कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विशाल मेहरोत्रा ने बताया कि यहां पताका को मंदिर के प्रांगण में लगे पीपल के वृक्ष पर बांधकर विधिवत रामलीला की शुरुआत करने की अनुमति भगवान से ली जाती है। यह परंपरा रामलीला के साथ ही शुरु हुई थी। यात्रा में नगर निगम के उप सभापति सर्वेश रस्तोगी, हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर सिद्धराज सिंह, नवीन शर्मा, अखिलेश अग्रवाल, पंकज मिश्रा, विवेक शर्मा, महेश पंडित, सुरेश, सत्येंद्र पांडेय आदि मौजूद रहे।
शहर में निकाली गई पताका यात्रा
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इसी के बाद वहां रहने वाले लोगों ने होली के आठ दिन पहले इसे कराने की परंपरा डाल दी, तब से ही होली से रामलीला की शुरुआत हो गई, और यह निरंतर चलती चली आ रही है। रामलीला के दौरान होली पर निकलने वाली राम बरात सबसे खास होती है, जो पूरे शहर भर में घूमती हैं।
समय के साथ रामलीला में होते रहे बदलाव
श्रीराम लीला सभा कमेटी से वरिष्ठ उपाध्यक्ष विशाल मेहरोत्रा बताते है कि पहले रामलीला का मंचन ब्रह्मपुरी व शहर में रहने वाले लोग ही करते थे। लेकिन समय के साथ काम की अधिकता के चलते लोग इससे दूर होते गए। एक दौर ऐसा आया कि स्थानीय कलाकारों को अभाव होता गया। जिसके बाद कमेटी के सदस्यों ने रामलीला के मंचन के लिए दूसरे शहरों से टोलियां आने लगी। इस बार अयोध्या से रामायण के मंचन के लिए टोली को बुलाया गया है जो अपना किरदार निभाएंगे। यह टोली शनिवार को श्रीगणेश पूजन के साथ अपनी प्रस्तुति देंगी।
यूनेस्को ने घोषित की विश्व धरोहर
यूनेस्को ने 2015 में शहर के ब्रह्मपुरी में होने वाली रामलीला को विश्व धरोहर घोषित किया। 1861 से लगातार चली आ रही इस रामलीला की खासियत ये है कि इसका मंचन बरेली के अलग अलग मोहल्लों में होता है, अगस्त्य मुनि से संबंधित लीला का मंचन छोटी बमनपुरी स्थित अगस्त्य मुनि आश्रम में, राम-केवट संवाद साहूकारा में, मेघनाद यज्ञ बमनपुरी में और लंका दहन मलूकपुर चौराहा पर होता है। रविवार से रामलीला के मंचन की शुरुआत हो जाएगी।