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ये है 'नरक': भयानक बदबू में जहां नंगे हाथ-पैर काम कर रहे सफाईकर्मी, शरीर का हुआ ऐसा हाल; हैरान कर देंगी तस्वीर

Sat, 08 Aug 2026 01:06 PM IST
Dhirendra Singh संवाद न्यूज एजेंसी, फिरोजाबाद

सार

फिरोजाबाद के चनौरा एमआरएफ प्लांट में सफाई कर्मचारी बिना दस्ताने, मास्क और सुरक्षा जूतों के सड़ते कचरे और दलदल के बीच काम करने को मजबूर हैं। कई कर्मचारियों के पैरों में फंगल इंफेक्शन, दाद-खुजली और त्वचा संबंधी समस्याएं सामने आई हैं, जबकि दो नाबालिग भी कूड़ा बीनते मिले।
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खत्ताघर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
फिरोजाबाद के चनौरा स्थित 250 टीपीडी (टन प्रति दिन) क्षमता वाले एमआरएफ प्लांट (खत्ताघर) में कूड़े के ढेर के बीच काम करने वाले सफाई कर्मचारियों के जीवन रक्षा के नियम कबाड़ हो गए हैं। सफाई कर्मचारी बिना दस्ताने, मास्क और जूते के कचरे के ढेर के बीच नरकीय परिस्थितियों में काम कर रहे हैं। आलम यह है पैरों में दाद-खुजली, रिंगवर्म और फंगल इंफेक्शन जैसी गंभीर बीमारियां हो रही हैं। मगर, नौकरी जाने के भय ने इन श्रमिकों के मुंह पर मजबूरी का ताला लगा दिया है। 

शहर से निकलने वाले गीले और सूखे कचरे के निस्तारण के लिए वर्ष 2025 में शुरू हुआ चनौरा एमआरएफ प्लांट बारिश के कारण दलदल में तब्दील हो गया है। निजी संस्था इंवायरमेट टैक्नो प्राइवेट लिमिटेड के कर्मियों और निगम के कूड़ा गाड़ियों के चालकों/सफाई कर्मचारियों को दलदल व सड़ रहे कचरे के बीच नंगे हाथ-पैर काम करना पड़ रहा है। जबकि स्पष्ट नियम है कि यहां  कर्मचारियों को लंबे सुरक्षा जूते (गमबूट), मंकी मास्क, एप्रन, ग्लव्स, सुरक्षा चश्मा, सैनिटाइजर, स्वच्छ पेयजल और फर्स्ट एड बॉक्स मिलना चाहिए, लेकिन ये सभी सुविधाएं कागजों तक ही सीमित हैं।




 
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पैर हुए खराब - फोटो : अमर उजाला
समस्या उजागर कर दो, हमारा चेहरा नहीं, पेट की खातिर मजबूर हैं...
चनौरा खत्ताघर पर काम करने वाले 40 वर्षीय श्रमिक ने अपने पैरों में हुए फंगल इंफेक्शन को दिखाते हुए कहा कि यह बिना उपकरण कार्य की देन है। वह बोले की 480 रुपये दिहाड़ी पर काम करते हैं। अगर, सुरक्षा उपकरण मांगों तो डांटा जाता है। 35 वर्षीय दूसरे श्रमिक के दोनों पैरों में इंफेक्शन हो रखा था। उसने डरते हुए बताया कि हमारी समस्या उजागर कर दो, लेकिन नाम-चेहरा नहीं। अगर, ठेकेदार को पता लगा तो नौकरी से निकाल देगा। तीसरे 42 वर्षीय श्रमिक ने हाथों की गलन, पैरों के काले व चटके हुए नाखून और पंजों से ऊपरी हिस्सों पर फैले इंफेक्शन को दिखाते हुए कहा कि पेट की मजबूरी के आगे अब यह बौने लगते हैं। परिवार में दो बच्चे और पत्नी हैं। काम करके लौटकर घर जाते हो तो बिना नहाए बच्चों तक से नहीं मिलते हैं। डर रहता है कि कहीं, उनको भी बीमारी न जकड़ ले।

 
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नाबालिग भी लगे हैं काम में - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
नाबालिग भी लगे हैं काम में
बालश्रम पर अंकुश की लाख दुहाई देने वाले अधिकारियों पर भी चनौरा खत्ताघर की व्यवस्था सवाल खड़े कर रही है। शुक्रवार दोपहर यहां दो नाबालिग भी कूड़ा बीनने में लगे हुए थे। उनके हाथों में प्लास्टिक के बोरे थे। इनके साथ एक बालिग भी था। जैसे ही इनकी तस्वीर को कैमरे में कैद करना शुरू किया, यह तीनों काम छोड़कर जाने लगे।
 

