फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Holi 2025: बरेली में पताका यात्रा के साथ शुरू हुई ऐतिहासिक रामलीला, यूनेस्को ने घोषित की है विश्व धरोहर

Sat, 08 Mar 2025 09:21 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

बरेली में होली पर होने वाली रामलीला विश्व विख्यात है। यूनेस्को ने 2015 में इस रामलीला को विश्व धरोहर घोषित किया। होली पर यह अनूठी परंपरा 1861 से निरंतर चली आ रही है। 
 
विज्ञापन
शहर में निकाली गई पताका यात्रा - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हाथों में भगवा ध्वज, मुख पर जय श्रीराम के जयकारे, छतों से होती पुष्प वर्षा, भजनों पर झूमते लोग यह नजारा शनिवार को बरेली के ब्रह्मपुरी का था। होली पर ब्रह्मपुरी में होने वाली 165 वीं फाल्गुनी रामलीला की शुरुआत पताका यात्रा के साथ हो गई। नृसिंह मंदिर में भगवान श्रीगणेश, हनुमान जी का विधि-विधान के साथ पूजन किया गया। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण व माता सीता के स्वरूप के सजे बच्चों की आरती उतारी गई, जिसके बाद पताका यात्रा की शुरुआत हुई। 

विज्ञापन


बैंड बाजे के साथ निकली पताका यात्रा में भक्तों ने अपने हाथ के भगवा ध्वज धारण किए हुए थे। जय श्रीराम, जय हनुमान, हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। घरों से लोगों ने यात्रा पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। पताका यात्रा नृसिंह मंदिर से शुरु होकर कर मलूकपुर चौराहा, सौदागरान, आलाहजरत, सीताराम कूंचा, बड़ा बाजार, दामोदर रास गली, बमनपुरी, मलूकपुर चौराहा होते हुए हनुमान मंदिर पर पहुंची। 

विज्ञापन

कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विशाल मेहरोत्रा ने बताया कि यहां पताका को मंदिर के प्रांगण में लगे पीपल के वृक्ष पर बांधकर विधिवत रामलीला की शुरुआत करने की अनुमति भगवान से ली जाती है। यह परंपरा रामलीला के साथ ही शुरु हुई थी। यात्रा में नगर निगम के उप सभापति सर्वेश रस्तोगी, हिंदू युवा वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर सिद्धराज सिंह, नवीन शर्मा, अखिलेश अग्रवाल, पंकज मिश्रा, विवेक शर्मा, महेश पंडित, सुरेश, सत्येंद्र पांडेय आदि मौजूद रहे।

शहर में निकाली गई पताका यात्रा - फोटो : अमर उजाला
ऐसे हुई थी रामलीला की शुरुआत
ब्रह्मपुरी के रहने वाले बुजुर्ग सतीश बताते हैं कि अंग्रेजी शासन काल के दौरान शहर के ब्रह्मपुरी इलाके में सन 1861 में इस रामलीला की शुरुआत हुई थी। मान्यता है कि इस रामलीला की शुरुआत बच्चों ने की थी। बताते हैं कि होली के दौरान पहले लंबे समय छुट्टी के समय होती थी जिसमें बच्चे आपस में ही खेल-खेल में इसे मंचन करते थे।

इसी के बाद वहां रहने वाले लोगों ने होली के आठ दिन पहले इसे कराने की परंपरा डाल दी, तब से ही होली से रामलीला की शुरुआत हो गई, और यह निरंतर चलती चली आ रही है। रामलीला के दौरान होली पर निकलने वाली राम बरात सबसे खास होती है, जो पूरे शहर भर में घूमती हैं।
 

समय के साथ रामलीला में होते रहे बदलाव
श्रीराम लीला सभा कमेटी से वरिष्ठ उपाध्यक्ष विशाल मेहरोत्रा बताते है कि पहले रामलीला का मंचन ब्रह्मपुरी व शहर में रहने वाले लोग ही करते थे। लेकिन समय के साथ काम की अधिकता के चलते लोग इससे दूर होते गए। एक दौर ऐसा आया कि स्थानीय कलाकारों को अभाव होता गया। जिसके बाद कमेटी के सदस्यों ने रामलीला के मंचन के लिए दूसरे शहरों से टोलियां आने लगी। इस बार अयोध्या से रामायण के मंचन के लिए टोली को बुलाया गया है जो अपना किरदार निभाएंगे। यह टोली शनिवार को श्रीगणेश पूजन के साथ अपनी प्रस्तुति देंगी। 
विज्ञापन

यूनेस्को ने घोषित की विश्व धरोहर
यूनेस्को ने 2015 में शहर के ब्रह्मपुरी में होने वाली रामलीला को विश्व धरोहर घोषित किया। 1861 से लगातार चली आ रही इस रामलीला की खासियत ये है कि इसका मंचन बरेली के अलग अलग मोहल्लों में होता है, अगस्त्य मुनि से संबंधित लीला का मंचन छोटी बमनपुरी स्थित अगस्त्य मुनि आश्रम में, राम-केवट संवाद साहूकारा में, मेघनाद यज्ञ बमनपुरी में और लंका दहन मलूकपुर चौराहा पर होता है। रविवार से रामलीला के मंचन की शुरुआत हो जाएगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें