दो दिन पहले भारी बारिश के बाद जब पानी से लबालब बरेली शहर में सड़कों पर गहरे गड्ढे हादसों की वजह बन रहे थे तो मेयर उमेश गौतम की पानी में कागज की नाव तैराकर बचपन की यादें ताजा करने की सलाह चर्चा का विषय बन गई थी। ठेले पर लोहा ढोने वाले मजदूर अर्जुन ने यह सलाह मानी होती तो शायद उसकी जान यूं न चली जाती। मंगलवार शाम नगर निगम के अब्दुल कलाम मार्ग पर लोहे से भरा उसका ठेला अचानक एक गड्ढे में पलटा और उसके नीचे दबकर उसकी मौत हो गई। इस हादसे के बाद उसका परिवार बेसहारा हो गया है। डोहरा गौंटिया में किराए के कमरे में परिवार के साथ रहने वाले 35 वर्षीय अर्जुन मूल रूप से खुदागंज (शाहजहांपुर) के रहने वाले थे और पीलीभीत बाईपास पर पंचशील कॉलोनी के सामने स्थित एक लोहे की दुकान पर काम करते थे। मंगलवार शाम वह अपने ठेले पर दुकान से करीब छह क्विंटल लोहे के गर्डर लेकर निकले थे। अब्दुल कलाम मार्ग (मिनी बाईपास) पर भास्कर अस्पताल के आगे पानी से भरे गहरे गड्ढे में पहिया आने से उनका ठेला उन्हीं के ऊपर पलट गया। जब ठेले को सीधा कर अर्जुन को निकाला गया, तब तक उन्होंने दम तोड़ दिया।
विज्ञापन
2 of 6
Bareilly News
- फोटो : अमर उजाला
अर्जुन के साथ काम करने वाले गौंटिया के ही निवासी फारूख ने बताया कि मंगलवार दोपहर करीब ढाई बजे वे दोनों अपने-अपने ठेलों पर लोहे के गर्डर लादकर निकले थे। अर्जुन का ठेला आगे था, कुछ ही कदम पीछे वह चल रहे थे। भास्कर अस्पताल के आगे सड़क पर गड्ढे में पहिया आने से अर्जुन का ठेला पलट गया। उसे संभालने की कोशिश में अर्जुन नीचे गिरे तो लोहे भारीभरकम गर्डर उनके ऊपर आ गिरे।
विज्ञापन
3 of 6
Bareilly News
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने दौड़कर गर्डर हटाने की कोशिश की। अकेले इसमें कामयाब नहीं हुए तो लोगों को इकट्ठा किया। उन्हें निकालकर भास्कर अस्पताल ले गए लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। जिस सड़क पर दुर्घटना हुई, वह नगर निगम की है। सड़क पर कई और जगह जानलेवा गड्ढे हैं। अमर उजाला ने हाल ही में कई बार खबरें प्रकाशित कर चेताया भी था कि यह गड्ढे कभी भी किसी की जान ले सकते हैं। इसके बावजूद अफसरों ने सड़क की सुध नहीं ली।
4 of 6
Bareilly News
- फोटो : Bareilly News
पांच छोटे बच्चे, पत्नी और बुजुर्ग पिता का पेट पालते थे अर्जुन
अर्जुन का छोटा भाई राधाकृष्ण भी बरेली में रहकर मजदूरी करता है। उसने बताया कि अर्जुन के साथ उनके पिता भी रहते थे। इसके अलावा अर्जुन की पत्नी ममता और चार छोटी बेटी और एक बेटा है। उन सभी पालन पोषण वह मजदूरी के दम पर कर रहा था। पत्नी ममता ने बताया कि मंगलवार की सुबह पांच बजे वह दुकान पर काम करने की बात कहकर निकले थे।
विज्ञापन
5 of 6
रिक्शा के नीचे दबकर गई मजदूर की जान
- फोटो : अमर उजाला
दुकान मालिक से समझौता कराने की कोशिश में लगे रहे सपा के नेता
भाष्कर अस्पताल में मृत घोषित किए जाने के बाद अर्जुन का शव उनके परिजन एंबुलेंस से पीलीभीत बाईपास स्थित उस दुकान पर ले गए जहां वह काम करते थे। इसी बीच कुछ सपा नेता भी वहां पर पहुंच गए। वे दुकानदार की तरफ से मृतक के परिजन से सुलह समझौते की बात करते रहे। इस दौरान गौंटिया के तमाम लोगों की भीड़ भी मौके पर जमा हो गई। पुलिस भी पहुंच गई। देर रात तक इस मामले में किसी भी थाने में रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई थी।
सड़क दुर्घटना में मजदूर की मौत होने की जानकारी है लेकिन उसका परिवार बारादरी थाना क्षेत्र के निवासी है, इसलिए वे लोग वहीं चले गए। हमें कोई जानकारी नहीं दी। - दयाशंकर, थाना प्रभारी इज्जतनगर
सड़क दुर्घटना होने के बारे में पता चला है लेकिन थाने में अब तक इस बारे में कोई शिकायत नहीं दी गई है। शिकायत होती है तो आगे की कार्रवाई की जाएगी। - नीरज मलिक, थाना प्रभारी बारादरी