता के बचपन के दोस्त और अन्य लड़के कहते हैं कि उसे क्रिकेट का बहुत शौक था। उसने महादेवा में नमकीन बनाने की फैक्ट्री खोली लेकिन वह चल नहीं पाई। इसके बाद वह दिल्ली चला गया और वहां जूस का व्यवसाय करने लगा।
विज्ञापन

3 of 5
पवन जल्लाद ने निर्भया के दोषियों को फांसी देने की इच्छा जाहिर की - फोटो : अमर उजाला
दो भाई व दो बहन में सबसे बड़ा पवन दुकानदारी के अलावा ग्रेजुएशन की पढ़ाई भी कर रहा था। पिता ने यहां लालगंज थाने के महादेवा चौराहे के पास गांव में भी जमीन ली थी और उस पर मकान बनवाना शुरू किया था, मगर 16 दिसंबर 2012 में हुए निर्भया कांड के बाद से काम ठप हो गया। पवन के पिता, दादी और बहन आदि परिवार के सदस्य आरकेपुरम इलाके के उसी संतरविदास कैंप में रहते थे। उसकी बहन और दादी ने 2017 में फांसी की सजा के बाद अदालत और कानून पर टिप्पणी की थी। दोनों का मानना था कि उन्हें न्याय पाने के लिए प्रयास करने का मौका नहीं दिया गया।

4 of 5
खंडहर बना मकान - फोटो : अमर उजाला
लालगंज थाने के महादेवा चौराहे के पास बना पवन का मकान खंडहर जैसा दिखता है। निचली अदालत ने 10 सितंबर 2013 में जब उसे फांसी की सजा सुनाई तो गांव में लोगों ने समर्थन किया लेकिन दादी ने उसके छूटने की बात की थी। 13 मार्च 2014 में हाईकोर्ट व 27 मार्च 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा बरकरार रखी। अब दया याचिका को भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर परिवार की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। इस मामले के एक अन्य दोषी रामसिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी, जबकि एक आरोपी नाबालिग था, जिसे बालगृह में सजा काटने के बाद छोड़ दिया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
निर्भया का दोस्त अवनिन्द्र - फोटो : अमर उजाला
गौरतलब है कि दोषी पवन के पिता ने वारदात के समय निर्भया के साथ मौजूद उसके दोस्त एवं इस मामले की एकमात्र गवाह पर आरोप लगाया था कि उसने मीडिया से पैसे लेकर साक्षात्कार दिए हैं, जिससे मामले की सुनवाई प्रभावित हुई है। पटियाला हाउस कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए कहा था कि गवाह की विश्वसनीयता कोर्ट के बाहर उसके बयानों के आधार पर तय नहीं की जा सकती है। गवाह कोर्ट में शपथ लेकर अपना बयान दर्ज कराते हैं, वे कोर्टरूम से बाहर क्या कहते हैं, इससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल नहीं किए जा सकता।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें