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चित्रकूट जेल में खूनी खेल: सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से एक और खुलासा, सूचना के 11 मिनट बाद पहुंचे थे जेल अफसर

Sun, 23 May 2021 01:23 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
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चित्रकूट जेल गैंगवार मामला - फोटो : अमर उजाला
चित्रकूट में जिला जेल रगौली में ईद के दिन (14 मई) को हुए गैंगवार के बाद पुलिस मुठभेड़ में मारे गए कुख्यात बदमाश और शार्प शूटर अंशू दीक्षित जब खूनी खेल खेल रहा था, तब जेल परिसर में बने आवास से निलंबित जेल अधीक्षक व जेलर को मौके पर पहुंचने में 11 मिनट लग गए। दोनों अधिकारी जब पहुंचे तो तत्काल अलार्म नहीं बजवाया, बल्कि पहुंचने के 14 मिनट बाद बजाने का हुक्म दिया गया। मामले की जांच कर रहे अधिकारी डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी ने गेट के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से अफसरों के समय का जब मिलान कराया तो मामला खुला। जेल के हाई सिक्योरिटी बैरक व आइसोलेट बैरक के पास हुए गैंगवार की जांच कई बिंदुओं पर हो रही है। जेल के अधिकारी व ड्यूटी पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों के बयान पर जांच टीम ने समय का मिलान करने का प्रयास किया है। मुख्य गेट के बाहर के सीसीटीवी फुटेज से जेल के अंदर आने के समय का मिलान कर जांच अधिकारी ने चार दिन तक माथापच्ची की है।
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चित्रकूट जेल गैंगवार मामला - फोटो : अमर उजाला
जांच अफसर को निलंबित जेल अधीक्षक श्रीप्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि वह कार्यालय सुबह 7 बजकर 02 मिनट पर पहुंचे, उस समय जेलर महेंद्र पाल बैरक खुलवाकर बंदियों को नित्य क्रिया के लिए कह रहे थे। इसके बाद जेलर 7 बजकर 55 मिनट पर आवास चले गए, जबकि जेल अधीक्षक काम निपटाने के बाद 9 बजकर 30 मिनट पर आवास चले आए थे। 

 
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चित्रकूट जेल गैंगवार मामला - फोटो : अमर उजाला
नौ बजकर 55 मिनट पर जेल अधीक्षक व जेलर को बैरक में अंशू दीक्षित के फायरिंग करने की सूचना मिली और दोनों 10 बजकर 06 मिनट पर बैरक के पास पहुंचे। इसके बाद बंदियों के पास जाकर स्थिति देखी और 10 बजकर 20 मिनट पर सायरन बजवा फिर अफसरों को सूचना दी। अब इसकी भी जांच हो रही कि आखिर जेल कार्यालय से सवा सौ मीटर दूर जेल अधीक्षक व जेलर के आवास हैं।

 

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घटना के बाद छावनी बनी चित्रकूट जेल (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
बैरक के पास गोलियां चलने जैसी अति गंभीर सूचना मिलने के बाद इन दोनों को वहां पहुंचने में 11 मिनट कैसे लग गए। इसके बाद जब दोनों ने वहां के हालात देखे और अंशू दीक्षित को असलहा लहराते व दो बंदियों को गोली मारने की जानकारी के बाद भी सायरन बजवाने में 14 मिनट तक इंतजार क्यों किया गया। इन सब बिंदुओं पर डीआईजी जेल ने जांच पड़ताल व पूछताछ की है।

बंदी रक्षकों के बयान का भी मिलान
जेल के निलंबित बंदी रक्षक संजय खरे व हरीमोहनराम के अलावा संदिग्ध वार्डन जगमोहन व पीडी पाल से भी जांच टीम ने शुक्रवार की सुबह से लेकर घटना के दौरान उनकी मौजूदगी व आने जाने के समय का मिलान किया है। सभी से लिखित रूप से व वीडियो बयान दर्ज किए गए हैं। एक दिन पूर्व ही बंदी रक्षक पीडी पाल की अचानक हाई सिक्योरिटी बैरक से ड्यूटी हटाकर बाहर लगाने, कोरोना पॉजिटिव जगमोहन की 13 की रात व 14 की सुबह घटनास्थल पर बिना ड्यूटी मौजूदगी भी जांच में मुख्य रूप से शामिल है। इनके समय के बयान और गेट से सीसीटीवी फुटेज के आधार पर रिकॉर्ड से मिलान का काम हुआ है।
 
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मुकीम, अंशू और मेराज की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
नौ दिन बाद पांच सीसीटीवी कैमरे ठीक किए
जेल में खूनी खेल होने के नौ दिन बाद भी सीसीटीवी कैमरे पूरे नहीं बन पाये हैं। दो दिन से मरम्मत का काम कर रही टीम ने पांच कैमरे सही किए, लेकिन अभी भी 20 कैमरे खराब हैं। कुल 32 कैमरों में 28 कैमरे जेल के दो माह से खराब पडे़ थे। इस बाबत जेल प्रशासन का कहना था कि कई बार पत्राचार किया गया,  लेकिन राजकीय निर्माण निगम कार्यदायी संस्था ने कर्मचारी नहीं भेजे। शासन से भी कैमरे खराब होने और बनवाने के प्रयासों की रिपोर्ट मांगी गई थी।

16 मई को कैमरे की जांच करने इंजीनियरों की टीम आई थी, अब जांच के बाद शनिवार तक पांच कैमरे संचालित कर दिए गए हैं। अन्य कैमरों को भी बनाने का काम जारी है। एक दो दिन में सभी कैमरे दुरुस्त हो जाएंगे। - अशोक कुमार सागर, जेल अधीक्षक

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