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खत्ताघर - फोटो : अमर उजाला
सफाई कर्मचारी संघों ने दी हड़ताल की चेतावनी
इस संबंध में जब सफाई कर्मचारी संगठनों ने बात की गई तो उन्होंने अधिकारियों के ढुलमुल रवैये पर कड़ा रोष जताया। उत्तर प्रदेश ठेका सफाई कर्मचारी संघ के अध्यक्ष विनय वाल्मीकि ने स्वीकार किया कि अमानवीय माहौल में काम कराए जाने से कई कर्मचारी बीमार पड़ चुके हैं। नगर निगम को पूर्व में इस बारे में अवगत कराया जा चुका है। अगर, शीघ्र सुरक्षा उपकरण मुहैया नहीं कराए, तो संगठन कामबंद हड़ताल करने को मजबूर होगा। वहीं, सफाई कर्मचारी संघ के महामंत्री विकास चंद्र वाल्मीकि ने आरोप लगाया कि निरीक्षण पर जाने वाले प्रशासनिक अधिकारी केवल खानापूर्ति कर लौट आते हैं और धरातल पर नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। निजी कंपनी को ठेका भी मोटी कमीशन के एवज में दिया जाता है, जिसके चलते सभी जिम्मेदार आंखों पर रिश्वत की पट्टी बांध लेते हैं।

 
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खत्ताघर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का है उल्लंघन
अधिवक्ता सतेंद्र सिंह बताते हैं कि एमआरएफ प्लांट व खत्ताघरों में सफाई कर्मचारियों को मास्क, दस्ताने और जूते न देना उनके संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स (2016 व 2026) के नियम 15(जेडडी) और ऑक्यूपेशनल सेफ्टी कोड 2020 के तहत कचरा निस्तारण में लगे कर्मचारियों को मुफ्त सुरक्षा उपकरण और स्वास्थ्य जांच मुहैया कराना अनिवार्य है।  सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में भोपाल नगर निगम मामले में साफ किया था कि सॉलिड वेस्ट नियमों का पालन न करना महज प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि संवैधानिक विफलता है। कंज्यूमर एजुकेशन व डॉ. बलराम सिंह केस के तहत कार्यस्थल पर बीमारी या हादसे की स्थिति में 10 लाख से 30 लाख तक के मुआवजे का प्रावधान है। 

 
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खत्ताघर - फोटो : अमर उजाला
आंकड़ों पर एक निगाह
250 टन कूड़ी प्रतिदिन निलकता है शहर में
80 से 140 टन कूड़े-कचरे का एमआरएफ प्लांट पर हो पा रहा निस्तारण
40 से अधिक श्रमिक खत्ताघर स्थित अलग-अलग कूड़ा निस्तारण प्लांटों पर करते हैं काम
 
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उंगलियों के बीच खुजली - फोटो : अमर उजाला
विशेषज्ञ की बातः
चर्म रोग विशेषज्ञ डा. दीप्ती राजौरिया ने बताया कि गंदगी, सीलन, दूषित पानी और लगातार नमी वाले वातावरण में कार्य करने से शुरुआत में पैरों की उंगलियों के बीच खुजली, जलन, त्वचा का सफेद पड़ना, छिलना और दुर्गंध जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। ज्यादा बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर संक्रमण का कारण बन सकते हैं। अगर, यह मरीज अपने परिवार के लोगों के संपर्क में आता है तो उनमें भी बीमारी फैल सकती है। 

 
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खत्ताघर - फोटो : अमर उजाला
जिम्मेदार का बयानः
अपर नगर आयुक्त एवं प्रभारी स्वच्छ भारत मिशन अजय कुमार का कहना है कि संबंधित संस्था के द्वारा नियमों की अनदेखी पर जवाब तलब किया जाएगा। अगर, जांच में सही पाया जाता है तो ब्लैक लिस्ट की कार्रवाई भी की जाएगी। बीते दिनों भी निरीक्षण के दौरान भी एमआरएफ प्लांट पर खामियां मिलीं थीं। खामियों के चलते संस्था के विरुद्ध कार्रवाई प्रचलित है।
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