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Bijnor: नरभक्षी गुलदार ने बकरी को मारकर खाया, लेकिन पकड़ में अब तक न आया, एक दर्जन गांवों पर अगले 48 घंटे भारी

Mon, 07 Aug 2023 01:13 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
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गुलदार की तलाश - फोटो : अमर उजाला
गुलदार को पकड़ना वन विभाग के लिए चुनौती बन रहा है। वहीं बिजनौर के तकरीबन एक दर्जन गांवों के लिए अगले 48 घंटे बेहद भारी गुजरने वाले हैं। वन विभाग के अनुसार नरभक्षी गुलदार सिकंदरपुर गांव के जंगल में लौट आया है। वन विभाग ने विभाग द्वारा खुले में बकरी बांधी गई थी, जिसे रात गुलदार मारकर खा गया। आज टीम उसके पगचिन्हों का पीछा कर रही है। माना जा रहा है कि शीघ्र ही उसे मार या पकड़ लिया जाएगा। वहीं ऐसा नहीं होने पर इस क्षेत्र में अगले इंसानी शिकार की आशंका से लौट सहमे हुए हैं। 
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गुलदार। - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर शहर के पास दिखा गुलदार, थर्मल ड्रोन कैमरे में तस्वीर कैद
अब गुलदार का खौफ जिला मुख्यालय तक पहुंच गया है। थर्मल ड्रोन कैमरे में शहर के पास गुलदार की तस्वीर कैद हुई है। वहीं शहर तक गुलदार आने से लोग डरे हुए हैं। 
 
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गुलदार पकड़ने के लिए लगाया गया पिंजरा - फोटो : अमर उजाला
गुलदार अब तक 13 लोगों को मौत के घाट उतार चुके हैं जबकि 20 से ज्यादा लोगों को घायल भी कर चुके हैं। वन्य जीव विशेषज्ञ और जिम कार्बेट रिसर्च स्कॉलर जोएल लायेल कहते हैं कि आमतौर पर बाघ सामने से हमला कर देता है, लेकिन गुलदार के मामले में दूसरा पक्ष बहुत खतरनाक है।

गुलदार पेड़ पर चढ़ने में माहिर होता है और यह छिपने के लिए किसी पेड़ पर चढ़कर बैठ सकता है। इसके अलावा यह घास और खेत में इतना शातिरता से छिपकर बैठ सकता है कि पड़ोस से निकलने वालों को इसकी भनक तक न लगे। इसलिए इसे छलिया भी कहा जाता है।

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गुलदार को ट्रेंकुलाइज करने की तैयारी करते पशु चिकित्सक। - फोटो : अमर उजाला
20 दिन में नगीना और रेहड़ क्षेत्र में नरभक्षी गुलदार चार लोगों की जान ले चुका है। अब खुद वन विभाग ने भी दो गुलदार के नरभक्षी होने की बात स्वीकार ली है। ऐसे में वन्य जीव विशेषज्ञों की माने तो अगले 48 घंटे घटनास्थल के आसपास पांच से दस किलोमीटर की दायरे में आने वाले गांवों के लोगों के लिए भारी है। यदि समय रहते नरभक्षी को मारा या पकड़ा नहीं गया तो वह इन क्षेत्रों में कहीं पर भी अगला इंसानी शिकार कर सकता है।

 
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गुलदार के हमले में घायल महिला - फोटो : अमर उजाला
17 जुलाई को अकबराबाद में महिला को नरभक्षी गुलदार ने मार डाला था। इसके बाद यह सिलसिला आगे बढ़ गया और फिर 27 जुलाई को तेलीपुरा, 30 जुलाई को रेहड़ के पास और फिर दो अगस्त को कोतवाली देहात के पास सिंकदरपुर गांव में एक वृद्ध को गुलदार ने मार डाला। सिकंदरपुर में जिस तरह वृद्ध को गुलदार ने खाया, उससे उसकी उम्र आठ से दस साल के बीच होने की अनुमान भी वन विशेषज्ञ लगा रहे हैं।
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बिजनौर में गुलदार से बचने के लिए नए-नए तरीके ढूंढ रहे लोग। - फोटो : अमर उजाला
विशेषज्ञों के अनुसार पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पता चला था कि गुलदार ने वृद्ध ब्रह्मपाल की छाती से मांस खाया गया। उसके दिल, लीवर, फेफड़े समेत करीब साढ़े चार किलो मांस भी खा लिया गया। उसकी सात पसलियां तक नरभक्षी ने तोड़ दी थीं। ऐसे में माना जा रहा था कि गुलदार की पूरी खुराक करीब सात से आठ किलो मांस तक रहती है। ऐसे में पांच किलो मांस खाने पर उसे दोबारा चार से छह दिन में भूख लगने लगती है। नरभक्षी का यह समय अब पूरा हो रहा है। ऐसे में पिछले चार दिनों में यदि नरभक्षी गुलदार ने किसी वन्य जीव का शिकार नहीं किया होगा तो वह अगले 48 घंटे में किसी इंसान को शिकार बना सकता है।
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गुलदार के हमले - फोटो : अमर उजाला
भीड़ से बचकर अकेले इंसान पर करेगा हमला
जिम कार्बेट के रिसर्च स्कॉलर एवं वन्य जीव व्यवहार के विशेषज्ञ जोएल लायेल कहते हैं कि नरभक्षी गुलदार के व्यवहार पर बात करें तो वह सामान्य गुलदार से ज्यादा चतुर हो जाता है। जहां सामान्य गुलदार खड़े हुए इंसानों पर हमला नहीं करते, वहीं नरभक्षी इंसानों को अपना भोजन समझने लगता है।

वह भीड़ से बचकर अकेले इंसान को तलाशता है। जहां ज्यादा भीड़ या शोर शराबा होगा, वह उस जगह को छोड़कर दूसरी जगह पर चला जाएगा। ऐसे में जंगल जाने वाले अकेले लोगों पर अधिक खतरा मंडरा रहा है।
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