चित्रकूट जेल में हुए गैंगवार पर सवाल उठ रहे हैं। हाई सिक्योरिटी बैरक होने के बावजूद अंशू का मेराज की बैरक में पहुंच जाना। अंशू तक पिस्टल और कारतूस का पहुंचना सबसे बड़ा सवाल है। सूत्रों के मुताबिक सुबह नाश्ते के वक्त उसको पिस्टल पहुंचाई गई थी। वहीं मेराज और मुकीम के जेल में शिफ्ट होने के कुछ ही दिन बाद गैंगवार होना ये संयोग कम साजिश अधिक लग रहा है। अब जांच में ही इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है। हालांकि अंशू के मारे जाने से तमाम सवालों के जवाब मिलना मुश्किल होगा। मुन्ना बजरंगी को जिस तरह बागपत जेल में मारा गया था, ठीक उसी तरह यहां गैंगवार हुआ है। ये मुन्ना बजरंगी पार्ट-2 गैंगवार लग रहा है। हालांकि यहां पर अंशू मारा गया, वहां मुन्ना को मारने वाला सुनील राठी बच गया था।
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जेल के शस्त्रागार के बाहर तैनात फोर्स
- फोटो : amar ujala
दरअसल, मेराज मुख्तार अंसारी के गैंग का गुर्गा था। मुकीम काला खुद अपना गैंग चलाता था और अंशू भी खुद अपने गैंग का सरगना था। इन तीनों का आपस में कोई कनेक्शन नहीं है। इसलिए सवाल उठ रहा है कि जब इनका आपस में कोई कनेक्शन नहीं है और न ही कोई पुरानी रंजिश तो अचानक से अंशू ने दोनों को क्यों मार दिया? यहीं से गैंगवार में साजिश की आशंका पनप गई है।
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जांच कर निकलते अधिकारी
- फोटो : amar ujala
वहीं, मेराज और अंशू दोनों अलग-अलग हाई सिक्योरिटी बैरक में रहते थे। सुरक्षा को धता बताते हुए अंशू आखिर मेराज की बैरक तक कैसे पहुंच गया। इसके पीछे भी साजिश लग रही है। जिसमें आशंका है कि उसको मेराज की बैरक तक जाने दिया गया।
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अंशू दीक्षित की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
ये बेहद अहम और बड़ा इत्तेफाक!
अंशू डेढ़ साल से चित्रकूट जेल में था। मेराज अली 20 मार्च 2021 को वाराणसी जेल से चित्रकूट जेल शिफ्ट किया गया था। मुकीम काला को 7 मई 2021 को सहारनपुर जेल से चित्रकूट जेल भेजा गया था।
इसके ठीक सातवें दिन शुक्रवार को अंशू ने दोनों को मार दिया और खुद मुठभेड़ में मारा गया। अंशू का जेल में पहले से रहना और अन्य दोनों का कुछ दिन पहले जेल में शिफ्ट करना। उसके तुरंत बाद गैंगवार हो जाना ये इत्तेफाक कम साजिश ज्यादा लग रहा है।