बरेली में विजयदशमी के अवसर पर मंगलवार को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में हार्टमन मैदान में अहंकारी रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया गया। वहां पर मौजूद लोगों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। सुभाषनगर और कैंट की रामलीला में भी पुतला दहन हुआ।
बरेली के हार्टमन मैदान पर आयोजित 459वीं रामलीला में विजयदशमी पर मंगलवार को अहंकारी रावण के पुतले का दहन किया गया। उसकी बुराई की राख पर सत्य का प्रकाश दिखा तो श्रद्धालुओं ने श्रीराम के जयकारे लगाए। असत्य पर सत्य की जीत का जश्न मनाया। श्रीराम के आदर्श से सीख लेने का नाद दसों दिशाओं में गूंजा। बुराई के चेहरे को जलता देखने के लिए शाम ढलते ही मैदान पर लोगों की भीड़ उमड़ने लगी। जैसे-जैसे समय बीता, चहल-पहल और रौनक बढ़ती गई। रावण पुतला दहन से पहले कलाकारों की टोली ने श्रीराम और रावण के बीच युद्ध का मंचन किया।
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हार्टमन रामलीला मैदान में लगे पुतले
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
युद्ध में श्रीराम लगातार तीर मारते हैं लेकिन रावण पर प्रभाव नहीं होता है। इस बीच विभीषण ने श्रीराम को रावण की नाभि में अमृत होने से अमरत्व का रहस्य बताया। इसके बाद श्रीराम ने रावण की नाभि में दिव्य तीर मारकर उसका वध किया।
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पुतला दहन के बाद हुई आतिशबाजी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इससे पहले प्रसंगों के अनुसार, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले दहन किए गए। रंग-बिरंगी आतिशबाजी के साथ धूं-धूंकर जला बुराई का चेहरा रावण के पुतले को जलता देख सभी लोगों ने श्रीराम के जयकारे लगाए। उन्होंने सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा ली।
पुतले दहन के साथ 70वें दशहरा मेले का समापन
दशहरा रामलीला धार्मिक सेवा समिति की ओर से विष्णु इंटर कॉलेज के मैदान पर आयोजित 70वां दशहरा मेला मंगलवार को संपन्न हुआ। समिति के महामंत्री रवि छावड़ा ने बताया कि पहले मॉडल टाउन में लगने वाला यह मेला अब विष्णु इंटर कॉलेज मैदान पर होता है। मंगलवार शाम श्रीहरि मंदिर से राजगद्दी यात्रा का शुभारंभ हुआ।
यात्रा सनातन धर्म मंदिर, रामायण मंदिर और दरगाह मंदिर से होते हुए मेला स्थल पहुंची। वहां 50 फुट ऊंचे रावण और 40-40 फुट ऊंचे मेघनाद व कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया गया। इसके बाद शानदार आतिशबाजी मुकाबला हुआ। मेले में खानपान, झूले सहित अन्य सामग्री के स्टॉल लगाए गए थे।
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रामलीला का मंचन करते कलाकार
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि ब्रज क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष पूरन लाल लोधी, सांसद छत्रपाल सिंह गंगवार, राज्यसभा सदस्य धर्मपाल सिंह व श्रुति गंगवार, वनमंत्री डॉ. अरुण कुमार, कैंट विधायक संजीव अग्रवाल, मेला कमेटी के अध्यक्ष अनुपम कपूर, मेला इंचार्ज अतुल कपूर आदि मौजूद रहे।
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रावण के पुतले का दहन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
लीला में कुंभकर्ण, मेघनाद और अहिरावण का किया वध
उत्तराखंड सांस्कृतिक समाज की ओर से आयोजित श्री रामलीला महोत्सव में मंगलवार को लीलाओं का मंचन हुआ। राम से युद्ध के लिए रावण ने छह माह से सो रहे भाई कुंभकर्ण को जगाया। कुंभकर्ण के समझाने पर भी रावण नहीं माना और श्रीराम से युद्ध कराया। अंत में वह श्रीराम के हाथों मारा गया। इसके बाद रावण के बेटे मेघनाद ने अजेय यज्ञ शुरू किया, जिसे हनुमान और वानर सेना ने विध्वंस कर दिया। इससे क्रोधित मेघनाद ने युद्ध किया तो लक्ष्मण से पराजित हुआ।
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राम-रावण युद्ध का मंचन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसके बाद रावण ने भाई अहिरावण का आह्वान किया। उसने विभीषण का रूप धरकर श्रीराम-लक्ष्मण को पाताल लोक में बंधक बना लिया। उनकी बलि देने की कोशिश की। हनुमान ने पाताल पहुंचकर अहिरावण का वध कर प्रभु को मुक्त कराया। फिर श्रीराम ने युद्ध में रावण की नाभि पर बाणों से प्रहार कर उसका वध किया।
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पुतला दहन देखने के लिए उमड़ी भीड़
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सदर बाजार कैंट स्थित श्री रामलीला नाटक समाज के सांस्कृतिक मंच पर मंगलवार को रावण वध की लीला का मंचन किया गया। श्रीराम और रावण के बीच शक्तिशाली अस्त्रों-शस्त्रों से भीषण युद्ध हुआ। विभीषण के कहने पर श्रीराम ने दिव्य बाण से रावण की नाभि पर प्रहार किया, जिससे वह मर गया। इसके साथ ही श्रीराम के जयकारों से पंडाल गूंज उठा। इस दौरान रामलीला कमेटी के अध्यक्ष सतीश मेहता, सचिव सुनील कुमार सिंह, मदनपाल, विनोद यादव, सचदेव सागर, सतीश कुमार जायसवाल, अभिषेक गुप्ता आदि मौजूद रहे।
रावण के साथ सेल्फी लेते दर्शक
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युद्ध के बाद दहन किए पुतले
सुभाषनगर में आयोजित रामलीला में मगंलवार को श्रीराम, लक्ष्मण व हनुमान आरती से मेले का शुरुआत की गई। युद्ध में श्रीराम ने रावण का वध किया। इसके साथ ही पंडाल में जयकारे गूंजे। मैदान पर लगे रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले फूंके गए। इस दौरान अध्यक्ष अशोक शर्मा, मंत्री आलोक तायल, प्रदीप अग्रवाल, राजकुमार तिवारी, हर्ष अग्रवाल, प्रदीप अग्रवाल आदि मौजूद रहे।