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बदायूं में बाढ़ की तबाही: कई गांव पानी से घिरे, सैकड़ों बीघा जमीन गंगा में समाई, खुद अपने घर तोड़ रहे ग्रामीण

Sun, 23 Aug 2026 02:57 PM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, बदायूं

सार

बदायूं के उसहैत क्षेत्र में गंगा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। कदमनगला समेत कई गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। वहीं कटान से भारी तबाही हुई है। सैकड़ों बीघा जमीन के साथ कई घर नदी में कट चुके हैं। 
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उसहैत इलाक में बाढ़ - फोटो : अमर उजाला
बदायूं जिले में खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंगा नदी ने उसहैत क्षेत्र के गांव कदमनगला में तबाही मचानी शुरू कर दी है। स्कूल, मेंथा प्लांट का भंडार गृह, छह कच्चे मकान गंगा में समाने के बाद शनिवार को गांव में पानी आ गया। इससे ग्रामीणों में हाहाकार मचा है। गांव में रह रहे परिवारों के सामने रोटी बनाने के साथ जानवरों को चारा खिलाने तक का संकट पैदा हो गया है। बता दें कि बीते एक माह से कदमनगला लगातार कटान का सामना कर रहा था। आधा गांव नदी में कट चुका है। चार सौ बीघा खेती गंगा में समा चुकी है। दूसरी तरफ गंगा का पानी गांव में आ चुका है। कच्चे मकानों के अंदर पानी पहुंच गया है। रविवार को भुनडी ग्राम के पास बने तटबंध के निकट भी कटान शुरू हो गया। इससे ग्रामीणों में दहशत है।  

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झोपड़ियों में भरा पानी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बाढ़ में बढ़ी ग्रामीणों की मुश्किलें 
दातागंज तहसील क्षेत्र की सिथौली खाम ग्राम पंचायत क्षेत्र के गांव कदमनगला में 21 कच्चे-पक्के मकान हैं। इनमें 55 लोग रहते थे। इनमें से 25 लोग अपनी रिश्तेदारियों में चले गए। अभी 30 लोग गांव में रह रहे हैं। 150 जानवर भी गांव में हैं। बाढ़ का पानी आने के बाद ग्रामीणों के सामने कई समस्याएं खड़ी हो गई हैं। 24 घंटे में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। इसका सीधा असर बाढ़ प्रभावित गांवों में हुआ है।
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पानी में टहनी खींचकर ले जाता ग्रामीण - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
भुनडी गांव के निकट अब तक लगभग 200 बीघा खेती की जमीन गंगा में समा चुकी है। रामसिंह, श्यामसिंह, लोकपाल, राजबहादुर, जगपाल समेत कई किसानों के खेत नदी में कट गए हैं। किसानों ने इन खेतों में धान की रोपाई कर रखी थी। लगातार कटान जारी है। कई किसानों ने खेतों में यूकेलिप्टस के पेड़ लगाए थे। वह आज अपने खेतों से पेड़ काट कर तटबंध के किनारे डाल रहे हैं ताकि कटान को रोका जा सके। 

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सड़क पर खड़े ग्रामीण - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बाढ़ खंड के अधिकारियों ने बताया कि गांव तटबंध के अंदर है। तटबंध को खतरा नहीं है। गांव के अंदर पानी आने की कोई संभावना नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि राजस्व विभाग के अधिकारी और बाढ़ खंड के अधिकारी मौके का मुआयना कर चुके हैं। अभी तक किसी ने कोई राहत की घोषणा नहीं की है। समाजसेवी शैलेश पाठक ने यहां ग्रामीणों को अपनी ओर से राहत सामग्री वितरित की है। 
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कटान के डर से खुद अपने घर तोड़ रहे ग्रामीण - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खुद अपने घर तोड़ रहे ग्रामीण 
गांव कदमनगला में स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। यहां के अधिकांश लोग गांव छोड़ सुरक्षित स्थानों पर जा चुके हैं। गांव के अमित कुमार ने बताया कि गांव में उनका घर लगभग 300 वर्ग गज में बना हुआ था, जिसमें कुल पांच परिवार रहते थे। एक मंजिल मकान था जिसके टूटने से लगभग 15 लाख का नुकसान हुआ है। कटान के डर से ग्रामीण खुद ही अपने घर तोड़ रहे हैं ताकि ईंट व अन्य सामान बचाया जा सके। 
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ग्राम जटा में पुलिया पार करते हुए ग्रामीण - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्रशासन की ओर से अब तक बाढ़ प्रभावित इलाकों में राशन वितरित किया गया है। इसके अतिरिक्त ग्राम कदम नगला के राजाराम, नेकराम, मीना महेश को उनके मकान गंगा में कटने के एवज में आर्थिक मदद भी दी जा रहा है। लेखपाल अमित ने बताया कि इन तीन ग्रामीणों के मकान गंगा में कट गए थे। जिसके बाद इनकी फाइल तैयार कर आगे बढ़ा दी गई है। आने वाले  दिनों में जिस किसी का भी मकान गंगा में कटेगा उनको आर्थिक मदद दी जाएगी। 
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बाढ़ से घिरा कदमनगला गांव - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गांवों में लगा स्वास्थ्य शिविर
ग्राम कदमनगला, रैपुरा में स्वास्थ्य शिविर का भी आयोजन किया गया। यहां ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया एवं दवाएं वितरित की गईं। इसके अतिरिक्त 550 पैकेट राशन भी बाढ़ प्रभावित गांव में बांटे गए हैं। 

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बाढ़ के पानी से निकलता युवक - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पूर्व माध्यमिक विद्यालय में बनाया बाढ़ शिविर 
जिला प्रशासन ने गांव दलनगला के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में बाढ़ शिविर बनाया है। वहां रहने के इंतजाम किए हैं लेकिन अभी एक भी ग्रामीण बाढ़ शिविर रुकने नहीं गए हैं। प्रशासन बाढ़ ग्रस्त गांवों में राशन किट वितरण करने की तैयारी में जुटा है। 
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उफान पर बह रही गंगा नदी - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गंगा का पानी सात सेंटीमीटर और बढ़ा
गंगा का जलस्तर शनिवार को सात सेंटीमीटर और बढ़ गया। शुक्रवार को कछला गंगा पुल पर 162.48 मीटर गेज पानी रिकॉर्ड हुआ। जबकि शनिवार सुबह 162.55 मीटर गेज पानी रिकॉर्ड हुआ। जबकि, खतरे का निशान 162.42 मीटर गेज पर है। वहीं, गंगा में नरौरा बैराज से 1.34 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
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