अलकायदा से जुड़े आतंकी संगठन अंसार गजवत उल हिंद को कुछ समय पहले तक सिर्फ कश्मीर के दायरे में सीमित माना जाता था लेकिन अप्रैल से कश्मीर में सुरक्षा बलों और पुलिस ने गजवत उल हिंद के आतंकियों का सफाया शुरू किया तो उसका देशभर में फैला नेटवर्क भी सामने आ गया।
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इनामुल हक
- फोटो : अमर उजाला
एटीएस के सूत्र बता रहे हैं कि मई में राजपोरा में एक तहसीलदार के घर आतंकियों का ठिकाना पकड़े जाने के साथ गजवत उल के एक आतंकी की गिरफ्तारी के बाद कई अहम राज सामने आए। इसके बाद कश्मीर के बाहर दूसरे राज्यों में भी अंसार गजवत उल हिंद के जेहादियों के खिलाफ मुहिम शुरू हुई। बरेली के इनामुल की गिरफ्तारी भी इसी मुहिम का एक कड़ी बन गई।
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सुरक्षाबल
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद आतंकियों का सफाया भी शुरू हो गया। कश्मीर में इस दौरान सबसे ज्यादा सक्रिय आतंकी संगठन अंसार गजवत उल हिंद और हिजबुल मुजाहिदीन सुरक्षा बलों का खासतौर पर निशाना बने। एटीएस सूत्रों के मुताबिक अप्रैल में शोपियां जिले के जैनापोरा इलाके में एक साथ गजवातुल के चार आतंकियों को मार गिराया गया।
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सुरक्षाबल
हफ्ता भर बाद ही गजवत उल हिंद का चीफ बुरहान कोका भी सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारा गया। हालांकि, सबसे बड़ी कामयाबी तब मिली जब मई में अंसार गजवत उल हिंद और हिजबुल मुजाहिदीन के कई आतंकियों की गिरफ्तारी के साथ पुलवामा जिले के राजपोरा में एक तहसीलदार के घर आतंकियों का ठिकाना भी पकड़ा गया।
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मौके पर सुरक्षाबल
- फोटो : एएनआई
एटीएस सूत्र बताते हैं कि छानबीन में पता चला कि तमाम आतंकी इसी ठिकाने पर रुकते थे और अपने हथियार भी यहीं छिपाते थे। पकड़े गए आतंकी अपने संगठन में सूचनाएं इधर से उधर करने का काम करने के साथ आतंकियों का इस ठिकाने पर रुकने का इंतजाम करते थे लिहाजा उनसे कई महत्वपूर्ण जानकारियों के साथ कई अहम दस्तावेज भी बरामद हुए।
इसी के बाद देश के दूसरे हिस्सों में भी इस आतंकी नेटवर्क का पता चला। बरेली के इनामुल की गिरफ्तारी का वाकया भी इसी से जुड़ा बताया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस आतंकी संगठन के लिए बतौर स्लीपिंग मॉड्यूल काम कर रहे तमाम और जेहादियों को चिह्नित किया गया है जिनकी लगातार तलाश भी की जा रही है।