आम आदमी के इस्तेमाल में आने वाली 21 जीवनरक्षक दवाओं के दाम में 50 फीसदी का इजाफा होगा। केंद्र सरकार ने इन दवाओं की कीमतों को बढ़ाने का फैसला लिया है। दरअसल, इन दवाओं को बनाने के लिए आने वाले उत्पाद चीन से आते हैं। वहां पर इनके दामों के बढ़ जाने के कारण यहां की दवाओं पर उसका असर देखने को मिल रहा है। इसमें एंटीबॉयोटिक, एंटी अलर्जिक, एंटी मलेरिया ड्रग्स, बीसीजी वैक्सीन और विटामिन सी की दवाइयां भी शामिल हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
केंद्र सरकार के अधीन संस्था नेशनल फार्मास्यूटिकल प्राइसिंग अथारिटी (एनपीपीए) ने ड्रग्स प्राइस कंट्रोल ऑर्डर 2013 के पैराग्रॉफ 19 के आदेश में संशोधन करते हुए कीमतों में बढ़ोतरी की मंजूरी दे दी गई है। पहले इस नियम का इस्तेमाल सिर्फ दवाओं की कीमतों में कमी करने के लिए होता था।
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फार्मा इंडस्ट्री बीते दो साल से दवाओं के एक्टिव फार्मास्यूटिकल्स इंग्रीडेंट (एपीआई) की कीमत में बढ़ोतरी को लेकर लाबिंग कर रही थी। इसमें खासतौर पर वो दवाएं शामिल हैं जिनको चीन से आयात किया जाता है। सरकार के इस फैसले के बाद उत्पाद के अनुसार एपीआई की कीमत में पांच से 88 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो जाएगी।
एपीआई प्राइस में 40 से 80 फीसदी फॉर्मूलेशन कॉस्ट शामिल होती है। जैसे पैरासिटामोल में अंतिम उत्पाद की कुल वैल्यू का 80 फीसदी एपीआई कॉस्ट होता है। ऐसे में बीसीजी वैक्सीन, पेंसिलिन, मलेरिया, लैप्रोसी, हार्ट फेल्योर के कारण फ्लूड बिल्डअप में इस्तेमाल होने वाली दवाएं, लीवर स्केयरिंग, किडनी संबंधी बीमारियों वाली दवाएं, विटामिन.सी, एंटीबॉयोटिक और एंटी एलर्जी दवाओं की कीमत बढ़ जाएंगी।