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चंपा देवी पार्क में भागवत कथा के तीसरे दिन नंद उत्सव की धूम, जयकारों से गूंजा पंडाल

Tue, 10 Dec 2019 08:36 PM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
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सुप्रसिद्ध कथा वाचिका आस्था भारती - फोटो : अमर उजाला
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से चंपा देवी पार्क में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन भक्त ध्रुव की संकल्प यात्रा और नंद उत्सव की धूम रही। सुप्रसिद्ध कथा वाचक साध्वी आस्था भारती ने कृष्ण जन्म की कथा सुनाकर भक्तों को भावविभोर कर दिया। कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कान्हा के जन्म की खुशी में पूरा पांडाल गुब्बारों, खिलौनों और टाफियों से सजाया गया था। ऐसा लगा कि पांडाल ही नंद भवन है। ‘नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की’, ‘नंदलाल प्रगट भये आजु बिरज में लड्डुवा बंटे’ सरीखे भजनों ने श्रद्धालुओं को झूम झूमकर नाचने पर मजबूर कर दिया।
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सुप्रसिद्ध कथा वाचिका आस्था भारती से कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
भक्त ध्रुव की कथा में साध्वी आस्था भारती ने सद्गुरु की महत्ता से परिचित कराया। कहा कि मुंडकोपनिषद कहता है कि परब्रह्म का ज्ञान प्राप्त करने के लिए मन में जिज्ञासा रखें और वेद को भली-भांति जानने वाले परमब्रह्म परमात्मा में स्थित गुरु के पास विनय पूर्वक जाएं। गुरू आपको ईश्वर के दर्शन अवश्य करवाएंगे। यही सृष्टि का अटल और शाश्वत नियम है। ध्रुव ने देवर्षि नारद के माध्यम से प्रभु की गोद प्राप्त किया। अर्जुन ने प्रभु के विराट स्वरूप का साक्षात्कार जगदगुरु भगवान श्रीकृष्ण की महती कृपा से किया। राजा जनक जीवन की सत्यता को समझ पाए पर इसके पीछे गुरु अष्टावक्र की भूमिका रही।

साध्वी ने कहा कि दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संस्थापक आशुतोष जी महाराज का भी कहना है कि ईश्वर का दर्शन यानी उस शाश्वत धर्म को प्राप्त करना, हर मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार है। इसे ही आध्यात्मिक प्रत्यक्षानुभववाद कहते हैं। अर्थात आओ और प्रत्यक्ष देखो। यह परंपरा सृष्टि के आरंभ से आज तक मान्य है और सदैव मान्य रहेगी।
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सुप्रसिद्ध कथा वाचिका आस्था भारती से कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
शिक्षा के साथ दीक्षा का समन्वय अति आवश्यक
साध्वी ने वर्तमान सामाजिक दशा पर चर्चा करते हुए कहा कि आज उच्च शिक्षित वर्ग में भी नैतिक पतन देखने को मिल रहा है। इसलिए शिक्षा के साथ दीक्षा का समन्वय अति आवश्यक है। श्री आशुतोष महाराज जी का कथन है कि वही शिक्षा सार्थक है, जिससे व्यक्ति के भीतर विवेक जागृत हो और वह समाज निर्माण में सशक्त और जिम्मेदार भूमिका निभा सके। साध्वी ने कहा कि समाज में शिक्षा के वास्तविक अर्थ को दोबारा स्थापित करने के उद्देश्य से गुरुदेव के मार्गदर्शन में वैदिक शिक्षा से प्रेरित ‘मंथन’ कार्यक्रम की नींव रखी गई। मंथन का यह अटल विश्वास है कि शिक्षा-दीक्षा के अनुपम संगम से हमारे राष्ट्र की ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व की रीढ़ मजबूत होगी।

मंथन प्रकल्प के माध्यम से आज गरीब बच्चों को शिक्षा के प्रकाश के साथ साथ विवेक का बल भी प्रदान किया जा रहा है ताकि वे नैतिक मूल्यों को सिर्फ  बोलने तक ही सीमित न रखें। इस अवसर मुख्य यजमान व्यापारी कल्याण बोर्ड के प्रदेश उपाध्यक्ष पुष्पदंत जैन, तुलस्यान फार्मा के निदेशक राजेश कुमार तुलस्यान, राम नक्षत्र सिंह ट्रेडर्स के महेंद्र सिंह, विजय अग्रवाल, अरुण कुमार मिश्रा, स्वामी नरेंद्रानंद, स्वामी सुमेधानंद, स्वामी अर्जुनानंद, जगरनाथ बैठा, मिथलेश शर्मा, दिनेश चौरसिया, अच्छेलाल गुप्ता, मुन्ना यादव, प्रभा पांडेय आदि मौजूद रहे।

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सुप्रसिद्ध कथा वाचिका आस्था भारती से कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
भजनों पर झूमे श्रद्धालु
चंपा देवी पार्क में आयोजित भागवत कथा के दौरान प्रस्तुत किए जाने वाले भजनों की मंदाकिनी में श्रद्धालुओं ने गोते लगाए। साध्वी विनयप्रदा भारती, साध्वी शालिनी भारती, साध्वी सर्वज्ञा भारती, साध्वी श्यामला भारती, स्वामी प्रमीतानंद, स्वामी हितेंद्रानंद और गुरुभाई अभिनव, साध्वी शैलजा भारती, साध्वी महाश्वेता भारती, साध्वी अर्चना भारती, साध्वी मणिमाला भारती, स्वामी मुदितानंद, स्वामी करुणेशानंद के भजनों पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
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सुप्रसिद्ध कथा वाचिका आस्था भारती से कथा सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु - फोटो : अमर उजाला
बोले श्रद्धालु
आज की कथा से सभी से एक तरह का व्यवहार करने की प्रेरणा मिली। इसे आत्मसात करके आगे बढ़ना है। हर छोटा-बड़ा व्यक्ति एक दूसरे से जुड़ा है। ऐसे में व्यवहार विनम्र होना चाहिए।
रिंकी जैन, दीवान बाजार

कथा सुनकर जीवन में गुरू की महत्ता के बारे में पता चला। सतगुरु सभी चिताओं का निवारण करते हैं। भागवत कथा कब से सुन रही हूं याद नहीं है। जहां भी भी कथा होती है, वहां जाती हूं।
कुसुम केडिया, तारामंडल

भागवत भक्ति में मन हमेशा रमा रहता है। अक्सर ये कथाएं सुनने जाता हूं। साध्वी की कथा बांके बिहारी की ही तरह ही सादगी से जीवन को जीने की प्रेरणा देती है। सीख को अमल में लाऊंगा।
राधेश्याम, रुद्रपुर

भागदत कथा प्रेम और करुणा का पाठ कराती है। साध्वी की वाणी सुनने मात्र से ही कष्ट दूर हो गए। जहां भी कथा होती है, वहां जाता हूं। श्रीमद्भागवत कथा कथा में जीवन का सार छिपा है।
रामजी, दुदही
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