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चित्रकूट जेल गैंगवार: दो घंटे तक गोलीबारी देखने वाले खूंखार बंदी सहमे, जेल की व्यवस्थाओं पर उठ रहे सवाल

Tue, 18 May 2021 11:48 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
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चित्रकूट जेल गैंगवार मामला - फोटो : अमर उजाला
चित्रकूट में जिला जेल रगौली के भीतर लगभग दो घंटे तक ताबड़तोड़ गोलियों की बौछार देखने वाले खूंखार अपराधी भी सहमे हैं। बाहरी जिलों खासकर पश्चिम यूपी से आए अन्य कुख्यात बंदियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। जेल प्रशासन ने इन पर सख्ती बढ़ा दी है। संभावना है कि गैंगवार में मारे गए अपराधी मेराज अली व मुकीम काला समेत पुलिस मुठभेड़ में ढेर अंशू दीक्षित के कई साथी भी अभी यहां हैं और उन्हें घटना की पहले से जानकारी रही होगी।

फिर दोबारा ऐसी वारदात न हो, इसलिए ऐसे बंदियों के बैरक की दिन और रात में दो बार तलाशी ली जा रही है। जेल के हाई सिक्योरिटी वाले बैरक के पास ही बाहर से आने वाले अपराधियों के लिए बनी आइसोलेट बैरक में कुल 21 बंदी थे, जिसमें तीन के मारे जाने के बाद अब 18 बंदी बचे हैं। इन बचे बंदियों के चेहरे पर दहशत है और बैरक की ओर आने जाने वाले हर शख्स को देख सहम जाते हैं।

 
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चित्रकूट जेल गैंगवार मामला - फोटो : अमर उजाला
जेल की व्यवस्थाओं पर भी उठे सवाल
जिला जेल रगौली में कुख्यात अपराधी अंशू दीक्षित द्वारा दो कुख्यात अपराधियों मेराज अली और मुकीम काला को पहले पिस्टल से गोलियों की बौछार करके मौत के घाट उतारने फिर पुलिस मुठभेड़ में खुद के ढेर होने के बाद से सुरक्षित कही जाने वाली जेल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब दो घंटे तक जिला जेल में गोलीबारी से जहां यह बात भी उभरकर आई है कि जेलों की व्यवस्था कुख्यात अपराधी अपने हिसाब से चलाते हैं, वहीं सुरक्षा व्यवस्था की पोल भी खुल गई है। कई जानकारों ने कहा कि सुरक्षित कही जाने वाली जेल अब कब्रगाह बनती जा रही है।
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चित्रकूट जेल गैंगवार मामला - फोटो : अमर उजाला
जेल के अंदर शार्प शूटर अंशू दीक्षित के पास विदेशी पिस्टल मैग्जीन संग पहुंचना जहां सवालों के घेरे में है, वहीं यह बात भी सामने आई है कि कुख्यात मेराज अली और मुकीम काला को कहीं भी आने जाने की जेल में छूट थी। पूरे जेल में कुछ ही दिनों में इनका दबदबा बन गया था। 14 मई को गैंगवार के दिन अंशू दीक्षित ने जिस तरह से पिस्टल के बल पर चार-पांच बंदियों को बंधक बनाकर खुद को छोड़ने का दबाव बनाता रहा, उससे उसके जेल के अंदर के दबदबे का अंदाजा लगाया जा सकता है।

 

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घटना के बाद छावनी बनी चित्रकूट जेल (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
जेल गेट से अंदर तक चार जगह होती जांच
जेल के गेट में प्रवेश के लिए चार जगह जांच से होकर गुजरना पड़ता है। इसके बाद भी आसानी से विदेशी पिस्टल, मैग्जीन, एनड्रायड मोबाइल व अन्य विलासिता की सामग्री बंदियों तक पहुंचना इस बात की तरफ इशारा करता है कि जेल की व्यवस्थाओं में घोर लापरवाही जारी थी। साथ ही बंदियों और अफसरों-कर्मियों के बीच सेटिंग का खेल भी चल रहा है। अधिवक्ता सीपी गुप्ता ने कहा कि अपराधियों को मुकदमे केनिस्तारण तक जेल में इसलिए रखा जाता है कि वह वह सुरक्षित रहें, लेकिन अब चित्रकूट जेल के अलावा कई अन्य जेलों में हुई घटनाओं ने सुरक्षा के मानकों पर सवाल खडे़ किए हैं। हृयूमन राइटस लॉ नेटवर्क के जिला सचिव रुद्र प्रसाद मिश्र ने कहा कि ऐसे अपराधियों के कारण अन्य सामान्य बंदियों की आफत रहती है। सामान्य बंदियों को ही जेल में बलि का बकरा बनना पड़ता है।

जेलों में सुरक्षा ही प्राथमिकता होती है। इस जेल में भी सुरक्षा के इंतजाम तो हैं, लेकिन सीसीटीवी कैमरे खराब होने से जांच में कुछ अड़चन आ रही है। फिलहाल जांच जारी है। -संजीव त्रिपाठी, डीआईजी जेल

 
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गेट पर तैनात फोर्स - फोटो : amar ujala
गैंगवार के बाद पुलिस मुठभेड़ पर भी सवाल
जिला जेल में पिछले शुक्रवार को गैंगवार के बाद पुलिस मुठभेड़ लगभग एक घंटे तक चली। हाइसिक्योरिटी वाली चित्रकूट जेल में एक पिस्टल लेकर बैरक के पास घूम रहे अपराधी को पकड़ने या मार गिराने के लिए जिले की भारी पुलिस बल को एक घंटे संघर्ष करना पड़ा, जो पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। जंगल या किसी अंजान स्थान पर बदमाशों से मुठभेड़ में तो इतना समय लग सकता है, लेकिन खुले में 70 मीटर के दायरे में मौजूद अपराधी को मार गिराने में एक घंटे का समय लग गया, जो सवाल खड़े कर रहा है। 
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