गोरखपुर में नखास के आसपास सड़कों पर बिखरे ईंट, जूता, चप्पल वहां पर हुए बवाल की गवाही दे रहे थे। इसी बीच कमिश्नर जयंत नार्लिकर, एडीजी रेंज जय नारायण सिंह मौके पर पहुंच गए। थोड़ी ही देर में वहां पर डीएम और एसएसपी भी आ गए। दोनों ही अफसरों ने कहा कि पांच मिनट में हालात सामान्य हो गए थे पूरा शहर घूम लिया कहीं कोई दिक्कत नहीं है।
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गोरखपुर में नखास में भीड़ बेकाबू
- फोटो : अमर उजाला
एडीजी जय नारायण सिंह यह सुनने के बाद बाद पैदल ही चौराहे की ओर आ गए, जहां पर उनकी नजर ईंट, जूते पर पड़ी और फिर क्या उन्हें बताने की कोई जरूरत ही नहीं पड़ी थी हुआ क्या था? बस एसएसपी को बुलाए और कहा कि सड़कों की सफाई कराएं। इसके बाद ही वहां पर नगर निगम से सफाई कर्मचारी आए और गाड़ियों में भरकर ईंट पत्थर लेकर गए।
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- फोटो : अमर उजाला
आमतौर पर इस तरह की वारदात होने के बाद पुलिस प्रशासन सबसे पहले सड़कों की सफाई ही कराती है ताकि आम लोग, मीडिया को यह बताया जा सकें कि कोई बड़ी वारदात नहीं हुई है लेकिन इस मामले में भी पुलिस चूक गई थी। पुलिस गश्त तो कर रही थी लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा था।
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गोरखपुर में तैनात पुलिस अधिकारी।
- फोटो : अमर उजाला
शायद यही वजह थी कि एडीजी को भी एसएसपी की बातों पर उतना यकीन नहीं हुआ और वह भी अनुभव से सब कुछ चंद मिनटों में समझ गए फिर अपने आदेशों का क्रम शुरू किया। एडीजी ने तत्काल कहा कि यह फोर्स सुबह से है इनकी जगह पर दूसरी फोर्स लगा दीजिए। ताकि वह मुस्तैदी से काम कर सकें।
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गोरखपुर में गश्त करती पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस के पांच फैसले
0 इलाके के हर चौराहे पर पुलिस बल तैनात रहेगी
0 15 क्यूआरटी लगातार भ्रमण करेगी
0 अफसरों की अलग-अलग टोली फोर्स के साथ गश्त करेगी
0 फोर्स हर आठ घंटे पर बदल दी जाएगी
0 अफवाह फैलाने पर तत्काल कार्रवाई होगी
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- फोटो : अमर उजाला
जल्दी घर आइए, बवाल हो गया
शहरवासी अपने-अपने काम पर निकले थे। कोई ऑटो लेकर निकला था, कोई अपने दफ्तर निकला था। सभी अपने-अपने कार्य में मशगूल थे। इस दौरान बवाल की सूचना आई। लोग बवाल वाले इलाके में जाने से बचते नजर आए। वहीं, मीडिया, सोशल मीडिया से बवाल की खबर मिलते ही उनके घरवाले भी चिंतित हो गए।
धर्मशाला से ऑटो चलाने वाले रामसुमेर ने बताया कि वह उस समय गोलघर में ऑटो में लेकर जा रहे थे। तभी बवाल की सूचना मिली। बताया कि इसी दौरान उनकी पत्नी ने मोबाइल पर फोन किया। वह चिंतित थीं की मैं कहां हूं। कहा कि कैसे हैं आप, सबकुछ ठीक है न, जल्दी घर आइए बवाल हो गया है। इसी तरह काम पर निकले कई लोंगों की मोबाइल की घंटियां हालचाल जानने के लिए बजने लगी।
वहीं देर शाम तक चौराहों पर स्थित पान की दुकानों और चाय की दुकानों पर बवाल की चर्चा होती रही। सब लोग जानने के लिए आतुर थे आखिर क्या हुआ। घटना की सच्चाई क्या है।