उत्तर प्रदेश के बिजनौर में आखिर समाज किस ओर जा रहा है। जिन मासूमों को ममता की छाया और दुलार मिलना चाहिए था, उन्हें मौत मिल रही है। थम रही मासूमों की सांसों के साथ ममता भी मर रही है। जी हां, औरंगपुर भिक्खू में एक महिला ने अपनी डेढ़ साल की बेटी को मार डाला। वजह कुछ भी रही हो, लेकिन मासूम बच्ची को अपनी मां के हाथों ही मौत मिली। मेंटल ब्रेकडाउन की स्थिति में हो रहे ये कांड सोचने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
औरंगपुर भिक्खू में बच्ची की हत्या का अकेला मामला नहीं है। जिले में पहले भी ऐसे मामले आ चुके हैं। जिसमें अपनों ने ही मासूमों को मार डाला। अपनी कुछ जरूरतों या इच्छाओं की पूर्ति में बाधा बन रहे बच्चों की हत्या करने में भी अपनों के ही हाथ नहीं कांप रहे। इच्छाओं की पूर्ति न होने के कारण गृह क्लेश की स्थिति बनती है।
हालात कई बार अनियंत्रित होते हैं तो व्यक्ति की सोचने और समझने की क्षमता खत्म हो जाती है। ऐसे में लोग परिवार में सबसे कमजोर कहे जाने वाले बच्चों पर गुस्सा निकालते हैं, क्योंकि बच्चे न तो विरोध कर सकते हैं और न ही बचाव कर सकते हैं। आत्म नियंत्रण खो जाने पर लोग बच्चों की हत्या तक कर रहे हैं।
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मासूम बच्ची की फाइल फोटो
- फोटो : amar ujala
केस नंबर एक
नगीना के लुहारी सराय में एक सितम्बर 2022 को आसिफ की पत्नी खुदशिया ने छह महीने के बेटे अरहान को नौ वर्ष की बालिका की मदद ने नाले में फेंकवा दिया था। पुलिस ने खुदशिया को बेटे की हत्या में गिरफ्तार किया तो खुलासा हुआ कि वह अपने प्रेमी के संग जाना चाहती थी। मासूम बेटा प्रेमी के संग जाने में बाधा बन रहा था। यह पूरा मामला सीसीटीवी की मदद से खुल सका था।
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पुलिस के साथ खड़ी आरोपी मां
- फोटो : amar ujala
केस नंबर दो
नगीना के ही मोहल्ला शेखसराय में 19 अप्रैल 2022 को आरोपी जफर अपनी एक माह की नातिन का अपहरण कर ले गया था। नाना ने ही बच्ची को दिल्ली में ले जाकर बेच दिया। जफर ने प्रेम संबंधों की खातिर अपनी नातिन को बेच दिया था। हालांकि पुलिस ने बच्ची को बरामद कर लिया था।
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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी मां
- फोटो : amar ujala
केस नंबर तीन
22 मार्च 2022 को नहटौर थाना के गांव अकबरपुर निवासी अंकुर की 4 वर्षीय बेटी अनामिका की हत्या हो गई थी। आरोपी अर्जुन ने संतान प्राप्ति के लिए एक तांत्रिक क्रिया के लिए बच्ची की गला दबाकर हत्या कर दी। हत्या करने के बाद उसके शव को झोपड़ी में अपनी मां की पुरानी धोती में लपेटकर गांव के तालाब के पास एक गन्ने के खेत में फेंक आया था।
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डॉ. दीप्ति गुप्ता
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सामाजिक वातावरण ऐसा हो गया है कि अपनी जरूरतों को पहले ध्यान दे रहा है। सामाजिक और नैतिक मूल्यों को दरकिनार कर रहा है। मातृत्व भी नैतिक मूल्यों में ही आता है। ऐसे में मनो विक्षिप्ता की स्थिति बन जाती है। फिर व्यक्ति या महिला अवरोधों को खत्म करने की कोशिश करता है - डॉ. दीप्ति गुप्ता, मनोविज्ञानी
मेंटल ब्रेकडाउन की स्थिति बनने पर हालातों को नियंत्रित करने की क्षमता खत्म हो जाती है। परिस्थितियों का सामना नहीं करने की स्थिति में अपनों का ही खून कर देते हैं। डेढ़ साल की बेटी को मारने वाली महिला की अगर काउंसलिंग हो जाती तो शायद इस घटना को रोका जा सकता था। नारी के जीवन में काफी समस्या आती हैं। बहुत सारी चीजों से जूझ रही होती है, जिसे वो ठीक नहीं कर पाती - आयुषी दीक्षित, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट